
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की विभिन्न शाखाओं में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुरू कर दी है. इस घोटाले का खुलासा पिछले साल मई 2025 में ऑडिट के दौरान हुआ था, जिसके बाद 31 मई 2025 को बैंक मैनेजर सहित 4 बड़े अधिकारियों को बर्खास्त किया गया था. शनिवार को ही बैंक के सीईओ ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि घोटाले से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज ईडी की टीम को सौंप दिए गए हैं और मनी लॉन्ड्रिंग की आधिकारिक जांच शुरू हो चुकी है. सहकारी बैंक के सीईओ ने इसकी पुष्टि की है.
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कलेक्टर भोस्कर विलास संदीपन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जून 2025 के दौरान राज्य शासन के माध्यम से ईडी और सीबीआई से जांच कराने हेतु प्रमुख सचिव को पत्र लिखा था. कलेक्टर की रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने औपचारिक रूप से प्रवर्तन निदेशालय को जांच के लिए पत्र भेजा.
राज्य शासन के अनुरोध पर प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के लिए अपनी मंजूरी दी और अब रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने इसकी पूरी फाइलें मंगा ली हैं. सरगुजा सहकारी बैंक घोटाले में 4 मई 2026 को आई नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अब इस मामले की कमान पूरी तरह संभाल ली है.
एजेंसी अब मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि गबन किए गए 28 करोड़ रुपये को कहां निवेश किया गया और किन संपत्तियों में बदला गया. मुख्य घोटाले के बीच ही सरगुजा के केरजू सहकारी समिति में एक और नया फर्जीवाड़ा सामने आया है. यहां 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.93 करोड़ रुपये का लोन निकाला गया है.
बैंक में घोटाला करीब एक साल पहले सामने आया था, जब तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर, भोस्कर विलास संदीप ने बैंक की शंकरगढ़ और कुसमी ब्रांचों के खातों की जांच करवाई थी. जांच में करीब 28 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी.
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शंकरगढ़ शाखा के बैंक मैनेजर अशोक कुमार सोनी ने बैंक में फर्जी खाते खोलकर बड़ी मात्रा में पैसे की हेराफेरी की. इन फर्जी खातों से नकद राशि की निकासी के अलावा कई ऑनलाइन ट्रांसफर भी किए गए. इस घोटाले में किसानों के केसीसी फंड, मनरेगा खातों और ग्राम पंचायतों की राशि का दुरुपयोग किया गया.
इस मामले में बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, पुलिस ने पहले ही बैंक मैनेजर अशोक सोनी सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें से 4 बैंक अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि 3 कर्मचारी घोटाला उजागर होने से पहले रिटायर हो चुके थे. सहकारी बैंक के सीईओ श्रीकांत चंद्राकर ने बताया कि ईडी की टीम अभी तक सरगुजा नहीं आई है, लेकिन उन्होंने जांच से संबंधित सभी रिपोर्ट शनिवार को भेज दी हैं. (सुमित सिंह की रिपोर्ट)