Sugar Production: 'इस सीजन ऊंची रह सकती है चीनी की कीमत', ISMA ने इन एक्‍सपोर्ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स पर मांगी छूट

Sugar Production: 'इस सीजन ऊंची रह सकती है चीनी की कीमत', ISMA ने इन एक्‍सपोर्ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स पर मांगी छूट

चीनी निर्यात पर रोक के बाद शुगर इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है. ISMA ने कहा है कि पहले से हुए निर्यात समझौतों को पूरा करने की अनुमति मिलनी चाहिए ताकि भारतीय सप्लायर्स की वैश्विक साख बनी रहे. वहीं उत्पादन घटने और कम स्टॉक के चलते सरकार घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता दे रही है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 15, 2026,
  • Updated May 15, 2026, 1:25 PM IST

केंद्र सरकार की ओर से चीनी निर्यात पर लगाए गए ताजा प्रतिबंध के बाद भारतीय चीनी उद्योग में चिंता बढ़ गई है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने गुरुवार को कहा कि उद्योग को निर्यात स्थिति की समीक्षा की उम्मीद थी, लेकिन अचानक लागू की गई पाबंदियों से विदेशी खरीदारों के साथ पहले से तय निर्यात समझौतों को पूरा करने में व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं. वहीं, क्राइसिल इंटेलिजेंस (CRISIL Intelligence) ने चालू सीजन में चीनी की कीमतों में 5 प्रतिशत की औसत तेजी रहने की बात कही है.

ISMA के महानिदेशक दीपक बल्‍लानी ने उद्योग का पक्ष रखते हुए कहा कि पहले से फाइनल हो चुके निर्यात अनुबंधों को पूरा करने की अनुमति देने से व्यवस्थित व्यापार निपटान में मदद मिलेगी और वैश्विक बाजार में भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी. उन्होंने बताया कि सरकार के आदेश के आगे के असर का मूल्यांकन सदस्य चीनी मिलों के साथ मिलकर किया जा रहा है.

उत्पादन अनुमान बिगड़ने से बदली स्थिति

ISMA ने बयान में कहा कि नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने उस समय के उत्पादन अनुमान और बेहतर चीनी सीजन की संभावना को देखते हुए निर्यात की अनुमति दी थी. हालांकि, बाद में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपेक्षा से कम पैदावार और मौसम संबंधी असामान्य परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ. इससे कुल वास्तविक उत्पादन में कमी दर्ज की गई. उद्योग संगठन के अनुसार, मौजूदा चीनी सीजन अक्टूबर से सितंबर तक कुल मिलाकर संतुलित बना हुआ है और सीजन समाप्त होने तक देश में पर्याप्त क्लोजिंग स्टॉक रहने की संभावना है.

6.5 लाख टन चीनी पहले ही हो चुकी निर्यात

ISMA ने अनौपचारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 6.5 लाख टन चीनी का निर्यात पहले ही हो चुका है, जबकि 40 हजार से 60 हजार टन चीनी सरकार की मंजूरी के तहत निर्यात प्रक्रिया में है. संगठन ने इस फैसले को घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम बताया. ISMA के मुताबिक, आगामी 2026-27 सीजन को लेकर मानसून वितरण और जलवायु अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है.

CRISIL ने बताई कीमतों और स्टॉक की स्थिति

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताब‍िक, क्राइसिल इंटेलिजेंस (CRISIL Intelligence) के निदेशक पुषण शर्मा ने कहा कि अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच घरेलू चीनी कीमतों में सालाना आधार पर करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. पूरे 2025-26 सीजन में कीमतें औसतन 5 प्रतिशत तक ऊंची रहने का अनुमान है. उन्होंने बताया कि पहले जहां उत्पादन 30.5 मिलियन टन रहने का अनुमान था, अब यह घटकर 28 मिलियन टन रह सकता है.

अक्टूबर 2025 में बेमौसम बारिश के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने में फूल आने की समस्या बढ़ी, जिससे रिकवरी रेट घट गया. पुषण शर्मा के मुताबिक, सीजन के अंत तक क्लोजिंग स्टॉक करीब 3.8 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो देश की लगभग डेढ़ महीने की खपत के बराबर है. जबकि पिछले पांच साल का औसत करीब ढाई महीने की मांग के बराबर रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है.

मिलों की कमाई पर बढ़ सकता है दबाव

CRISIL इंटेलिजेंस के अनुसार, निर्यात का चीनी मिलों की कुल बिक्री में हिस्सा पिछले दो वर्षों में 5 प्रतिशत से कम रहा है, इसलिए तत्काल असर सीमित हो सकता है. हालांकि गन्ने की लागत में करीब 8 प्रतिशत वृद्धि और परिचालन खर्च बढ़ने से मौजूदा सीजन में मिलों के मार्जिन लगभग 100 बेसिस पॉइंट घट सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि डिस्टिलरी वॉल्यूम में ठहराव, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से इथेनॉल की धीमी खरीद और ब्लेंडिंग लक्ष्य को लेकर स्पष्टता की कमी से उद्योग की लाभप्रदता पर दबाव रहेगा.

उद्योग ने उठाए MSP और FRP को लेकर सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य यानी MSP बढ़ाने के पक्ष में नहीं है और खुले बाजार में भी कीमतें बढ़ाना नहीं चाहती. वहीं, दूसरी ओर गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी FRP लगातार बढ़ रहा है. इसके साथ मजदूरी, कटाई, परिवहन, ब्याज और संचालन लागत भी बढ़ रही है.

उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इथेनॉल के दाम भी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं और अब चीनी निर्यात पर भी रोक लगा दी गई है. ऐसे में चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि अगर उद्योग से किसानों, इथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन एनर्जी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की अपेक्षा की जाती है तो चीनी मिलों के लिए टिकाऊ रेवेन्‍यू मॉडल भी जरूरी है.

अगले सीजन में निर्यात की संभावना कम

चीनी उद्योग से जुड़े अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मिल गेट चीनी कीमतें करीब 42 हजार रुपये प्रति टन चल रही हैं, जो पिछले साल के औसत से लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा हैं. उनका मानना है कि यह मजबूती अगले सीजन तक बनी रह सकती है.

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, सितंबर 2026 तक क्लोजिंग स्टॉक 3.2 से 3.5 मिलियन टन रह सकता है, जबकि एक साल पहले यह 4.7 मिलियन टन था. यह स्तर सरकार के पारंपरिक आरामदायक स्टॉक मानक 5 से 6 मिलियन टन से काफी कम है.

कारोबारी जगत ने अचानक फैसले पर जताई नाराजगी

एग्रो कमोडिटी ट्रेडिंग फर्म MEIR के प्रबंध निदेशक राहिल शेख ने कहा कि सरकार ने किन कारणों से यह फैसला लिया है, यह वही बेहतर जानती है, लेकिन तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू करना व्यापार के लिए काफी कठोर कदम है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कुछ ट्रांजिशन अवधि दी जानी चाहिए थी, ताकि पहले से तय कारोबारी सौदों को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके.
 

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