
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने गाजीपुर डेयरी फार्म में रोजाना 300 टन बायोगैस बनाने वाला प्लांट लगाने के लिए प्रशासनिक मंजूरी दे दी है. अधिकारियों ने 'PTI' को बताया कि इस प्रस्ताव को इस महीने के आखिर में सदन के सामने रखा जाएगा. सदन की बैठक 24 अप्रैल को होने की उम्मीद है, जहां इस प्रोजेक्ट को आगे की चर्चा के लिए पेश किया जाएगा.
अधिकारियों के मुताबिक, बायोगैस का यह प्रस्तावित प्लांट करीब पांच एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा. एक अधिकारी ने बताया, "अगले कुछ दिनों में टेंडर जारी कर दिया जाएगा और अगले सदन की बैठक में इस प्रस्ताव को पेश किया जाएगा."
यह योजना राजधानी भर की डेयरी कॉलोनियों से निकलने वाले कचरे के निपटान के लिए किए जा रहे बड़े प्रयासों का हिस्सा है. इसमें गाजीपुर और भलस्वा डेयरियों में बायोगैस प्लांट, मसूदपुर और मदनपुर खादर में रोजाना 75 टन (TPD) कचरा निपटाने की सुविधाएं, सरिता विहार में 100 TPD का प्लांट और आउटर रिंग रोड के पास मंगोलपुरी में 200 TPD का प्लांट शामिल है.
इसके अलावा कुछ और इलाकों में बायोगैस प्लांट लगाने का प्रस्ताव में जिसमें पीतमपुरा में 100 TPD का प्लांट, रोहिणी और सागरपुर में 200 TPD के दो-दो प्लांट और खजूरी खास में 50 TPD की एक यूनिट शामिल है.
अधिकारियों ने बताया कि MCD और दिल्ली सरकार से कहा गया है कि वे डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाले कचरे को संभालने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ मिलकर काम करें.
एक अधिकारी ने बताया, "नांगली डेयरी बायोगैस प्लांट के लिए, जिसकी क्षमता 200 TPD है, किसानों को गाय का गोबर यमुना में फेंकने से रोकने और उन्हें सही तरीके से निपटाने के लिए प्रति किलो कम से कम 65 पैसे दिए जाते हैं."
अधिकारियों के मुताबिक, शहर की नालियों के जरिए डेयरी का कचरा यमुना में बहने से रोकने के लिए एक प्लान भी तैयार किया गया है. वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस योजना में 10 बायोगैस प्लांट लगाना, ट्रीटमेंट प्लांट लगाना और डेयरी कॉलोनियों में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना शामिल है.