
देश के 220 जिलों में लंपी का अलर्ट जारी हो चुका है. लंपी अपना असर भी दिखा रही है. कई राज्य लंपी के संबंध में एडवाइजरी भी जारी कर चुके हैं. लंपी के लक्षण क्या हैं, लंपी रोकथाम के उपाय क्या हैं और पीडि़त गायों की देखभाल कैसे करनी है ये सब एडवाजरी में बताया गया है. लेकिन यहां सबसे ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत उन कीट से है जिनकी मदद से लंपी बीमारी फैलती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं में होने वालीं बीमारियों की बड़ी वजह और पशुओं को सबसे ज्यादा परेशान करने वाले मच्छर-मक्खी, जोंक, किलनी होते हैं.
और तो और पशुओं की ज्यादातर बीमारियों वाहक भी ये ही कीट होते हैं. मेडिकल की भाषा में इन्हें वेक्टर (परजीवी) कहा जाता है. अभी तक परजीवी रोगों का इलाज कुछ खास तरह की दवाई देकर हो जाता था. लेकिन अब परेशान करने वाली बात ये है कि बीते कुछ वक्त से दवाईयां भी पशुओं पर असर नहीं कर रही हैं. जिसकी बड़ी वजह है परजीवी विरोधी प्रतिरोध (एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस) है.
दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल (ओवरयूज). एंटीपैरासिटिक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल और उस पर कंट्रोल ना होना परजीवियों में प्रतिरोधकता बढ़ने की एक बड़ी वजह है. सही तरह से दवाई ना लेना, पशुओं को सही तरीके से दवाई ना देना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई का पूरा कोर्स ना करना भी एक वजह है. पर्यावरणीय और जैविक कारण भी हैं. परजीवियों की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया और उनके जीन में होने वाले बदलाव भी प्रतिरोधकता का कारण बन रहे हैं.
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