
ईरान के इजराइल और अमेरिका से चल रहे युद्ध और मिडिल ईस्ट में चल रही जियोपॉलिटिकल गड़बड़ी को देखते हुए पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने देश के सभी बड़े बंदरगाहों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है. इसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट जाने वाले कार्गो और जहाज़ों पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करना और बंदरगाहों पर संचालन को सुचारु बनाए रखना है. मंत्रालय ने इस SOP को जारी करने से पहले शिपिंग लाइंस, एक्सपोर्टर्स, टर्मिनल ऑपरेटर्स, कस्टम्स और अन्य संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ विस्तृत चर्चा की है.
नई व्यवस्था के तहत सभी बंदरगाहों के चेयरपर्सन को निर्देश दिया गया है कि वे समय-समय पर स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा करें और सामने आ रही समस्याओं का समाधान करें.
SOP के अनुसार हर बड़े बंदरगाह पर HOD या डिप्टी HOD स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो सिंगल प्वाइंट ऑफ कॉन्टैक्ट (SPOC) होगा. इस अधिकारी का नाम, पद, संपर्क नंबर और ईमेल पोर्ट की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा और वह 24 घंटे उपलब्ध रहेगा. नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि किसी भी समस्या को संबंधित प्राधिकरण के सामने उठाकर 24 घंटे के भीतर निर्णय या कार्रवाई सुनिश्चित करे, जिन मामलों में कस्टम्स या अन्य एजेंसियों की जरूरत होगी, उन्हें 72 घंटे के भीतर पूरा किया जाएगा.
मंत्रालय ने बंदरगाहों को जरूरत के अनुसार कई कदम उठाने की अनुमति दी है, जैसे-
बंदरगाह जरूरत के अनुसार रीफर प्लगिंग चार्ज, स्टोरेज रेंट और वेसल चार्ज जैसे शुल्कों में छूट या राहत देने पर भी विचार कर सकते हैं. मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह SOP जारी होने की तारीख से लागू रहेगा और हालात के आधार पर इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी. सभी बंदरगाहों को निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना की कार्रवाई रिपोर्ट मंत्रालय को भेजें, ताकि मिडिल ईस्ट संकट के असर पर लगातार नजर रखी जा सके.