Climate Change: क्या भारत में छोटा हो रहा है बसंत? बदलते मौसम पैटर्न ने बढ़ाई चिंता

Climate Change: क्या भारत में छोटा हो रहा है बसंत? बदलते मौसम पैटर्न ने बढ़ाई चिंता

भारत में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिससे बसंत ऋतु का समय छोटा होता नजर आ रहा है. IMD के अनुसार जेट स्ट्रीम में बदलाव और SAFAR के मुताबिक El Nino से La Nina के ट्रांजिशन के कारण सर्दी और गर्मी के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक नया ट्रेंड बन सकता है, जिससे भविष्य में बसंत और भी कम समय के लिए महसूस होगा.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 09, 2026,
  • Updated Apr 09, 2026, 6:26 PM IST

भारत के मौसम में तेज बदलाव देखा जा रहा है जिस पर आश्चर्य के साथ हैरत भी है. मौजूदा मौसम का ट्रेंड देखें तो इसमें न पूरी सर्दी है न पूरी गर्मी जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. भारत में कभी बसंत एक ऐसा मौसम हुआ करता था जो इन दोनों के बीच संतुलन बनाता था. लेकिन अब फरवरी खत्म होते-होते ही गर्मी का एहसास होने लगता है और मार्च तक तापमान तेजी से बढ़ने लगता है. इस बीच अगर पश्चिमी विक्षोभ का असर हो जाए तो बिन मौसम बारिश भी हो जाती है जिससे तापमान में गिरावट आ जाती है.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बसंत सच में छोटा हो रहा है? इस सवाल पर भारत के दो प्रमुख मौसम संस्थानों भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department IMD) और SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research) के विशेषज्ञों ने अलग-अलग लेकिन जुड़ी हुई वजहें बताई हैं.

IMD का नजरिया: जेट स्ट्रीम में बदलाव

IMD के अनुसार, इस बार मौसम में तेजी से बदलाव की एक बड़ी वजह है Jet Stream में बदलाव. जेट स्ट्रीम ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवाओं की धारा होती है, जो ठंड और गर्मी के संतुलन को नियंत्रित करती है.

जब ये धारा अपनी सामान्य स्थिति से हटती है या कमजोर होती है तो ठंडी हवाओं का असर कम हो जाता है. तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और सर्दी से गर्मी के बीच का ट्रांजिशन बहुत छोटा हो जाता है. यही वजह है कि इस बार सर्दी अचानक खत्म हुई और गर्मी जल्दी महसूस होने लगी.

SAFAR का विश्लेषण: El Nino से La Nina की ओर बदलाव

वहीं SAFAR के विशेषज्ञ इस बदलाव को बड़े वैश्विक पैटर्न से जोड़ते हैं. उनके अनुसार, इस समय दुनिया का मौसम El Nino से La Nina की ओर ट्रांजिशन फेज में है.

El Nino के दौरान समुद्र का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत में सर्दियां कमजोर होती हैं और गर्मी जल्दी आती है जबकि La Nina इसके उलट असर डालता है. लेकिन जब ये दोनों अवस्थाओं के बीच बदलाव (transition) होता है, तो मौसम अस्थिर हो जाता है. कभी अचानक ठंड, कभी तेज गर्मी और मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है. यही अस्थिरता बसंत जैसे “नाजुक मौसम” को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, बसंत एक “ट्रांजिशन सीजन” है, जो पूरी तरह संतुलन पर निर्भर करता है. लेकिन अब सर्दियां जल्दी खत्म हो रही हैं, गर्मी जल्दी शुरू हो रही है और मौसम के बीच का अंतर कम होता जा रहा है. इसका नतीजा है बसंत का समय छोटा और कम महसूस होने लगा है.

क्या यह नया नॉर्मल है?

मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि यह सिर्फ एक साल का बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है. बार-बार बदलते वैश्विक पैटर्न, बढ़ता तापमान और अस्थिर मौसम अब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भविष्य में बसंत और भी छोटा हो सकता है.

एक तरफ जेट स्ट्रीम का बदलता रुख, दूसरी तरफ El Nino और La Nina के बीच का ट्रांजिशन. दोनों मिलकर भारत के मौसम के संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं. और इसी बदलाव के बीच वो मौसम, जिसे कभी ‘ऋतुराज’ कहा जाता था वो धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है.(मनीषा लड्डा की रिपोर्ट)

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