चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला, सितंबर 2026 तक निर्यात पर लगाई रोक

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला, सितंबर 2026 तक निर्यात पर लगाई रोक

चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने तत्काल प्रभाव से चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है. यह प्रतिबंध सितंबर 2026 तक या अगले आदेश आने तक लागू रहेगा.

घटती मांग के बीच सरकार ने घटाया चीनी कोटाघटती मांग के बीच सरकार ने घटाया चीनी कोटा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 14, 2026,
  • Updated May 14, 2026, 10:49 AM IST

देश में बढ़ती हुई चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने तत्काल प्रभाव से चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है. यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश आने तक लागू रहेगा. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, इसलिए सरकार के इस फैसले का असर सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बाजार पर पड़ सकता है. माना जा रहा है कि भारत से चीनी की सप्लाई रुकने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफेद और कच्ची चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं.

ये है सरकार का मुख्य उद्देश्य

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के इस कदम से ब्राजील और थाईलैंड जैसे बड़े चीनी उत्पादक देशों को फायदा मिल सकता है. अब एशिया और अफ्रीका के कई देश चीनी की जरूरत पूरी करने के लिए इन देशों की ओर रुख कर सकते हैं. सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और आम लोगों को बढ़ती कीमतों से राहत देना है.

भारत दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश

भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश माना जाता है. पहले सरकार को उम्मीद थी कि देश में चीनी का उत्पादन जरूरत से ज्यादा होगा, इसलिए चीनी मिलों को 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति भी दे दी गई थी. लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं. देश के कई बड़े गन्ना उत्पादक इलाकों में इस बार फसल कमजोर बताई जा रही है. ऐसे में लगातार दूसरे साल चीनी उत्पादन देश की खपत से कम रहने की आशंका है.

अल नीनो की वजह से गन्ने की पैदावार ंमें गिरावट

इसके अलावा अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों ने भी चिंता बढ़ा दी है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वजह से मॉनसून प्रभावित हो सकता है, जिससे बारिश कम होने का खतरा है. अगर ऐसा हुआ तो अगले सीजन में गन्ने की पैदावार और घट सकती है, जिसका असर चीनी उत्पादन पर भी पड़ेगा. 

इन मामलों में दी जाएगी चीनी निर्यात की अनुमति

डीलरों के मुताबिक, सरकार ने जिस 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, उसमें से करीब 8 लाख टन चीनी के लिए व्यापारियों ने पहले ही सौदे कर लिए थे. इनमें से 6 लाख टन से ज्यादा चीनी विदेशों में भेजी भी जा चुकी है. ऐसे में अब सरकार ने साफ कर दिया है कि कच्ची और सफेद दोनों तरह की चीनी के निर्यात पर रोक लगाई जाएगी. हालांकि, जिन खेपों की निर्यात प्रक्रिया पहले से चल रही है, उन्हें कुछ तय शर्तों के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी. सरकार ने कहा है कि अगर आधिकारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही जहाजों में माल लोड होना शुरू हो गया था, तो ऐसे माल को विदेश भेजने की इजाजत दी जाएगी. 

सरकार ने यह भी साफ किया है कि कुछ खास मामलों में चीनी निर्यात की अनुमति दी जाएगी. अगर किसी व्यापारी ने पहले ही शिपिंग बिल जमा कर दिया है और जहाज भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुका है या लंगर डाल चुका है, तो ऐसे माल को विदेश भेजने की इजाजत मिलेगी. इसके अलावा, अगर सरकारी अधिसूचना जारी होने से पहले चीनी को सीमा शुल्क विभाग या गोदाम में जमा करा दिया गया था, तो उस खेप को भी मंजूरी दी जाएगी. 

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