
ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के पारादीप में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) के सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट (SAP-III) की तीसरी स्ट्रीम का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि उर्वरक उत्पादन से जुड़ी कच्ची सामग्री के लिए भारत की आयात पर निर्भरता कम करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और देश की आत्मनिर्भरता को मजबूती देगी. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच केवल उर्वरक उत्पादन तक सीमित नहीं है.
इसके तहत उर्वरक बनाने में उपयोग होने वाली जरूरी कच्ची सामग्री भी देश में ही तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है. पारादीप स्थित इफको संयंत्र का यह विस्तार इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि ओडिशा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए डेयरी सहकारिता को गांव-गांव तक पहुंचाने की योजना पर भी काम किया जाएगा.
शाह ने बताया कि गुजरात में अमूल मॉडल के जरिए लाखों ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और पशुपालन को मजबूत करने में बड़ी सफलता मिली है. इसी तरह का सहकारी ढांचा ओडिशा में विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा. अमित शाह ने कहा कि गुजरात में लगभग 36 लाख ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से अमूल एक बड़े आर्थिक आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है और इससे होने वाला लाभ सीधे पशुपालक महिलाओं तक पहुंचता है.
उन्होंने कहा कि ओडिशा में भी आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए डेयरी सहकारिता का विस्तार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार और ओडिशा सरकार मिलकर राज्य के गांवों में डेयरी नेटवर्क विकसित करने की दिशा में प्रयास करेंगी.
इसके साथ ही मत्स्य पालन को भी सहकारी ढांचे से जोड़ने की योजना है, जिससे समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. अमित शाह ने कहा कि हाल के चुनावों के बाद यह उनका ओडिशा में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है.
उन्होंने राज्य के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि नई सरकार के साथ मिलकर ओडिशा के विकास को नई गति दी जाएगी. प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद लंबे समय तक राज्य की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाया, लेकिन अब तटीय क्षेत्रों, आदिवासी इलाकों और स्थानीय उद्योगों को ध्यान में रखकर व्यापक विकास योजना तैयार की गई है. (एएनआई)