IIVR वाराणसी ने किसानों के लिए उठाया बड़ा कदम, सब्जियों की 15 किस्मों के बीज का जारी किया लाइसेंस

IIVR वाराणसी ने किसानों के लिए उठाया बड़ा कदम, सब्जियों की 15 किस्मों के बीज का जारी किया लाइसेंस

Varanasi News: संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके मार्गदर्शन में तकनीक हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया गया. डॉ. कुमार ने कहा कि संस्थान का लक्ष्य अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर उसे किसानों के खेतों तक पहुंचाना है. 

 एग्रोविन एग्री सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ समझौता एग्रोविन एग्री सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ समझौता
क‍िसान तक
  • LUCKNOW,
  • Feb 17, 2026,
  • Updated Feb 17, 2026, 7:42 AM IST

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी ने सब्जी अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. संस्थान ने एग्रोविन एग्री सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ 15 विभिन्न फसलों की 15 उन्नत किस्मों के लाइसेंस से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. या पहली बार है जब निजी कंपनी को एक साथ 15 अलग-अलग फसलों की 15 सब्जी किस्मों का लाइसेंस प्रदान किया गया है. 

एग्रोविन एग्री सोल्यूशन को मिला बीज विपणन अधिकार

इस समझौते के तहत, कुल कुल 15 सब्जी किस्मों का विपणन अधिकार एग्रोविन एग्री सोल्यूशन को मिला है. इनमें टमाटर की काशी चमन, फूलगोभी की काशी गोभी-पच्चीस, बैंगन की काशी विजय, मूली की काशी मूली-चालीस, गाजर की काशी कृष्णा, मटर की काशी अगेती, भिंडी की काशी सहिष्णु, तरबूज की काशी मोहिनी, तोरई (स्पंज लौकी) की काशी कल्याणी, खरबूजे की काशी मधु, नेनुआ (रिज गार्ड) की काशी नंदा, परवल की काशी परवल–141, करेला की काशी मयूरी, खीरे की काशी नूतन और लौकी की काशी बहार शामिल हैं.

बेहतर गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता

इन किस्मों का विकास किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उच्च उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के उद्देश्य से किया गया है. यह महत्वपूर्ण उपलब्धि संस्थान की जेडटीयूएम इकाई तथा एग्रीबिज़नेस इनक्यूबेशन इकाई के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिनके माध्यम से अनुसंधान कार्यों को सफलतापूर्वक व्यावसायिक रूप दिया गया और उद्योग तथा किसानों के बीच मजबूत सेतु स्थापित हुआ.

सब्जी उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाना

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके मार्गदर्शन में तकनीक हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया गया. डॉ. कुमार ने कहा कि संस्थान का लक्ष्य अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर उसे किसानों के खेतों तक पहुंचाना है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसी साझेदारियां भविष्य में सब्जी उत्पादन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने में सहायक होंगी. 

किसानों को समय पर मिलेगी सटीक सलाह 

डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि यह सहयोग किसानों की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों से पौध संरक्षण, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा वास्तविक समय में फसल निगरानी को सशक्त बनाया जा सकेगा, जिससे किसानों को समय पर सटीक सलाह उपलब्ध होगी.

किसानों को अधिक आर्थिक लाभ होगा

एग्रोविन एग्री सोल्यूशन की ओर से सत्यम राज ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित उन्नत किस्मों, फसल सुधार में संस्थान की विशेषज्ञता और वैज्ञानिकों के समर्पण के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि इन किस्मों से किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा.

एआई-आधारित कृषि के तहत एलगोस कंपनी से एमओयू 

इसके साथ साथ इसी दिन इसी दिन एल्गॉस प्राइवेट लिमिटेड के बीच कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए. एल्गॉस के निदेशक अमरेश कुमार सिंह के साथ सुश्री वंदिता दुबे ने कंपनी का प्रतिनिधित्व किया.

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