
असम के बक्सा जिले से निकला शहद अब अमेरिका के लोगों की मिठास बढ़ाएगा. पहली बार इस जिले से शहद की खेप संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए रवाना की गई है, जो न सिर्फ स्थानीय किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि असम के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है. खास बात यह है कि केंद्र सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) पहल के तहत इस निर्यात को बढ़ावा मिला है. गुवाहाटी से रवाना हुई इस पहली खेप ने बक्सा जिले के शहद को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खोल दिया है.
इस शहद की खेप को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) से रजिस्टर्ड कंपनी 'साल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड' ने तैयार और निर्यात किया है. कृषि विभाग की आयुक्त और सचिव अरुणा राजोरिया ने इस पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. करीब 20 लाख टन शहद की यह खास खेप गुवाहाटी से अमेरिका भेजी गई है. इस शहद को गुवाहाटी स्थित कंपनी की यूनिट में प्रोसेस और पैक किया गया.
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, बक्सा जिले का शहद अपनी बेहतरीन क्वालिटी के लिए जाना जाता है. यह ऐसे इलाकों से आता है जहां पर्यावरण साफ-सुथरा है और कीटनाशकों का इस्तेमाल बहुत कम होता है. यही वजह है कि इस शहद को लगभग ऑर्गेनिक माना जा रहा है. यह असम की जैव विविधता और टिकाऊ खेती की पहचान भी बन रहा है.
बक्सा जिले के शहद को केंद्र सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना में भी शामिल किया गया है. इसका मतलब है कि इस शहद में रोजगार बढ़ाने, अच्छी कमाई दिलाने और निर्यात बढ़ाने की बड़ी संभावना देखी जा रही है. बयान के मुताबिक, असम में शहद उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल माहौल है. यहां की समृद्ध जैव विविधता, जंगलों की भरपूर मौजूदगी और मधुमक्खी पालन की पुरानी परंपरा इस क्षेत्र को खास बनाती है.
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में असम में करीब 1,650 लाख टन शहद का उत्पादन हुआ. राज्य में बक्सा के अलावा कोकराझार, चिरांग, उदलगुरी और तामुलपुर जैसे जिले भी शहद उत्पादन के बड़े केंद्र माने जाते हैं. ये सभी इलाके बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) में आते हैं.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाली कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने इस शहद के निर्यात में अहम भूमिका निभाई है. संस्था ने प्रोसेसिंग यूनिट में जरूरी लैब और टेस्टिंग उपकरण उपलब्ध कराने में मदद की, ताकि शहद अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतर सके. बयान के मुताबिक, इस पहल का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों को मिलेगा. उन्हें अपने शहद का दाम पहले की तुलना में करीब 43 प्रतिशत ज्यादा मिलने की उम्मीद है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. (PTI)