
15 अक्टूबर को भारत में भारतीय महिला किसान दिवस मनाया जाता है. यह दिन खेती-किसानी में महिलाओं के योगदान और उनकी मेहनत को सम्मान देने का अवसर है. महिलाएं अब केवल खेतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि से जुड़े उत्पादों, छोटे उद्योगों और स्वरोजगार के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं. बिहार की कई महिलाएं अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ दूसरी महिलाओं और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं. पटना से सारण तक ऐसी ही महिला उद्यमियों की कहानियां महिला सशक्तीकरण की तस्वीर पेश करती हैं.
बिहार में सरकारी योजनाओं की मदद से महिलाएं छोटे कारोबार शुरू कर रही हैं और उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं. मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं के जरिए वित्तीय सहायता के साथ प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी मिल रहा है. इससे महिलाओं के लिए अपने स्तर पर उद्योग स्थापित करना आसान हुआ है. इन उद्यमों का फायदा सिर्फ कारोबार करने वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके जरिए स्थानीय स्तर पर दूसरे लोगों को भी काम मिल रहा है.
पटना की खुशबू कुमारी ने सफाई उत्पादों की मांग को देखते हुए वर्ष 2022 में डिवाइन शाइन डिटर्जेंट एवं फ्लोर क्लीनर का निर्माण शुरू किया. उन्होंने करीब 10 लाख रुपये से अपनी इकाई की शुरुआत की. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उन्हें अनुदान और उद्यमिता व कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला. धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और अब उनकी इकाई का वार्षिक टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. खुशबू को बेहतर प्रदर्शन के आधार पर वर्ष 2026 में पीएमईजीपी-2 के तहत एक करोड़ रुपये का ऋण भी मिला है. बियाडा के माध्यम से उन्हें करीब 30 हजार वर्गफुट औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां आधुनिक मशीनों से लैस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने की योजना है. फिलहाल उनकी इकाई से लगभग 100 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है. उनका लक्ष्य कारोबार का विस्तार कर करीब एक हजार लोगों को रोजगार देना है.
पटना जिले के दानापुर की नीतू देवी ने वर्ष 2023 में शगुन इंटरप्राइजेज के नाम से रेडीमेड कपड़ों की दुकान शुरू की. इस काम के लिए उन्हें सरकार से 10 लाख रुपये से अधिक की सहायता मिली. नीतू के मुताबिक, वित्तीय और तकनीकी सहयोग से अपना कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में मदद मिली. उनके व्यवसाय से 12 लोग प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, जिनमें 11 महिलाएं शामिल हैं. अब नीतू अपने कारोबार को आधुनिक मशीनरी से जोड़ने और उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में हैं. उनका उदाहरण बताता है कि छोटे स्तर पर शुरू किया गया व्यवसाय भी दूसरी महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया बन सकता है.
सारण जिले के मोहम्मदपुर गांव की गुड़िया कुमारी ने मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना का लाभ लेकर सिस्टर्स बेकरी शुरू की. उनकी इकाई में बिस्किट, कुकीज और रस्क जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं. खास बात यह है कि गुड़िया मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए शुगर-फ्री बिस्किट भी बनाती हैं. उनके कारोबार से 11 अन्य लोगों को रोजगार मिला है और सालाना टर्नओवर करीब 40 लाख रुपये है.
खुशबू, नीतू और गुड़िया की कहानियां दिखाती हैं कि महिलाओं की उद्यमशीलता परिवार की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय रोजगार को भी मजबूती दे सकती है. भारतीय महिला किसान दिवस के अवसर पर इन उदाहरणों को खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की व्यापक भूमिका से जोड़कर देखा जा सकता है. महिलाएं मेहनत, कौशल और उपलब्ध सहायता के सहारे उत्पादन के साथ-साथ कारोबार के नए अवसर बना रही हैं. इससे दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है.
ये भी पढ़ें:
UP के किसानों की होगी बल्ले-बल्ले! लकी ड्रॉ में मिलेगा ट्रैक्टर और चारा मशीन जीतने का मौका
CG News:गन्ने का दाम ₹425 होते ही किसानों ने मनाया जश्न, डिप्टी CM विजय शर्मा को शक्कर की बोरियों से तौला