केंद्र सरकार की तरफ से मनरेगा की जगह आए नए कानून VB-G RAM G को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है. ग्रामीण क्षेत्रों में इस नए कानून को लेकर जहां सरकार सुगम रोजगार का वादा कर रही है तो वहीं आलोचकों की तरफ से कई तरह की बातें कहीं जा रही हैं. सरकार का कहना है कि VB–G RAM G कानून को लेकर कुछ समूह लगातार भ्रामक दावे फैला रहे हैं. इन दावों से ग्रामीण जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है. सरकार ने ऐसे सभी आरोपों का तथ्यात्मक और कानूनी आधार पर खंडन किया है और साफ किया है कि नया कानून ग्रामीण अधिकारों को कमजोर नहीं बल्कि पहले से ज्यादा मजबूत करता है. सरकार की तरफ से कुछ सवालों के जवाब देकर भ्रमों को या गलतफहमियों को साफ करने की कोशिश की गई है. एक नजर में जानिए कि वो कौन से सवाल हैं और वो कौन से जवाब हैं जो सरकार की तरफ से दिए गए हैं.
क्या हैं दावे और क्या है सच्चाई
दावा-काम का अधिकार छीना जा रहा है.
सच्चाई-
- नए कानून में काम की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है.
- 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा.
- पहले तकनीकी अड़चनों के कारण भत्ता नहीं मिल पाता था, अब वे सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं.
- अब अधिकार सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, जमीन पर लागू होगा.
दावा- चुनिंदा ग्राम पंचायतों को ही काम मिलेगा.
सच्चाई
- यह दावा निराधार है.
- कानून पूरे देश में एक साथ लागू होगा.
- हर ग्रामीण ग्राम पंचायत इसके दायरे में आएगी.
- 'Notified area'केवल कानूनी शब्द है, इसका मतलब चुनिंदा गांव नहीं होता.
दावा-मजदूरी घटा दी जाएगी या मनमानी होगी.
सच्चाई
- नए कानून में मजदूरी को लेकर साफ प्रावधान हैं:
- हर साल मजदूरी दर घोषित होगी.
- मजदूरी MGNREGA से अधिक होगी.
- भुगतान 7–14 दिन के भीतर करना अनिवार्य होगा.
- देरी होने पर जुर्माना देना होगा.
- समय पर भुगतान अब मजदूर का कानूनी अधिकार है.
दावा- फसल के समय काम बंद हो जाएगा
सच्चाई
- इस बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है.
- राज्य सरकारें अधिकतम 60 दिन के लिए काम स्थगित कर सकती हैं ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो.
- लेकिन 125 दिन की काम की गारंटी बनी रहेगी.
- यह सिर्फ समय का समायोजन है, अधिकार खत्म करना नहीं.
दावा-ग्राम पंचायतों से अधिकार छिन जाएंगे, ठेकेदार आ जाएंगे.
सच्चाई
यह दावा सरासर झूठ है.
- ग्राम पंचायतें:
- काम तय करेंगी.
- योजनाएं बनाएंगी.
- ग्राम सभा से मंजूरी लेंगी.
- निगरानी करेंगी.
- कानून में साफ लिखा है:
- कोई ठेकेदार नहीं होगा.
- कम से कम 50 फीसदी काम पंचायतों के माध्यम से ही होगा.
दावा- मेट और रोजगार सहायक नहीं रहेंगे
सच्चाई
- नए कानून में प्रशासनिक खर्च 6% से बढ़ाकर 9% किया गया है.
- इसका मतलब:
- मेट बने रहेंगे.
- रोजगार सहायक बने रहेंगे.
- तकनीकी स्टाफ और सोशल ऑडिट टीमें भी जारी रहेंगी.
दावा-राज्य सरकारों पर भारी बोझ पड़ेगा.
सच्चाई
- यह आधी सच्चाई है.
- केंद्र सरकार पहले से ज्यादा फंड दे रही है.
- कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹1.5 लाख करोड़ है.
- राज्य का हिस्सा बोझ नहीं, निवेश है, जिससे:
- रोजगार बढ़ता है.
- गांवों में टिकाऊ संपत्ति बनती है.
- पलायन घटता है.
- स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है.
- 60:40 और 90:10 का वित्तीय ढांचा पहले से सफल योजनाओं में लागू है, जैसे PMGSY, PMAY-G और जल जीवन मिशन.
दावा- महिलाओं और SC/ST परिवारों को नुकसान होगा.
सच्चाई
- यह दावा पूरी तरह गलत है.
- नया कानून प्राथमिकता देता है:
- SC/ST परिवारों को.
- महिलाओं को.
- दिव्यांगों को.
- गरीब परिवारों को.
- इसके तहत:
- ज्यादा काम के दिन.
- समय पर मजदूरी.
- मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली.
- गांवों में टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण.
- यह कानून भूख, कर्ज और पलायन को कम करता है, बढ़ाता नहीं.
इस कानून से मिलेगा ज्यादा काम
सरकार के अनुसार
- नया कानून:
- ज्यादा काम देता है
- समय पर मजदूरी देता है
- पंचायतों को मजबूत करता है
- गरीबों की सुरक्षा बढ़ाता है
- गांवों को मजबूत बनाता है
- यह पीछे जाना नहीं है.
- यह सुधार और मजबूती है.
यह भी पढ़ें-