खरीफ सीजन पर दिखेगा गैर-सब्सिडी खाद बैन का असर! FAI ने फैसले पर रोक लगाने को कहा

खरीफ सीजन पर दिखेगा गैर-सब्सिडी खाद बैन का असर! FAI ने फैसले पर रोक लगाने को कहा

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने गैर-सब्सिडी खादों की बिक्री पर रोक लगा दी है, जिससे खेती और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. उद्योग ने इस फैसले पर चिंता जताई है.

नैनो यूरिया के इस्तेमाल के फायदे (सांकेतिक तस्वीर)नैनो यूरिया के इस्तेमाल के फायदे (सांकेतिक तस्वीर)
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 26, 2026,
  • Updated May 26, 2026, 12:16 PM IST

देश के दो बड़े कृषि उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गैर-सब्सिडी वाली खादों की बिक्री पर रोक लगाए जाने से खेती और उत्पादन को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब देश पहले ही कम मॉनसून और पश्चिम एशिया संकट के चलते खाद आपूर्ति में रुकावटों का सामना कर रहा है.

क्या है राज्य सरकारों का तर्क?

मध्य प्रदेश सरकार ने प्रमुख यूरिया बनाने वाली कंपनियों को राज्य में गैर-सब्सिडी खादों की बिक्री से रोक दिया है. इससे पहले उत्तर प्रदेश भी इसी तरह का कदम उठा चुका है. इसके बाद महाराष्ट्र ने भी 20 मई को इसी तरह का निर्देश जारी किया है, जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है.

राज्य सरकारों का तर्क है कि कई कंपनियां सब्सिडी वाली खादों के साथ गैर-सब्सिडी प्रोडक्ट—जैसे बायो-स्टिमुलेंट, लिक्विड स्पेशलिटी फर्टिलाइजर और वाटर-सोल्यूबल फर्टिलाइजर को जोड़कर (टैग कर) बेच रही हैं. इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है, ताकि सब्सिडी का दुरुपयोग न हो.

उद्योग जगत फैसले से खफा

हालांकि, उद्योग जगत इस फैसले से सहमत नहीं है. उनका कहना है कि इससे न सिर्फ खाद आपूर्ति प्रभावित होगी, बल्कि किसानों की फसलों को संतुलित पोषण भी नहीं मिल पाएगा. भारत सरकार पिछले कई साल से केमिकल खादों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है, ताकि केवल यूरिया पर निर्भरता कम हो सके. ऐसे में गैर-सब्सिडी खादों पर रोक इस नीति के विपरीत बताई जा रही है.

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों ही खेती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण राज्य हैं. मध्य प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा अनाज पैदा करने वाला है और दलहन- तिलहन उगाने में टॉप पर है. वहीं उत्तर प्रदेश देश के कुल कृषि उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत का योगदान देता है. ऐसे में इन राज्यों में किसी भी तरह की नीति का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे सकता है.

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, गैर-सब्सिडी खादों का क्षेत्र आज करीब 1 अरब डॉलर का हो चुका है. इसमें विशेष पोषक तत्व शामिल होते हैं, जो खासकर अधिक कमाई देने वाली फसलों और संतुलित खेती के लिए जरूरी हैं. बड़ी खाद कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में भारी निवेश भी किया है. इस श्रेणी की खादों पर रोक लगाने से इन निवेशों पर भी असर पड़ सकता है.

FAI ने जताई चिंता

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए राज्यों से अपने आदेशों पर फिर से विचार करने की अपील की है. FAI का कहना है कि इस तरह के फैसले सरकार के भविष्य के बड़े लक्ष्य को कमजोर कर सकते हैं. संगठन ने महाराष्ट्र सरकार को लिखे पत्र में भी यही चिंता जताई है.
 
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ‘टैगिंग’ यानी सब्सिडी वाले प्रोडक्ट के साथ अन्य उत्पादों की अनिवार्य बिक्री एक वास्तविक समस्या है, लेकिन इसका समाधान पूरी तरह रोक लगाने में नहीं है. वे एक बीच का रास्ता निकालने की बात कर रहे हैं.

FAI का सुझाव है कि फिलहाल इस आदेश को खरीफ सीजन के दौरान लागू न किया जाए, ताकि बुवाई पर असर न पड़े. इसके साथ ही, एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाया जाए, जिसमें कृषि विभाग, खाद कंपनियां, डीलर संगठन और किसान प्रतिनिधि शामिल हों, ताकि इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके.

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब खाद की वैश्विक आपूर्ति पहले से दबाव में है, राज्यों के स्तर पर लिए गए इस तरह के फैसले स्थिति को और मुश्किल बना सकते हैं. आने वाले खरीफ सीजन में इन नीतियों का वास्तविक असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है. कुल मिलाकर, FAI चाहता है कि सरकार जल्दबाजी में प्रतिबंध लगाने के बजाय ऐसा रास्ता निकाले जिससे किसान, उद्योग और सप्लाई तीनों प्रभावित न हों.

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