
डेयरी और पशुपालन मंत्रालय से हटाकर नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है. यह बदलाव ऐसे वक्त में किया गया है जब शिक्षा मंत्रालय नीट पेपर लीक मामले को लेकर लगातार सुर्खियों में है. कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन जारी है. पेपर लीक के मामले में छात्र केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं. दूसरी ओर नए मंत्रालय में पदभार ग्रहण करने से पहले ही सचिव गंगवार भी फिर से सुर्खियों में आ गए हैं. सोशल मीडिया से लेकर जेन-जी (छात्रों) के आंदोलन तक में उनकी चर्चा हो रही है.
चर्चा प्रोटक्टेड कल्टीवेशन यानी संरक्षित खेती की सब्सिडी को लेकर हो रही है. गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड में रहते हुए अपने परिवार के लोगों के नाम पर सब्सिडी ली थी. हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार ने गंगवार समेत कृषि मंत्रालय के एक मंत्री पर भी सब्सिडी लेने के आरोप लगे थे.
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले दिनों गंगवार पर उनके परिवार के नाम पर सब्सिडी लेने का खुलासा किया था. उसके मुताबिक नरेश पाल गंगवार के परिवार में मां, पत्नी और बेटे के नाम 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर हुई थी. ये सब्सिडी खीरे की पैदावार के लिए लिए मंजूर की गई थी. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की संरक्षित खेती योजना के तहत इसका फायदा उठाया गया था.
हालांकि आरोपों के संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे यह पता चले कि आरोप कितने सही और गलत हैं. बहरहाल, अब उन्हीं गंगवार को NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले में विरोध के दौरान ही उच्च शिशा सचिव बनाया गया है.
अभी तक उच्च शिक्षा सचिव रहे विनीत जोशी को हटाकर पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है. उन्हें हटाए जाने के आदेश कल ही जारी हो गए थे. और जैसे ही नरेश गंगवार को शिक्षा सचिव बनाए जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई तो सोशल मीडिया पर उन्हे लेकर चर्चाएं तेज हो गई. बागवानी बोर्ड में रहने के दौरान लगे आरोपों पर लोग तंज कर रहे हैं. फेसबुक समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उस अखबार की कटिंग शेयर की जा रही हैं जिसने उनके परिवार के नाम पर सब्सिडी लेने के आरोपों का खुलासा किया था.
ये भी पढ़ें:-
Milk Adulteration: दूध में पानी मिलाया है या पूरा दूध ही सिंथेटिक है, खुद से ऐसे करें जांच
Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह