भारत के ऑयलमील निर्यात को झटका, दिसंबर में 40 फीसद की गिरावट

भारत के ऑयलमील निर्यात को झटका, दिसंबर में 40 फीसद की गिरावट

दिसंबर 2025 में भारत के ऑयलमील निर्यात में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. सोयामील की कमजोर मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दाम इसकी मुख्य वजह रहे. अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के दौरान कुल ऑयलमील निर्यात में भी कमी आई है, जिससे कृषि निर्यात पर असर पड़ा है.

दिसंबर में गिरा ऑयलमील निर्यातदिसंबर में गिरा ऑयलमील निर्यात
प्राची वत्स
  • Noida ,
  • Jan 20, 2026,
  • Updated Jan 20, 2026, 10:43 AM IST


भारत से बाहर भेजे जाने वाले तेलहन से बने चारे को ऑयलमील कहा जाता है. साल 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर तक भारत के ऑयलमील निर्यात में गिरावट देखी गई है. खासकर दिसंबर महीने में इसमें लगभग 40 प्रतिशत की बड़ी कमी आई. इसका सबसे बड़ा कारण सोयाबीन से बनने वाले सोयामील की कम बिक्री रही. पहले भारत बड़ी मात्रा में सोयामील विदेश भेजता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया.

सोयामील की बिक्री में कमी

सोयामील एक तरह का पशु आहार है, जिसे भारत कई देशों में भेजता है. नवंबर और दिसंबर 2025 में भारत ने सिर्फ 2.28 लाख टन सोयामील निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी समय 4.61 लाख टन भेजा गया था. इसका मतलब है कि बिक्री लगभग आधी रह गई. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का सोयामील अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा पड़ रहा है, इसलिए दूसरे देश सस्ता माल खरीद रहे हैं.

घरेलू बाजार में भी मांग कमजोर

भारत के अंदर भी सोयामील की मांग पहले जैसी नहीं रही. पशुपालक अब सोयामील की जगह डीडीजीएस नाम का सस्ता चारा इस्तेमाल कर रहे हैं. यह चारा मक्का और चावल से बनने वाले इथेनॉल का बचा हुआ हिस्सा होता है और कीमत में कम होता है. इसी वजह से सोयामील बनाने वाली कंपनियों को नुकसान हो रहा है.

रैपसीड मील की समस्या

रैपसीड से बनने वाला मील भी ऑयलमील का एक हिस्सा है. हाल के महीनों में भारत में रैपसीड की पेराई कम हुई है, क्योंकि नई फसल फरवरी-मार्च में आएगी. इसके अलावा, दुनिया के बाजार में रैपसीड मील के दाम बढ़ गए हैं. भारत में इसका दाम 250 डॉलर प्रति टन है, जबकि जर्मनी के हैम्बर्ग में 247 डॉलर प्रति टन है. थोड़ा सा महंगा होने के कारण चीन जैसे देश भारत से कम खरीद कर रहे हैं.

चीन को निर्यात में बदलाव

इस साल अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के बीच भारत ने चीन को 6.77 लाख टन रैपसीड मील भेजा. यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में ज्यादा है, लेकिन आने वाले समय में कीमत बढ़ने से चीन की खरीद कम हो सकती है. अच्छी बात यह है कि भारत की कुछ नई कंपनियों को भी चीन में निर्यात की मंजूरी मिलने वाली है.

दूसरे देशों से खरीद

भारत से ऑयलमील खरीदने वाले देशों में दक्षिण कोरिया, चीन, बांग्लादेश, जर्मनी और फ्रांस शामिल हैं. दक्षिण कोरिया ने इस साल भारत से 2.87 लाख टन ऑयलमील खरीदा, जो पिछले साल से कम है. बांग्लादेश ने भी पहले के मुकाबले कम ऑयलमील मंगवाया. जर्मनी और फ्रांस ने भारत से सोयामील खरीदा, लेकिन मात्रा ज्यादा नहीं रही.

कुल मिलाकर क्या असर पड़ा?

अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के दौरान भारत ने कुल 29.75 लाख टन ऑयलमील का निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी समय 31.50 लाख टन किया गया था. यानी कुल निर्यात में 5.5 प्रतिशत की कमी आई. दिसंबर महीने में यह कमी और ज्यादा दिखी.

आगे क्या हो सकता है?

अगर भारत अपने ऑयलमील को सस्ते दाम पर और अच्छी गुणवत्ता के साथ बेच पाए, तो आने वाले महीनों में निर्यात फिर बढ़ सकता है. नई फसल आने के बाद रैपसीड मील की स्थिति सुधरने की उम्मीद है. सरकार और उद्योग मिलकर काम करें, तो किसानों और कंपनियों दोनों को फायदा हो सकता है.

इस तरह, सोयामील की कमजोर मांग और ऊंची कीमतों की वजह से भारत के ऑयलमील निर्यात में गिरावट आई है, लेकिन सही कदम उठाने से हालात बेहतर हो सकते हैं.

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