
देश के छोटे और मध्यम कारोबारियों की आय को दोगुना करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में सोयाबीन प्रोसेसिंग (processing) एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है. पर्यावरण-अनुकूल अनाज-दलहन माना जाने वाला सोयाबीन न केवल प्रोटीन, तेल और उत्तम स्वास्थ्य का एक बड़ा सोर्स है, बल्कि अब यह ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यापार का एक मुनाफेदार जरिया भी बन चुका है. हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, ऑटोमैटिक सोया-मिल्क प्लांट लगाकर देश के अलग-अलग राज्यों में लोग सालाना लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं.
कृषि क्षेत्र में तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देते हुए ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग (भोपाल) और M/s रॉयल प्लांट सर्विसेज (दिल्ली) ने मिलकर 100 लीटर प्रति घंटा की क्षमता वाला एक आधुनिक और पूरी तरह से ऑटोमैटिक सोया-मिल्क प्लांट तैयार किया है.
इस प्लांट में इंसानी दखल और शारीरिक मेहनत को बेहद कम कर दिया गया है. इसमें प्रमुख रूप से ग्राइंडिंग और फीडिंग यूनिट लगी है जहां 20 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से सोयाबीन की पिसाई की जाती है. इसमें बॉयलर और कुकर सिस्टम लगा है जिसमें 12 kW हीटर वाले बॉयलर से 490 kPa दबाव और 150 ºC तापमान पर भाप छोड़ी जाती है. कुकर का तापमान 120 ºC पर पहुंचने के बाद ऑटोमेशन वाल्व के जरिए सोया स्लरी सीधे सेपरेटर में चली जाती है. इसमें सेपरेटर और टोफू प्रेस भी लगा है जो सिस्टम सोया-मिल्क और ओकारा (फाइबर) को अलग करता है और हाई क्वालिटी वाला दूध और टोफू (सोया पनीर) तैयार करता है.
इस तकनीक को अपनाकर देश के अलग-अलग हिस्सों में उद्यमियों ने शानदार सफलता हासिल की है-
1. रांची (झारखंड): पांच लोगों को मिला रोजगार, सालाना 5.91 लाख का लाभ
रांची के कामरे में स्थित M/s श्री श्यामा काली एंटरप्राइजेज ने इस प्लांट को लगाया है. वे साल भर हर दूसरे दिन 70 लीटर सोया-मिल्क और 10 किलोग्राम टोफू का उत्पादन करते हैं. 15 रुपये प्रति लीटर की लागत वाले दूध को वे 40 रुपये में और 50 रुपये प्रति किलो की लागत वाले टोफू को 150-200 रुपये प्रति किलो में बेचते हैं. इससे उन्हें सालाना 5,91,500 रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है, साथ ही पांच स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला है.
2. होशियारपुर (पंजाब): सालाना 13 लाख रुपये से अधिक की बंपर कमाई
पंजाब के होशियारपुर जिले के गम्भावोल में M/s एग्रो सोया-मिल्क ऑर्गेनिक प्लांट्स ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. हर दूसरे दिन 100 लीटर सोया-मिल्क और 60 किलोग्राम टोफू का उत्पादन करके यह फर्म सालाना कुल 13,10,400 रुपये का बंपर मुनाफा कमा रही है. यहां का सोया-मिल्क 45 रुपये लीटर और टोफू 120-150 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है, जिसने क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर को काफी बेहतर बना दिया है.
3. बेंगलुरु और राजस्थान में भी पैर पसार रहा कारोबार
कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित M/s लव-सोय फूड प्रोडक्ट्स लिमिटेड सोयाबीन से केवल दूध या टोफू ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर पाउडर भी बना रही है. यह कंपनी सालाना 20 टन सोया-मिल्क पाउडर और 3 से 4 टन टोफू का उत्पादन कर सफलतापूर्वक बिजनेस चला रही है. वहीं, राजस्थान के राजसमंद में M/s मंथन सोया प्रोडक्ट्स हर दूसरे दिन 50 लीटर दूध और 25 किलो टोफू बनाकर सालाना 4,95,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार, सोया-मिल्क असल में सोयाबीन का पानी में निकाला गया शुद्ध अर्क होता है. इसे तैयार करने के दौरान होने वाली हीटिंग प्रोसेस से इसमें मौजूद हानिकारक तत्व निष्क्रिय हो जाते हैं. इसके बाद फॉर्मूलेशन और फोर्टिफिकेशन (पोषक तत्व बढ़ाने की प्रक्रिया) के जरिए इसे इंसानों के पोषण के लिए बेहद फायदेमंद बना दिया जाता है.
(सोर्स- ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, भोपाल)