
मौजूदा वैश्विक हालात में एलपीजी सिलेंडर और खाद की किल्लत की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, उत्तर प्रदेश के किसानों को खाद की किसी भी कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के एडिशनल डायरेक्टर आशुतोष मिश्रा ने आज तक से बातचीत में स्पष्ट किया कि सरकार ने किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त खाद का स्टॉक रखा है.
सरकार ने अप्रैल से सितंबर के बीच 2 लाख 44 हजार मेट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति का अनुमान लगाया था. लेकिन अब उपलब्ध स्टॉक 11 लाख 79 हजार मेट्रिक टन यूरिया है. यानी, मांग से कहीं अधिक यूरिया स्टॉक में मौजूद है. इसी तरह डीएपी खाद की भी कोई कमी नहीं है और सभी किसानों तक इसे समय पर पहुँचाने के लिए विभाग सतर्क है.
नेपाल बॉर्डर के पास के सात जिलों में विभाग ने विशेष चौकसी बढ़ा दी है. बॉर्डर पर पांच किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह का खाद बिक्री केंद्र नहीं खोला गया है. अधिकारियों ने सघन चेकिंग का अभियान शुरू किया है. अगर कोई व्यक्ति एक बोरी से अधिक खाद ले जा रहा है, तो उससे पूछताछ की जाएगी.
उत्तर प्रदेश में खाद वितरण के लिए सख्त नियम लागू हैं. बिना खतौनी वाले किसानों को खाद नहीं दी जाएगी. एक हेक्टेयर खेत के लिए पाँच बोरी डीएपी और सात बोरी यूरिया का मानक रखा गया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर असली किसान को सही मात्रा में खाद मिले और कोई भी कालाबाजारी न कर सके.
विभाग हर जिले में रोजाना सर्वाधिक खाद खरीदने वाले 20 उपभोक्ताओं की जांच करवा रहा है. यह पता लगाया जा रहा है कि ये लोग असली किसान हैं या फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कालाबाजारी कर रहे हैं. इस निगरानी से किसानों को सही मात्रा में खाद मिलने की गारंटी सुनिश्चित की जा रही है.
फिलहाल उत्तर प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है. सरकार के पास हर प्रकार के खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. किसानों को भरोसा दिया गया है कि उनकी फसलों की सुरक्षा और उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए विभाग हर समय सतर्क है. इस तैयारी से राज्य में किसानों की चिंता कम होगी और खाद की कालाबाजारी पर भी कड़ा नियंत्रण रहेगा. (संतोष शर्मा का इनपुट)
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