
बिहार के मधेपुरा जिले के झिटकिया गांव में रहने वाले किसान सतेंद्र यादव पहले धान और गेहूं के साथ अन्य पारंपरिक खेती करते थे. वे खेत में धान और गेहूं उगाते थे. इससे घर चल तो जाता था, लेकिन ज्यादा बचत नहीं हो पाती थी. वे चाहते थे कि कुछ ऐसा काम करें जिससे आमदनी बढ़े और परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके.
साल 2023 में सतेंद्र यादव ने यूट्यूब पर मखाना कारोबार से जुड़ा एक वीडियो देखा. उस वीडियो में बताया गया था कि मखाना कैसे उगाया जाता है और इससे अच्छा पैसा कैसे कमाया जा सकता है. यह वीडियो देखकर उनकी सोच बदल गई. उन्होंने तय किया कि अब कुछ नया करना है.
सतेंद्र यादव ने किसान तक को बताया की वो अपने घर से ही मखाने का छोटा सा काम शुरू किया. उन्होंने अपने कारोबार का नाम रखा पाटलिपुत्र फूड इंडस्ट्रीज. शुरुआत आसान नहीं थी. पैसे की कमी, सही जानकारी न होना और बाजार तक पहुंच बनाना-सब कुछ मुश्किल था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. वे हर दिन कुछ नया सीखते रहे और धीरे-धीरे काम आगे बढ़ता गया.
मखाना की खेती तालाब या पानी भरे खेत में होती है. सबसे पहले किसान तालाब को साफ करते हैं. फिर उसमें मखाना के बीज डाले जाते हैं. कुछ महीनों बाद पौधे बड़े हो जाते हैं और पानी के ऊपर पत्ते दिखने लगते हैं. इसके बाद मखाना के दाने पानी के अंदर तैयार होते हैं. इन दानों को निकालना बहुत मेहनत का काम होता है. किसान पानी में उतरकर हाथ से मखाने के दाने निकालते हैं. फिर इन्हें धूप में सुखाया जाता है.
आज सतेंद्र यादव सिर्फ सादा मखाना नहीं बेचते. वे कई तरह के फ्लेवर वाले मखाने बनाते हैं, जैसे-
इन फ्लेवर वाले मखानों को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं, खासकर बच्चे और युवा.
इस मखाना कारोबार से सिर्फ सतेंद्र यादव ही नहीं, बल्कि गांव के और लोगों को भी फायदा हुआ. आज उनके यहां गांव के करीब 12 लोगों को काम मिला है. कोई मखाना तैयार करता है, कोई पैकिंग करता है और कोई सप्लाई का काम देखता है.
आज सतेंद्र यादव के मखाने सिर्फ गांव या जिले तक सीमित नहीं हैं. उनके उत्पाद पटना, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और झारखंड तक भेजे जाते हैं. लोग उनके ब्रांड को पहचानने लगे हैं और दोबारा ऑर्डर भी करते हैं.
लगातार मेहनत और सही योजना के कारण आज सतेंद्र यादव का मखाना कारोबार हर महीने करीब 20 से 25 लाख रुपये का टर्नओवर कर रहा है. जो किसान कभी सीमित आमदनी में जी रहा था, आज वह गांव से ही बड़ा बिजनेस चला रहा है.
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. अगर हम कुछ नया सीखें और मेहनत करें, तो हम अपनी जिंदगी बदल सकते हैं. यूट्यूब जैसे माध्यम सही जानकारी दें, तो गांव का किसान भी बड़ा कारोबारी बन सकता है.
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