
महाराष्ट्र में उर्वरक उद्योग से जुड़ी एक बड़ी बहस सामने आई है. देश के माइक्रोन्यूट्रिएंट (सूक्ष्म पोषक तत्व) बनाने वाली कंपनियों के संगठन Indian Micro Fertilizers Manufacturers Association (IMMA) ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह अपनी ‘इंस्पेक्टर-फ्री’ नीति को जारी रखे. संगठन का कहना है कि अगर इस नीति को वापस लिया गया, तो इससे व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) और निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है.
महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बना था जिसने जून 2025 में उर्वरक सेक्टर के लिए ‘इंस्पेक्टर-फ्री’ व्यवस्था लागू की थी. इस नीति का मतलब है कि उद्योगों पर बार-बार निरीक्षण (इंस्पेक्शन) का दबाव कम किया जाए और भरोसे पर आधारित व्यवस्था बनाई जाए. IMMA के अनुसार, इस फैसले से छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों को काफी राहत मिली और नए निवेश को बढ़ावा मिला.
IMMA ने 4 अप्रैल को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है. इस पत्र में कहा गया है कि राज्य में दोबारा इंस्पेक्टर आधारित सिस्टम लागू करने की चर्चा हो रही है, जिससे उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है. संगठन का दावा है कि वह देश के करीब 80 प्रतिशत माइक्रोन्यूट्रिएंट निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करता है और लंबे समय से सरकार के साथ मिलकर किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन सुधारने में योगदान दे रहा है.
IMMA ने बताया कि अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 में इस नए प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी, लेकिन इसमें उद्योग से जुड़े प्रमुख लोगों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया. संगठन का मानना है कि अगर फिर से निरीक्षक-आधारित सख्त नियम लागू किए गए, तो इससे उद्योगों की स्वतंत्रता कम होगी और कारोबार करना मुश्किल हो सकता है.
IMMA का कहना है कि ‘इंस्पेक्टर-फ्री’ नीति ने उद्योग और सरकार के बीच भरोसे को मजबूत किया है. इससे दोनों के बीच सहयोग बढ़ा और नवाचार (innovation) को भी बढ़ावा मिला. लेकिन अगर पुरानी व्यवस्था वापस लाई जाती है, तो यह भरोसा कमजोर पड़ सकता है और राज्य की प्रगतिशील छवि पर भी असर पड़ेगा.
IMMA के अलावा कई अन्य बड़े उद्योग संगठन भी इस मुद्दे पर एकजुट हो गए हैं. इनमें Soluble Fertilizer Industry Association, Pesticides Manufacturers & Formulators Association of India, Organic Agro Manufacturers Association, Maharashtra Biocontrol Manufacturers Association और Indian Agro Inputs Manufacturers Association शामिल हैं. इन सभी संगठनों ने भी मुख्यमंत्री से अपील की है कि राज्य में मौजूदा नीति को जारी रखा जाए.
उद्योग संगठनों का मानना है कि इस नीति से न सिर्फ उद्योग को फायदा हुआ है, बल्कि किसानों को भी बेहतर और सस्ते उत्पाद मिल पाए हैं. अगर निवेश और उत्पादन पर असर पड़ेगा, तो इसका सीधा असर कृषि क्षेत्र और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है.
IMMA और अन्य संगठनों ने सरकार से इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने से निवेश बढ़ेगा, नए प्रयोग (innovation) होंगे और कृषि उत्पादन में सुधार आएगा. साथ ही उन्होंने सरकार के साथ मिलकर काम करने और किसानों के हित में योगदान देने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है.
कुल मिलाकर, यह मुद्दा केवल उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध किसानों, निवेश और राज्य की आर्थिक प्रगति से भी जुड़ा हुआ है. अब देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस पर क्या फैसला लेती है.
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