
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के कल्याणदुर्ग मंडल के कुरलापल्ली गांव में रहने वाला नागप्पा परिवार आज संयुक्त परिवार की अनूठी मिसाल बन गया है. छह पीढ़ियों के 83 सदस्य आज भी एक साथ रहते हैं और खेती, पशुपालन और अन्य कारोबार मिलकर संभालते हैं. ऐसे समय में जब संयुक्त परिवार तेजी से बिखर रहे हैं, यह परिवार आपसी एकता, सम्मान और साझा जिम्मेदारी की परंपरा को निभा रहा है. परिवार की मुख्य आजीविका खेती है. नागप्पा परिवार करीब 120 एकड़ जमीन पर मूंगफली, धान, टमाटर, बैंगन, खरबूजा, पपीता, मिर्च सहित कई फसलों की खेती करता है.
सिंचाई के लिए लगभग 200 बोरवेल खुदवाए गए थे, लेकिन इनमें से फिलहाल केवल 34 ही चालू हैं. कीटनाशकों के छिड़काव से लेकर फसल की कटाई तक सभी काम परिवार के सदस्य मिलकर करते हैं. खेती के अलावा परिवार संयुक्त रूप से अपनी ट्रैवल्स कंपनी चलाता है, जिसमें की पांच बस हैं. परिवार के पास करीब 1,000 भेड़े, 70 भैंसें, तीन ट्रैक्टर, एक बोलेरो यूटिलिटी वाहन, एक आइशर कमर्शियल वाहन और खेती में इस्तेमाल होने वाले अन्य कृषि उपकरण भी हैं.
नागप्पा परिवार की शुरुआत दो परिवारों से हुई थी, जो समय के साथ बढ़कर छह पीढ़ियों और 83 सदस्यों वाले बड़े संयुक्त परिवार में बदल गया. परिवार का नेतृत्व रिश्ते में साढ़ू भाई हनुमंतरायुडु और मुथ्यालप्पा करते हैं. परिवार के सभी सदस्य चार एक-दूसरे से सटे हुए घरों में रहते हैं. परिवार के बुजुर्ग आपसी बातचीत और सहमति से महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं और किसी भी विवाद का समाधान घर के भीतर ही कर लेते हैं.
परिवार के बुजुर्ग हनुमंतरायुडु ने कहा, "हमने कभी अपनी संपत्ति का आकलन जमीन-जायदाद से नहीं किया. हमारी सबसे बड़ी पूंजी हमारा आपसी रिश्ता है. जब तक हम एकजुट हैं, तब तक किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं." परिवार में 43 पंजीकृत मतदाता हैं. परिवार में 20 बेटे और बहुएं हैं. सदस्यों का कहना है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर नए घर बना लिए जाएंगे, लेकिन परिवार को कभी अलग नहीं किया जाएगा. परिवार के एक अन्य बुजुर्ग मुथ्यालप्पा ने कहा, "हर परिवार में छोटे-मोटे मतभेद होते हैं. हम उन्हें आपस में बैठकर सुलझा लेते हैं. अलग होना कभी हमारे लिए विकल्प नहीं रहा."
परिवार ने बच्चों की शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों और सरकारी छात्रावासों पर भरोसा जताया है. परिवार का मानना है कि अच्छी शिक्षा महंगे निजी स्कूलों से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की मेहनत और लगन से मिलती है. इसी सोच के साथ बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है.
परिवार आज भी पारंपरिक जीवनशैली अपनाए हुए है. घर में रोजाना लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जाता है. भोजन में रागी संगटी, रागी की रोटी और ज्वार की रोटी प्रमुख रूप से शामिल रहती हैं. परिवार के अनुसार, त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में पूरे परिवार के भोजन के लिए पांच से छह भेड़ों और करीब 50 किलोग्राम चिकन की जरूरत पड़ती है. बड़े आयोजनों में सात से आठ भेड़ों का इंतजाम करना पड़ता है.
परिवार के सदस्यों का कहना है कि छह पीढ़ियों के दौरान रिश्तेदारी में कई शादियां हुई हैं, लेकिन अब तक परिवार में कोई बड़ी आनुवंशिक स्वास्थ्य समस्या सामने नहीं आई है. हनुमंतरायुडु ने कहा, "हमारी एकता ने हमें हर कठिनाई से बाहर निकाला है. हम प्रार्थना करते हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएं और संयुक्त परिवार की व्यवस्था को बनाए रखें."
गांव के लोगों ने कहा कि नागप्पा परिवार पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है. यह परिवार दिखाता है कि आधुनिक दौर में भी आपसी सहयोग, साझा जिम्मेदारी और बुजुर्गों के सम्मान के साथ संयुक्त परिवार सफलतापूर्वक चल सकता है. अब्दुल बशीर की रिपोर्ट