फर्टिलाइजर सेक्टर को राहत: गैस सप्लाई में प्राथमिकता, लेकिन 85% आयात पर निर्भर भारत

फर्टिलाइजर सेक्टर को राहत: गैस सप्लाई में प्राथमिकता, लेकिन 85% आयात पर निर्भर भारत

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस की सप्लाई को रेगुलेट करते हुए फर्टिलाइजर प्लांट को ‘प्राथमिकता क्षेत्र-2’ में रखा है. आंकड़ों के मुताबिक भारत का फर्टिलाइजर उद्योग 85% आयातित गैस पर निर्भर है, जिससे वैश्विक सप्लाई में बाधा का असर सीधे खाद उत्पादन पर पड़ सकता है.

धौलपुर में कम डीएपी खाद की कालाबाजारी. (सांकेतिक तस्‍वीर)धौलपुर में कम डीएपी खाद की कालाबाजारी. (सांकेतिक तस्‍वीर)
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 13, 2026,
  • Updated Mar 13, 2026, 4:17 PM IST

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के चलते भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस की सप्लाई को रेगुलेट करने को तरजीह दी है. घरेलू जरूरतों पर कोई असर न पड़े, इसके लिए फर्टिलाइजर प्लांट को भी "प्राथमिकता क्षेत्र-2" (Priority Sector-2) में रखा गया है.

नए नियम के तहत, फर्टिलाइजर प्लांट को उनकी औसत प्राकृतिक गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा. इसका मकसद किसानों के लिए खाद की सप्लाई को सुचारू बनाए रखना और मौजूदा संकट के बीच जरूरतों को पूरा करना है. 

सवाल है कि भारत का फर्टिलाइजर उद्योग आयातित प्राकृतिक गैस पर कितना निर्भर है?

भारत ने अप्रैल से जनवरी 2025–26 के बीच 58,802 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCM) प्राकृतिक गैस की खपत की. इसमें से 16,812 MMSCM गैस सिर्फ फर्टिलाइजर के लिए इस्तेमाल हुई. और, इस 16,812 MMSCM में से 14,353 MMSCM या 85 प्रतिशत गैस आयात की गई थी.

सरकार के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक, आयातित प्राकृतिक गैस (30,555 MMSCM) का आधा हिस्सा फर्टिलाइजर के लिए इस्तेमाल हुआ.

फर्टिलाइजर के अलावा, रिफाइनरियों में इस्तेमाल होने वाली प्राकृतिक गैस का 78 प्रतिशत और मैन्युफैक्चरिंग और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली गैस का 74 प्रतिशत हिस्सा भी आयात किया गया था.

हालांकि प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट से पूरी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, लेकिन कुछ राज्यों को दूसरों के मुकाबले ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा. अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच, गुजरात ने देश में इस्तेमाल हुई कुल नैचुरल गैस का 21.3 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल किया. उत्तर प्रदेश ने 16.2 प्रतिशत, महाराष्ट्र ने 13.9 प्रतिशत और हरियाणा ने 5.8 प्रतिशत इस्तेमाल किया.

हाल के सालों में भारत ने नैचुरल गैस पर अपना जोर बढ़ाया है, खासकर सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) और कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (CNG) इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार के मामले में. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की 'इंडिया गैस मार्केट रिपोर्ट आउटलुक टू 2030' रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक भारत की नैचुरल गैस की खपत में लगभग 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.

इस बीच, सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि यूरिया की उपलब्धता बढ़कर 61.51 लाख मीट्रिक टन (LMT) हो गई है, जिससे आने वाली खरीफ की बुवाई के लिए भारत वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाले झटकों से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.(सम्राट शर्मा की रिपोर्ट)

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