
बिहार सरकार फसलों में कीट प्रबंधन और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए सख्ती से काम कर रही है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ड्रोन से छिड़काव को सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं रखा जाएगा. अब गांव-गांव जाकर वास्तविक पड़ताल की जाएगी और किसानों से सीधा फीडबैक लिया जाएगा. वहीं, अब कृषि मंत्री ने कहा कि विभाग अब ड्रोन छिड़काव की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक अध्ययन भी कराएगा.
कृषि मंत्री सिन्हा ने कहा कि ड्रोन आधारित छिड़काव आधुनिक कृषि की जरूरत है, लेकिन इसका सही क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने निर्देश दिया कि हर छिड़काव के बाद संबंधित किसान का वीडियो रिकॉर्ड तैयार किया जाए और सत्यापन किया जाए कि वास्तव में छिड़काव हुआ या नहीं. मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि योजनाओं में सिर्फ खानापूर्ति नहीं चलेगी. जमीनी स्तर पर परिणाम दिखना चाहिए. विभाग अब ड्रोन छिड़काव की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक अध्ययन भी कराएगा.
बैठक में मृदा स्वास्थ्य और पौधा संरक्षण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई. मंत्री ने कहा कि मिट्टी कृषि उत्पादन की आधारशिला है. राज्य में मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं को और मजबूत किया जाएगा. वित्तीय वर्ष 2025-26 में पौधा संरक्षण योजनाओं पर 1,982.60 लाख रुपये खर्च किए गए हैं.
वहीं, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना पर केंद्र प्रायोजित योजना के तहत 5,062.84 लाख रुपये व्यय किए गए. मंत्री ने कहा कि वे खुद गांवों का दौरा कर मिट्टी जांच की प्रक्रिया और किसानों को मिल रहे लाभों का जायजा लेंगे.
कृषि मंत्री ने कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों की ग्रेडिंग व्यवस्था शुरू करने का निर्देश दिया. दुकानों की गुणवत्ता, किसानों को दी जा रही सेवाओं और बिक्री के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाएगा. इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध हो सकेंगे. मंत्री ने कहा कि किसानों को नकली और घटिया कीटनाशकों से बचाना भी विभाग की जिम्मेदारी है. दुकानों की ग्रेडिंग से बाजार में पारदर्शिता आएगी.
कृषि मंत्री सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचे. पौधा संरक्षण, कीट प्रबंधन, ड्रोन छिड़काव और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को गांवों के स्तर पर मजबूत किया जाए. मंत्री ने कहा कि किसान भाइयों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा.
विभाग की योजनाएं कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि खेतों में दिखनी चाहिए. यह समीक्षा बैठक कृषि विभाग की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक के साथ-साथ मिट्टी की सेहत और किसानों की आय दोनों को संतुलित तरीके से बढ़ाया जाए.