‘काशी नंदिनी’ से बदलेगी मटर खेती की तस्वीर, नैफको के साथ समझौते से किसानों तक पहुंचेगा उन्नत बीज

‘काशी नंदिनी’ से बदलेगी मटर खेती की तस्वीर, नैफको के साथ समझौते से किसानों तक पहुंचेगा उन्नत बीज

आईआईवीआर वाराणसी द्वारा विकसित मटर की उन्नत किस्म ‘काशी नंदिनी’ अब नैफको के जरिए किसानों तक बड़े स्तर पर पहुंचेगी. यह हाई यील्ड किस्म कम समय में अधिक उत्पादन देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगी.

धर्मेंद्र सिंह
  • Varanasi ,
  • May 25, 2026,
  • Updated May 25, 2026, 5:41 PM IST

मटर उत्पादक किसानों के लिए अच्छी खबर है। भा.कृ.अ.प.-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी द्वारा विकसित उन्नत मटर किस्म ‘काशी नंदिनी’ अब देशभर के किसानों तक बड़े स्तर पर पहुंच सकेगी. इसके लिए संस्थान ने नेशनल एग्रो फार्मिंग मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (नैफको), नई दिल्ली के साथ लाइसेंस समझौता किया है.

इस समझौते से ‘काशी नंदिनी’ किस्म के गुणवत्तायुक्त बीजों का उत्पादन और वितरण तेज होगा, जिससे किसानों को समय पर बेहतर बीज उपलब्ध हो सकेंगे. कृषि क्षेत्र में इसे अनुसंधान संस्थानों और सहकारी संस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है.

समझौते पर आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार और नैफको की ओर से समित सक्सेना ने हस्ताक्षर किए. इस दौरान वैज्ञानिकों और अधिकारियों की मौजूदगी में उन्नत बीज तकनीक को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया.

किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होगी ‘काशी नंदिनी’

डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि संस्थान ऐसी सब्जी किस्मों के विकास पर लगातार काम कर रहा है, जो अधिक उत्पादन देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा मजबूत करने में सहायक हों. उन्होंने कहा कि उन्नत किस्मों का लाइसेंस हस्तांतरण गुणवत्तायुक्त बीजों के बड़े पैमाने पर उत्पादन और तेज वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जल्दी तैयार होने वाली हाई यील्ड किस्म

‘काशी नंदिनी’ मटर की शीघ्र तैयार होने वाली उन्नत किस्म है. इसमें प्रति पौधा 7 से 8 फलियां लगती हैं और प्रत्येक फली में 8 से 9 दाने पाए जाते हैं.इसकी फलियां 8 से 9 सेंटीमीटर लंबी होती हैं तथा शेलिंग प्रतिशत लगभग 47 से 48 प्रतिशत तक रहता है.

यह किस्म लगभग 110 से 120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलने की संभावना है.

तकनीक और किसानों के बीच बनेगा मजबूत सेतु

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने कहा कि इस तरह की साझेदारियां कृषि अनुसंधान और खेतों के बीच मजबूत कड़ी का काम करती हैं.

 संस्थान की प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई (आईटीएमयू) नई तकनीकों और उन्नत किस्मों को किसानों तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है.

कार्यक्रम में डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. त्रिभुवन चौबे, डॉ. सुदर्शन मौर्य, डॉ. ज्योति देवी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इन्दीवर प्रसाद सहित कई वैज्ञानिक उपस्थित रहे

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