New Sugarcane Variety: यूपी के किसानों में गन्ने की नई किस्म CoS.23232 का क्रेज, 5 मिनट में बुक हो गए 2 लाख बड्स

New Sugarcane Variety: यूपी के किसानों में गन्ने की नई किस्म CoS.23232 का क्रेज, 5 मिनट में बुक हो गए 2 लाख बड्स

उत्तर प्रदेश के किसानों में गन्ने की नई किस्म CoS.23232 की मांग तेजी से बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद के पोर्टल पर 9 अक्टूबर को बुकिंग शुरू होने के पांच मिनट के भीतर ही 2 लाख बड्स बुक हो गए.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 12, 2026,
  • Updated Oct 12, 2026, 12:01 PM IST

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बीच गन्ने की नई किस्म CoS.23232 को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. कम समय में पकने, ज्‍यादा वजन और ज्यादा चीनी की मात्रा जैसी खूबियों वाली इस किस्म को मौजूदा लोकप्रिय किस्म Co.0238 के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. आगामी बुवाई सीजन से पहले ही इसकी मांग इतनी बढ़ गई कि ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के महज पांच मिनट के भीतर उपलब्ध पूरा स्टॉक बुक हो गया.

9 अक्टूबर को शुरू हुई ऑनलाइन बुकिंग

उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) ने 9 अक्टूबर को अपने आधिकारिक पोर्टल पर CoS.23232 किस्म के गन्ना बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की थी. परिषद की ओर से इस दौरान केवल 2 लाख बड्स यानी गन्ने की आंखें उपलब्ध कराई गई थीं. 

गन्ना अनुसंधान परिषद के प्रजनन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि बुकिंग शुरू होने के पांच मिनट के भीतर ही पूरा स्टॉक बुक हो गया. इससे पता चलता है कि नई किस्म को लेकर किसानों में काफी दिलचस्पी है, हालांकि सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में किसान इसकी बुकिंग नहीं करा सके.

नई किस्म विकसित करने में लगते हैं 10 से 12 साल

डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक, गन्ने की नई किस्म विकसित करने में आमतौर पर 10 से 12 साल का समय लगता है. इस प्रक्रिया की शुरुआती चरणों में कोयंबटूर में क्रॉसिंग और प्रजनन संबंधी काम किया जाता है, जहां की जलवायु को शुरुआती विकास के लिए अनुकूल माना जाता है. इसके बाद वैज्ञानिक गन्ने की पैदावार और मिठास के बीच संतुलन का आकलन करते हैं. कई चरणों के परीक्षण और मूल्यांकन के बाद ही किसी किस्म को खेती के लिए चुना जाता है.

दो किस्मों के क्रॉस से तैयार हुई CoS.23232

CoS.23232 को उत्तर भारत की CoS.8119 और दक्षिण भारत की Co.775 किस्मों के संकरण से बनाया गया है. इस प्रक्रिया में CoS.8119 को मादा जनक और Co.775 को नर जनक के रूप में इस्तेमाल किया गया. वैज्ञानिकों का उद्देश्य ऐसी किस्म तैयार करना था, जो जल्दी पकने के साथ बेहतर वजन और अधिक चीनी की मात्रा जैसी विशेषताएं भी दे सके.

जल्दी कटाई के लिए विकसित की गई किस्म

गन्ना अनुसंधान परिषद के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि इस नई किस्म को करीब एक दशक के मूल्यांकन के बाद खेती के लिए पेश किया गया है. CoS.23232 में दूसरी किस्मों की तुलना में प्रति क्विंटल करीब 10 प्रतिशत अधिक वजन मिलने की बात सामने आई है. इसके गन्ने लंबे और मोटे होते हैं और इनमें चीनी की मात्रा भी अधिक बताई गई है. जल्दी पकने की विशेषता के कारण इसे समय पर कटाई और गन्ने की बेहतर उपज चाहने वाले किसानों के लिए उपयोगी विकल्प माना जा रहा है.

बीज की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी

फिलहाल CoS.23232 को उत्तर प्रदेश में खेती के लिए उपलब्ध कराया गया है. किसानों की बढ़ती मांग को देखते हुए परिषद बीज उत्पादन और प्रसार बढ़ाने की तैयारी कर रही है. डॉ. संजीव कुमार पाठक के मुताबिक, इसके लिए सिंगल-बड प्रोपेगेशन यानी गन्ने की एक आंख से पौधा तैयार करने की तकनीक और टिश्यू कल्चर का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन तरीकों से रोपण सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने और अधिक किसानों तक नई किस्म पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

अक्टूबर में किसान मेले में मिल सकती हैं मिनी सीड किट

गन्ना अनुसंधान परिषद अक्टूबर में किसान मेले का आयोजन करने की तैयारी भी कर रही है. इस मेले में किसानों को नई किस्म की मिनी सीड किट वितरित किए जाने की उम्मीद है. इससे उन किसानों को भी रोपण सामग्री प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है, जो ऑनलाइन बुकिंग के दौरान सीमित स्टॉक के कारण बीज नहीं ले पाए थे. (पीटीआई)

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