
मॉनसून की शुरुआत के साथ ही इस समय पूरे देश में धान की रोपाई और खरीफ फसलों की बुआई का काम बेहद तेजी से चल रहा है. इस मुख्य कृषि सीजन में देश का किसान अपनी फसलों की अच्छी पैदावार और उन्हें सही समय पर जरूरी पोषण देने के लिए खाद यानी उर्वरक का बंदोबस्त करने में पूरी ताकत से जुटा हुआ है. हालांकि, सीजन की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें और तस्वीरें सामने आ रही थीं कि किसान खाद की कमी को लेकर चिंतित हैं और कई सरकारी बिक्री केंद्रों तथा ग्रामीण सहकारी समितियों (पैक्स) के बाहर किसानों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं. खाद की किल्लत की अफवाहों और किसानों में बढ़ती घबराहट के बीच,
केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा में आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए पूरे देश को पूरी तरह आश्वस्त किया है. उर्वरक मंत्री ने संसद में साफगोई से बताया कि इस समय देश में उर्वरक की कोई किल्लत नहीं है और यूरिया, डीएपी (DAP), एमओपी (MOP) तथा एनपीकेएस (NPKS) सहित सभी प्रमुख उर्वरकों का भरपूर स्टॉक गोदामों में उपलब्ध है, जिसकी आपूर्ति लगातार हर जिले में की जा रही है.
राज्यसभा मेंकेंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री.नड्डा ने 'एक राष्ट्र, एक उर्वरक' पहल यानी "भारत" (Bharat) ब्रांड को लागू करने के मूल कारणों और इसके दूरगामी फायदों पर विस्तार से प्रकाश डाला. केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2022 से 'प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना' (PMBJP) के तहत इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू किया था. इसके तहत सभी सार्वजनिक, सहकारी और निजी क्षेत्र की उर्वरक कंपनियों के लिए सब्सिडी वाले खादों को अनिवार्य रूप से केवल एक ही सामान्य ब्रांड नाम "भारत" के अंतर्गत बेचना तय किया गया है. मंत्री जी ने बताया कि पहले बाजार में दर्जनों निजी और सरकारी कंपनियों के अलग-अलग ब्रांड्स उपलब्ध थे, जिससे किसानों में भारी भ्रम और असमंजस रहता था और वे किसी खास ब्रांड के पीछे भागते थे.
इसके अलावा, कंपनियां एक ही खाद को दूर-दराज के राज्यों में भेजती थीं, जिससे बेवजह परिवहन का समय और खर्च बढ़ता था. 'भारत' ब्रांड आने से अब पूरे देश में एक समान गुणवत्ता, एक तय रियायती मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हुई है. इससे फर्जीवाड़े, कालाबाजारी और गलत व्यापारिक तौर-तरीकों पर लगाम लगी है तथा देश के हर कोने में किसानों तक फसलों के पोषक तत्वों की समान पहुंच सुनिश्चित हुई है. अब सभी सब्सिडी वाले उर्वरक यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस देश में केवल 'भारत' ब्रांड नाम से बेचे जा रहे हैं.
उर्वरक मंत्री.नड्डा ने कहा कि देश भर में उर्वरकों का समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक मजबूत आपूर्ति और डिजिटल ट्रैकिंग तंत्र स्थापित किया है. हर फसल सीजन से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्यों के साथ बैठक करके महीने-वार जरूरत का आकलन करता है. इसके बाद उर्वरक विभाग एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) नाम के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए कारखानों से लेकर जिला और रिटेल दुकान स्तर तक खाद की पल-पल की आवाजाही पर बारीक नजर रखता है. इसके साथ ही विदेशी आयात का अग्रिम प्रबंध समय रहते किया जाता है और रेल मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय बनाकर रेलवे रैक के जरिए प्राथमिकता पर खादों की ढुलाई की जाती है. इस हाई-टेक डिजिटल मॉनिटरिंग और चुस्त आपूर्ति व्यवस्था के कारण आज देश के किसी भी हिस्से में खाद की कृत्रिम कमी पैदा होने का अंदेशा खत्म हो चुका है तथा राज्यों के पास उनकी मांग के अनुसार जरूरत से ज्यादा स्टॉक उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसान भाइयों को समय पर सहूलियत से खाद मिल रही है.
संसद में प्रस्तुत खरीफ 2026 01 अप्रैल से 29 जुलाई 2026 तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में यूरिया की कुल मांग 122.84 लाख मीट्रिक टन थी, जिसके मुकाबले 177.27 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया. इसमें से 112.53 लाख मीट्रिक टन की बिक्री के बाद भी 29 जुलाई तक देश में 64.75 लाख मीट्रिक टन यूरिया का विशाल क्लोजिंग स्टॉक मौजूद है. इसी प्रकार, डीएपी की 35.44 लाख मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 43.03 लाख मीट्रिक टन उपलब्धता रही, जिसमें से 26.59 लाख मीट्रिक टन बिक्री के बाद 16.44 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक सुरक्षित बचा है. इसके अलावा, एनपीकेएस की 53.99 लाख मीट्रिक टन मांग के विरुद्ध 88.93 लाख मीट्रिक टन उपलब्धता दर्ज की गई, जिसमें बिक्री के बाद भी 44.19 लाख मीट्रिक टन का क्लोजिंग स्टॉक मौजूद है. वहीं एमओपी की 11.20 लाख मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 14.31 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता दर्ज की गई. ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि देश में खाद की कुल प्राप्यता किसानों की मांग और वास्तविक बिक्री दोनों से काफी अधिक है.
राज्यसभा में अपने वक्तव्य केंद्रीय उर्वरक मंत्री ने देश के किसान को पूरा भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर जिला स्तर तक खाद की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं. राज्यों के भीतर दुकानों और प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) तक खाद पहुंचाना राज्य सरकारों का काम होता है, और केंद्र सरकार इस दिशा में राज्य प्रशासनों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है. भारतीय रेल के माध्यम से खाद के रैक प्राथमिकता के आधार पर भेजे जा रहे हैं ताकि किसी भी क्षेत्र में अस्थाई कमी न होने पाए। केंद्रीय मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की कमी से जुड़ी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और पैनिक बाइंग यानी जरूरत से अधिक खरीद या जमाखोरी से बचें. समितियों पर बेवजह लाइन लगाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश और राज्यों के पास पर्याप्त खाद का सुरक्षित भंडार मौजूद है. सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि हर किसान को उसकी फसल की आवश्यकता के अनुसार सही समय पर, सही रियायती दाम पर और 'भारत' ब्रांड के तहत उच्च गुणवत्ता वाला उर्वरक आसानी से उपलब्ध कराया जाता रहेगा.