Bihar News: कैसे बिहार हल्‍दी की खेती में बनेगा नंबर वन, तैयार हुआ एक खास ब्‍लूप्रिंट 

Bihar News: कैसे बिहार हल्‍दी की खेती में बनेगा नंबर वन, तैयार हुआ एक खास ब्‍लूप्रिंट 

हल्दी में बिहार का हिस्सा बहुत कम है और यह देश के कुल उत्पादन का करीब 0.25 प्रतिशत है. समस्तीपुर बिहार का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक जिला है. यह राज्य के उत्पादन में 55 प्रतिशत से ज्‍यादा का योगदान देता है. साल 2022-23 में, जिले ने 1.54 हजार हेक्टेयर से करीब 1.56 हजार टन हल्दी का उत्पादन किया. इसकी औसत उत्पादकता 1.01 टन प्रति हेक्टेयर थी.

क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 01, 2026,
  • Updated Jan 01, 2026, 9:41 AM IST

बिहार में इस हल्‍दी की खेती पर एक खास प्‍लान तैयार किया गया है. तैयार हाल ही में जारी एक पॉलिसी पेपर के मुताबिक एक बड़ा हल्दी एक्शन प्लान किसानों की इनकम बढ़ा सकता है. साथ ही बिहार को भारत की हल्दी इकॉनमी में एक कॉम्पिटिटिव ताकत के तौर पर उभरने में मदद कर सकता है. प्‍लान के तहत समस्तीपुर को इस बदलाव का हब माना गया है. डॉक्‍टर राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (आरपीसीएयू) की तरफ से इस पर एक पॉलिसी पेपर तैयार किया गया है. 

पॉपुलर होती खास 'बिहारी' किस्‍म  

यूनिवर्सिटी की तरफ से बिहार में हल्दी–‘गोल्डन स्पाइस’ की क्षमता का पूरा प्रयोग, राज्य में उगाई जाने वाली किस्मों के लिए ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) के मौके ढूंढने के अलावा एक स्टेट एक्शन प्लान बनाने पर जोर देता है. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ने हल्दी की दो ज्‍यादा पैदावार वाली किस्में-राजेंद्र सोनिया और राजेंद्र सोनालिका विकसित की गई हैं. 

इनकी पैदावार 40-45 टन प्रति हेक्टेयर और 50-55 टन प्रति हेक्टेयर है. यूनिवर्सिटी की तरफ से इन किस्‍मों को बाकी किस्‍मों की तुलना में बेहतर बताया गया है. राजेंद्र सोनिया किसानों के बीच तेजी से पॉपुलर हो गई है और बीज बाजार में इसकी कमर्शियल अपील भी काफी बढ़ गई है. हल्‍दी की यह किस्‍म अब सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्‍ट्र,पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़ और असम के व्यापारी और किसान भी इसे खरीदने लगे हैं. 

किसानों को हो सकेगा मुनाफा 

यूनिवर्सिटी के पॉलिसी पेपर के अनुसार राजेंद्र सोनिया और राजेंद्र सोनालिका किस्मों में 7-8.4 प्रतिशत करक्यूमिन होता है. यह मात्र GI-टैग वाली लोकाडोंग किस्म से भी ज्‍यादा है.  हल्‍दी की इस किस्‍म में करीब 7.5 प्रतिशत करक्यूमिन होता है. पॉलिसी पेपर के अनुसार GI स्टेटस और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन हासिल करने से बिहार की हल्दी को घरेलू और एक्सपोर्ट दोनों बाजारों में, खासकर फार्मास्यूटिकल्स और न्यूट्रास्युटिकल्स में प्रीमियम कीमत दिलाने में मदद मिल सकती है.

बढ़ेगी बिहार की हिस्‍सेदारी 

हल्दी में बिहार का हिस्सा बहुत कम है और यह देश के कुल उत्पादन का करीब 0.25 प्रतिशत है. समस्तीपुर बिहार का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक जिला है. यह राज्य के उत्पादन में 55 प्रतिशत से ज्‍यादा का योगदान देता है. साल 2022-23 में, जिले ने 1.54 हजार हेक्टेयर से करीब 1.56 हजार टन हल्दी का उत्पादन किया. इसकी औसत उत्पादकता 1.01 टन प्रति हेक्टेयर थी. हल्दी में रोजगार पैदा करने, खेती से होने वाली आय बढ़ाने और खेती पर आधारित उद्योगों को सपोर्ट करने की क्षमता को देखते हुए, इस फसल को जिले के खेती के विकास के लिए एक खास प्रोडक्ट के तौर पर पहचाना गया है. 

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडे ने हाल ही में इस पेपर को जारी किया है. इसमें किसान प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन (FPO) को मजबूत करने का सुझाव दिया गया है. साथ ही, बिहार में FPO के जरिए हल्दी की मार्केटिंग के लिए एक फ्रेमवर्क भी पेश किया गया है. इसमें जिलों, खासकर समस्तीपुर में प्रोसेसिंग यूनिट्स की भी बात कही गई है, जहां सरकार ने अपने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट प्रोग्राम (ODOP) के तहत हल्दी की पहचान की है.

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