Fertilizers Sale: अप्रैल से दिसंबर के बीच बढ़ी खाद की बिक्री, जानें घरेलू उत्‍पादन का कैसा रहा हाल

Fertilizers Sale: अप्रैल से दिसंबर के बीच बढ़ी खाद की बिक्री, जानें घरेलू उत्‍पादन का कैसा रहा हाल

Fetilizer Sale Data: अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच उर्वरक बाजार के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. बिक्री बढ़ी है, लेकिन उत्पादन और आयात के पीछे की कहानी कुछ और इशारा कर रही है. पढ़‍िए FAI ने इसे लेकर क्‍या कहा...

Fertilizer Sales Import and ProductionFertilizer Sales Import and Production
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 28, 2026,
  • Updated Jan 28, 2026, 5:45 PM IST

देश में चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों यानी अप्रैल से दिसंबर के दौरान उर्वरक बाजार की तस्वीर कई संकेत दे रही है. एक तरफ किसानों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात पर निर्भरता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर कुछ प्रमुख उर्वरकों के घरेलू उत्पादन में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन साधने के लिए नीति स्तर पर लगातार कोश‍िश होती दिखाई दे रही है.

लगभग 4 फीसदी बढ़ी यूरिया की बिक्री

FAI के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2025 में देश में यूरिया की बिक्री बढ़कर 3.12 करोड़ टन से अधिक पहुंच गई. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 3.8 प्रतिशत ज्यादा है. दिलचस्प बात यह है कि इस बढ़ी हुई बिक्री का आधार घरेलू उत्पादन नहीं, बल्कि आयात रहा. जहां देश में यूरिया उत्पादन करीब 2.24 करोड़ टन रहा और इसमें मामूली गिरावट देखी गई, वहीं, आयात में 85 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल दर्ज हुआ और यह 80 लाख टन के करीब पहुंच गया.

NP और NPK खादों का उत्‍पादन बढ़ा

खरीफ और रबी सीजन के दौरान फसलों की पोषण जरूरतें पूरी करने में इस आयात ने अहम भूमिका निभाई. सिर्फ यूरिया ही नहीं, बल्कि अन्य जटिल उर्वरकों के आंकड़े भी यही कहानी बयां कर रहे हैं. डीएपी को छोड़कर एनपी और एनपीके उर्वरकों का उत्पादन करीब 13 प्रतिशत बढ़ा. इसके साथ ही इन उर्वरकों के आयात में तो 120 प्रतिशत से भी अधिक की तेज बढ़ोतरी देखी गई. हालांकि, इनका कुल बिक्री आंकड़ा लगभग स्थिर बना रहा, जो यह संकेत देता है कि बाजार में मांग सीमित दायरे में ही रही.

DAP के घरेलू उत्‍पादन में गिरावट

डीएपी के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है. घरेलू उत्पादन में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि आयात में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसके बावजूद डीएपी की बिक्री पिछले साल के मुकाबले कुछ कम रही. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसान धीरे-धीरे उर्वरकों के संतुलित उपयोग की ओर बढ़ रहे हैं और केवल एक ही पोषक तत्व पर निर्भरता कम हो रही है.

पोटाश यानी एमओपी की बिक्री में भी हल्की बढ़त दिखी, जबकि इसका आयात घट गया. वहीं, सिंगल सुपर फॉस्फेट का उत्पादन और बिक्री दोनों में दो अंकों की वृद्धि दर्ज हुई, जो स्वदेशी विकल्पों की मजबूत होती भूमिका की ओर इशारा करता है.

FAI के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि आंकड़ों में दिख रहा पोषक तत्वों का बदलता मिश्रण अधिक संतुलित उर्वरक प्रथाओं की ओर धीरे-धीरे बदलाव को रेखांकित करता है. एसोसिएशन ने कहा कि कोऑर्डिनेटेड प्रोडक्शन प्लानिंग, कैलिब्रेटेड इंपोर्ट और स्वदेशी पोषक तत्वों के विकल्पों को मजबूत करने से संतुलित उर्वरीकरण (फर्टिलाइजेशन) के मकसद को हासिल करने में मदद मिलती है. (पीटीआई)

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