
देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में इस बार राजस्थान का अलवर अहम भूमिका निभाने जा रहा है. अलवर वन मंडल की नर्सरियों में तैयार किए जा रहे लाखों पौधे दिल्ली और हरियाणा क्षेत्र में लगाए जाएंगे. इन पौधों का उपयोग अरावली क्षेत्र के संरक्षण, पर्यावरण सुधार और विभिन्न सरकारी और शैक्षणिक परिसरों में हरित आवरण बढ़ाने के लिए किया जाएगा.
अलवर वन मंडल के एसीएफ पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि इस साल वन विभाग की ओर से कुल 24 लाख 20 हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं. इन पौधों को अलवर वन मंडल की 20 नर्सरियों में विकसित किया जा रहा है. विभाग की योजना है कि मॉनसून से पहले मांग के अनुसार सभी पौधों की आपूर्ति कर दी जाए, ताकि बारिश के मौसम में समय पर पौधारोपण किया जा सके और पौधों की जीवित रहने की संभावना अधिक रहे.
वन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली में अलवर से तैयार पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है. इस बार विशेष रूप से उन प्रजातियों पर जोर दिया गया है, जो अरावली क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुकूल हैं. इनमें धोक, खैर, खेजड़ी, करंज, गूलर, सालार, जंगल जलेबी, अमलतास, अर्जुन, बेर, इमली, बबूल, बरगद, बेलपत्र, पीपल, नीम और शीशम सहित कई स्थानीय प्रजातियां शामिल हैं. इन पौधों को पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है.
एसीएफ पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि इस बार दिल्ली यूनिवर्सिटी के लिए 10 हजार पौधे भेजने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा दिल्ली आईआईटी, जेएनयू, भिवाड़ी के रीको क्षेत्र और हरियाणा के कई शैक्षणिक संस्थानों की ओर से भी पौधों की मांग मिली है. वन विभाग के अनुसार, इन पौधों का उपयोग केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अरावली की पहाड़ियों और अन्य चिन्हित क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर प्लांटेशन किया जाएगा.
वन विभाग का कहना है कि सभी पौधों को तय समय पर तैयार कर संबंधित क्षेत्रों में भेजने की प्रक्रिया जारी है. विभाग का उद्देश्य है कि मॉनसून के दौरान बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र विस्तार को गति दी जा सके.