
इस बार का बजट भारत के कृषि क्षेत्र को बेहतर बनाने और इसके ग्रामीण इलाकों को विकसित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. इसके लिए बड़ी मात्रा में फंड दिए जाने की भी संभावना है. केंद्र सरकार ने कृषि और ग्रामीण विकास के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है, जो पिछले साल के बजट के 1.37 लाख करोड़ रुपये के आवंटन से ज्यादा है. इसका साफ मतलब है- जब खेत मजबूत होंगे, तो भारत मजबूत होगा.
हालांकि, फोकस सिर्फ ज्यादा खर्च करने तक ही सीमित नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि बजट में कृषि से संबंधित बड़े बदलावों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें ज्यादा वित्तीय सहायता और योजनाओं को बेहतर ढंग से पालन कराने पर जोर होगा. इसका मकसद किसानों की आय बढ़ाना है, साथ ही ऐसे क्लाइमेट स्मार्ट सिस्टम बनाना है जो खराब मौसम और बढ़ती लागत के बावजूद फूड प्रोडक्शन को सुरक्षित रख सकें.
सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने वित्त मंत्रालय से कृषि विकास को तेज करने को कहा है. एक सूत्र ने 'बिजनेसलाइन' से कहा, PMO ने इस बात पर चिंता जताई है कि कृषि क्षेत्र की विकास दर घट रही है. जहां 2024-25 में यह 4.6% थी, वहीं 2025-26 में इसके घटकर 3.1% रहने का अनुमान है.
सरकार बजट में कृषि को बढ़ावा देने के लिए सहकारी खेती (को-ऑपरेटिव फार्मिंग) को मजबूत करने और कृषि से जुड़े उत्पादों में वैल्यू एडिशन (जैसे प्रोसेसिंग, पैकेजिंग) पर जोर दे सकती है. सूत्रों के अनुसार, सरकार का फोकस इन बातों पर हो सकता है- किसानों के समूह और सहकारी समितियां बनाना, फसल कटाई के बाद के इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे गोदाम, कोल्ड स्टोरेज) में सुधार, एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स को समर्थन देना, जिससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आय बढ़े.
खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को सहकारी समितियों के जरिए जोड़ने पर जोर रहेगा, ताकि बड़े पैमाने पर उत्पादन हो सके, सप्लाई चेन आधुनिक बने और किसानों को बाजार में बेहतर दाम और मार्केट में कंप्टीशन मिले.
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5–6 सालों में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहा है, लेकिन कोविड और जलवायु परिवर्तन की वजह से कृषि क्षेत्र की औसत वृद्धि (GVA) सिर्फ 3–4% रही है.
पहले इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया था कि अगर कृषि क्षेत्र 5% की स्थिर दर से बढ़े, तो वह कुल अर्थव्यवस्था में 1% का योगदान दे सकता है. लेकिन कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, अर्थव्यवस्था में कृषि का हिस्सा 2020-21 में 20.4% से घटकर 2023-24 में 17.7% रह गया है.
इसके अलावा, सरकार कृषि निर्यात बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है. इसके लिए एपीडा (APEDA) जैसी संस्थाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया जा सकता है.
सरकार संसद के आगामी सत्र में पेस्टिसाइड एक्ट और सीड बिल लाने जा रही है. इन कानूनों में किसानों के हितों की रक्षा के लिए दंडात्मक प्रावधानों को और सख्त किया जाएगा और दोषियों पर 30 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा. इसे लेकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. छोटी जोत की खेती को भी लाभकारी बनाना सरकार की प्राथमिकता है और लक्ष्य साफ है, 'खेती को फायदे का पेशा बनाकर ही छोड़ा जाएगा.'
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने नए पेस्टिसाइड बिल का मसौदा जारी किया है. इसे ड्राफ्ट पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 नाम दिया गया है. यह प्रस्तावित बिल देश में पहले से चले आ रहे 'इनसेक्टिसाइड्स एक्ट 1968' और 'इनसेक्टिसाइड्स रूल्स, 1971' को रिप्लेस करेगा. आगामी बजट सत्र में इस बिल को पेश किया जा सकता है. कई साल की देरी के बाद देश में इस तरह का कोई नया और कड़ा विधेयक लाने की तैयारी है जिससे कीटनाशकों की दुनिया में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है.