
पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फलों का बाग और एग्री-टूरिज्म को अपनाने वाले रायगढ़ जिले के प्रगतिशील किसान मनोज यादव आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं. उन्होंने अपनी भूमि पर नाशपाती का बाग विकसित कर न केवल खेती को लाभकारी बनाया, बल्कि उसे पर्यटन से जोड़कर आय का नया मॉडल भी तैयार किया.उनकी सफलता यह साबित करती है कि वैज्ञानिक तकनीक, उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और नवाचार के जरिए खेती को कमाई का बेहतर माध्यम बनाया जा सकता है.
मनोज यादव बताते हैं कि बागवानी की शुरुआत से लेकर फल उत्पादन तक उन्हें उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का लगातार सहयोग मिला. विभाग के अधिकारी समय-समय पर बाग का निरीक्षण करते हैं और पौधों की देखभाल, खाद एवं उर्वरकों की संतुलित मात्रा, सिंचाई, रोग एवं कीट प्रबंधन सहित आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी देते हैं. इसी तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम है कि उनका बाग लगातार बेहतर उत्पादन दे रहा है.
इस वर्ष मौसम की मार और ओलावृष्टि के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ.साथ ही बाजार में बिक्री में भी कुछ देरी हुई. इसके बावजूद मनोज यादव के बाग से करीब 2.5 पिकअप (लगभग 260 कैरेट) नाशपाती का उत्पादन हुआ. थोक बाजार में 500 रुपये प्रति कैरेट की औसत कीमत पर बिक्री से उन्हें करीब 1.30 लाख रुपये की आय हुई.
इसके अलावा बाग में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय ग्राहकों को सीधे ताजी नाशपाती बेचकर उन्होंने 25 से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई की. इस प्रकार इस सीजन में उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ. मनोज यादव बताते हैं कि पिछले वर्ष मौसम अनुकूल रहने पर इसी बाग से उन्हें 2.5 से 3 लाख रुपये तक की आय हुई थी.
रायगढ़ जिले का कुदारीडीह (लालमाटी) क्षेत्र अब केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि एग्री-टूरिज्म के लिए भी पहचान बना रहा है. मनोज यादव का नाशपाती बाग पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हो चुका है.यहां प्रतिदिन करीब 100 से 250 पर्यटक घूमने पहुंचते हैं.
पर्यटक न केवल यहां की प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेते हैं, बल्कि 50 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से ताजी नाशपाती खरीदते हैं. सबसे खास बात यह है कि उन्हें खुद पेड़ों से फल तोड़ने का अनूठा अनुभव भी मिलता है. इससे किसानों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे उपभोक्ताओं तक अपनी उपज बेचने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो रही है.
मनोज यादव का मानना है कि यदि किसान अपनी अनुपयोगी या कम उपयोग वाली भूमि पर फलदार पौधों की बागवानी करें, तो कम रकबे में भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है. उन्होंने युवाओं और किसानों से नाशपाती, लीची तथा अन्य फलदार फसलों की खेती अपनाने की अपील की है.उनका कहना है कि यदि बाग पर्यटन स्थलों के आसपास हो तो सीधे उपभोक्ताओं को फल बेचकर अतिरिक्त लाभ भी कमाया जा सकता है.
जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को फल के बाग के विकास, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने का लगातार प्रयास कर रहे हैं. इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और एग्री-टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है.
मनोज यादव की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, विभागीय मार्गदर्शन और नवाचार को अपनाएं तो बागवानी को एक अत्यंत लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय में बदला जा सकता है.उनके प्रयास आज क्षेत्र के किसानों और युवाओं को नई सोच के साथ खेती करने की प्रेरणा दे रहे हैं.