दिल्‍ली में यमुना किनारे उगी सब्जियों में घुला ‘प्रदूषण’, पालक-मूली-प्‍याज-सरसों में कई गुना हैवी मेटल्‍स मिले

दिल्‍ली में यमुना किनारे उगी सब्जियों में घुला ‘प्रदूषण’, पालक-मूली-प्‍याज-सरसों में कई गुना हैवी मेटल्‍स मिले

दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टडी में यमुना किनारे उगाई जाने वाली सब्जियों में कई भारी धातुओं की मौजूदगी सामने आई है. पालक में निकेल निर्धारित सीमा से 97 गुना और प्याज में 65 गुना तक ज्यादा मिला. सरसों, सफेद मूली और अन्य सब्जियों में भी क्रोमियम समेत कई धातुएं पाई गईं.

Delhi Yamuna Vegetable PollutionDelhi Yamuna Vegetable Pollution
क‍िसान तक
  • Delhi,
  • Sep 29, 2026,
  • Updated Sep 29, 2026, 7:57 PM IST

दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण का असर अब खेतों और सब्जियों तक पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के वनस्पति विज्ञान विभाग की एक स्टडी में यमुना किनारे उगाई जाने वाली कई सब्जियों और वहां की मिट्टी में भारी धातुओं की मौजूदगी सामने आई है. अध्ययन में पालक में निकेल की मात्रा निर्धारित सीमा से 97 गुना ज्यादा पाई गई है, जबकि प्याज में निकेल का स्तर 65 गुना तक अधिक दर्ज किया गया.

पालक और प्याज में निकेल की चिंताजनक मात्रा

DU के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर दीनबंधु साहू ने बताया कि स्टडी में यमुना किनारे के कृषि क्षेत्रों में उगाई जाने वाली कई सब्जियों के साथ वहां की मिट्टी की भी जांच की गई. जांच में पालक में निकेल की मात्रा निर्धारित सीमा से 97 गुना ज्यादा मिली. प्याज में भी निकेल का स्तर तय सीमा से 65 गुना तक अधिक पाया गया.

सरसों और मूली में भी भारी धातुओं की मौजूदगी

स्टडी में दूसरी सब्जियों में भी भारी धातुओं की मौजूदगी दर्ज की गई. सफेद मूली में क्रोमियम की मात्रा करीब 11 गुना, पालक में करीब 12 गुना और सरसों में क्रोमियम करीब 22 गुना तक अधिक पाया गया. लाल मूली में भी मोलिब्डेनम और क्रोमियम की काफी मात्रा दर्ज की गई.

धनिया, मेथी और सरसों में भी मिली भारी धातुएं

शोध के दौरान धनिया, मेथी और सरसों जैसी अन्य फसलों की भी जांच की गई. धनिया में निकेल और कैडमियम, मेथी में जिंक और सरसों में सीसे की मौजूदगी दर्ज की गई. इससे यमुना किनारे खेती में इस्तेमाल होने वाले पानी और मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा का सवाल सामने आया है.

स्टडी के मुताबिक, यमुना के आसपास खेती में प्रदूषित नदी के पानी और बिना उपचारित अपशिष्ट जल के इस्तेमाल को भारी धातुओं की मौजूदगी की एक प्रमुख वजह माना गया है. प्रदूषित पानी में मौजूद धातुएं मिट्टी तक पहुंच सकती हैं. इसके बाद पौधों की जड़ें इन धातुओं को सोख सकती हैं और ये सब्जियों के खाने योग्य हिस्सों तक पहुंच सकती हैं.

प्रभावित इलाकों में नियमित जांच की जरूरत

शोधकर्ताओं ने प्रभावित कृषि क्षेत्रों में मिट्टी, सिंचाई के पानी और सब्जियों की नियमित जांच की जरूरत बताई है. उनका कहना है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने के साथ सब्जियों में भारी धातुओं की मौजूदगी की भी नियमित जांच की जानी चाहिए.

सब्जियों की टैगिंग का सुझाव

प्रोफेसर दीनबंधु साहू ने ऐसी सब्जियों से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सब्जियों की टैगिंग का सुझाव दिया है. उनके मुताबिक, सब्जी खरीदते समय ऐसा टैग होना चाहिए, जिससे उपभोक्ता यह पहचान सकें कि सब्जी कहां उगाई गई है और उसकी खेती में किस तरह के पानी का इस्तेमाल किया गया है.

सीमित क्षेत्र में हुआ अध्ययन

हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अध्ययन यमुना के एक सीमित हिस्से में किया गया है. इसलिए इसके निष्कर्षों को दिल्ली की हर सब्जी या पूरी यमुना नदी के किनारे होने वाली खेती पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता. अध्ययन ने यमुना किनारे खेती में प्रदूषित पानी के इस्तेमाल और खाद्य सुरक्षा के बीच संभावित संबंध को लेकर आगे नियमित निगरानी और जांच की जरूरत जरूर सामने रखी है.

यमुना का प्रदूषण अगर खेतों तक पहुंच रहा है तो उससे उगाई जाने वाली सब्जियों के जरिए वही प्रदूषण हमारी थाली तक पहुंचने की आशंका भी खाद्य सुरक्षा का अहम सवाल है. ऐसे में प्रदूषित पानी के इस्तेमाल पर निगरानी, साथ ही मिट्टी और सब्जियों की नियमित जांच, इस समस्या की पहचान और नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है. (मनीष चौरसिया की रिपोर्ट)

MORE NEWS

Read more!