El Nino से दुनिया में चावल उत्पादन 90 लाख टन घटने का अनुमान, मांग में बढ़ोतरी की उम्‍मीद

El Nino से दुनिया में चावल उत्पादन 90 लाख टन घटने का अनुमान, मांग में बढ़ोतरी की उम्‍मीद

अल नीनो, बढ़ती इनपुट लागत और भू-राजनीतिक तनाव के बीच 2026-27 में वैश्विक चावल उत्पादन 90 लाख मीट्रिक टन घटकर 536.4 मिलियन टन रहने का अनुमान है. वहीं, वैश्विक चावल आयात मांग करीब 40 लाख टन बढ़कर 59.7 मिलियन टन पहुंच सकती है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 12, 2026,
  • Updated Aug 12, 2026, 2:01 PM IST

2026-27 मार्केटिंग वर्ष में दुनिया का चावल उत्पादन 90 लाख मीट्रिक टन घटकर 536.4 मिलियन टन रह सकता है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने एसएंडपी ग्लोबल के अनुमान का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है. संभावित रूप से मजबूत अल नीनो, बढ़ती इनपुट लागत और भू-राजनीतिक तनाव को उत्पादन में गिरावट के प्रमुख जोखिमों में गिना गया है. मौसम से जुड़ी अनिश्चितता भारत, पाकिस्तान, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार और फिलीपींस जैसे प्रमुख चावल उत्पादक, निर्यातक और आयातक देशों को प्रभावित कर रही है. इन देशों में बुआई और फसल विकास में रुकावट और बाधाएं, खेती के रकबे में बदलाव, पानी की उपलब्धता और बढ़ती उत्पादन लागत को लेकर अलग-अलग स्तर पर दबाव है.

अल नीनो और बढ़ती लागत से नया जोखिम

IREF ने कहा कि लंबे समय तक बने रहने वाला और मजबूत होता अल नीनो वैश्विक चावल बाजार के लिए नया जोखिम पैदा कर रहा है. इसके साथ उर्वरक, ईंधन और परिवहन की बढ़ती लागत भी चुनौती बढ़ा रही है. मध्य पूर्व में जारी तनाव से इन लागतों में बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है.

अल नीनो बने रहने की 97% संभावना

अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने जुलाई 2026 तक अल नीनो के 2027 की शुरुआत तक बने रहने की 97 प्रतिशत संभावना जताई थी. अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान इसके बहुत मजबूत होने की संभावना 81 प्रतिशत बताई गई थी.

अल नीनो के कम से कम अप्रैल 2027 तक बने रहने का अनुमान है. इससे प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों में बुआई और फसल विकास के महत्वपूर्ण समय में प्रतिकूल मौसम की स्थिति बन सकती है. खासकर एशिया में बढ़ती उत्पादन लागत किसानों के बुआई संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकती है.

वैश्विक चावल निर्यात अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद

उत्पादन में संभावित गिरावट के बावजूद वैश्विक चावल निर्यात अपेक्षाकृत स्थिर रहने का अनुमान है. 2025-26 मार्केटिंग ईयर से बचे मजबूत शुरुआती स्टॉक से निर्यात को समर्थन मिलने की उम्मीद है. दूसरी ओर, वैश्विक चावल आयात मांग करीब 40 लाख मीट्रिक टन बढ़कर 59.7 मिलियन टन होने का अनुमान है. संभावित फसल रुकावटों के बीच देश अपनी जरूरत की सप्‍लाई सुरक्षित करने के लिए ज्‍यादा चावल खरीद सकते हैं.

स्टॉक-टू-यूज अनुपात 36% रहने का अनुमान

बढ़ती आयात मांग के बीच वैश्विक चावल स्टॉक-टू-यूज अनुपात घटकर 36 प्रतिशत रह सकता है. IREF के मुताबिक, यह अनुपात ऐतिहासिक मानकों के हिसाब से अभी भी सहज है, लेकिन स्थिति पर पहले से ज्यादा करीबी नजर रखने की जरूरत होगी. प्रमुख चावल निर्यातक देशों में कीमतों ने मौसम संबंधी जोखिमों और वैश्विक आपूर्ति-मांग संतुलन के सख्त होने की चिंताओं को दर्शाना शुरू कर दिया है.

BIRC 2026 में विस्तृत आकलन पेश होगा

एसएंडपी ग्लोबल की ओर से भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 में वैश्विक चावल उत्पादन, खपत, व्यापार, स्टॉक और कीमतों का विस्तृत आकलन पेश किए जाने की उम्मीद है. इसमें उन देशों का भी आकलन किया जाएगा, जहां सप्‍लाई जोखिम सबसे ज्‍यादा है, कौन से बाजार बड़े आयातक बन सकते हैं और आने वाले साल में चावल के पारंपरिक व्यापार मार्गों में किस तरह बदलाव हो सकता है. (एएनआई)

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