
मार्च का महीना आते ही किसान पारंपरिक फसलों के अलावा सफेद तिल की खेती करने की तैयारी करने लगे हैं. दरअसल, तिल की खेती वैसे तो खरीफ सीजन में की जाती है. लेकिन सिंचित क्षेत्रों में किसान इसकी खेती जायद सीजन यानी मार्च के आखिरी सप्ताह तक कर सकते हैं. यह किसानों के लिए फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इसकी खेती में लागत कम आती है और कम लागत में भी यह अच्छी पैदावार देती है. ऐसे में अगर आप भी इस महीने तिल की खेती करना चाहते हैं तो इसकी GT-6 किस्म बेस्ट है. आइए जानते हैं उस उन्नत किस्म के कहां से ले सकते हैं बीज और क्या है उसकी खासियत.
किसान नकदी फसलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन तिल की GT-6 यानी गुजरात तिल-6 किस्म का बीज बेच रहा है. इस बीज को आप एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद कर बंपर कमाई कर सकते हैं. साथ ही इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर भी मंगवा सकते हैं.
ये तिल की एक खास वैरायटी है. गुजरात तिल-6 किस्म जिसे GT-6 Sesame भी कहा जाता है. यह तिल की एक सफेद किस्म है, जो खरीफ सीजन में सिंचित पारिस्थिति के लिए उपयुक्त है. ये किस्म अपनी गुणवत्ता और जल्दी पकने के लिए जानी जाती है. ये किस्म लगभग 85 से 90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जो इसे खरीफ और गर्मी के मौसम दोनों के लिए उपयुक्त बनाती है. साथ ही इसमें तेल की मात्रा अधिक होती है. यह किस्म कुछ हद तक बीमारियों और कीटों के प्रति मध्यम सहनशीलता रखती है.
अगर आप भी तिल की गुजरात तिल-6 किस्म की खेती करना चाहते हैं तो इस किस्म के बीज का दो किलो का पैकेट फिलहाल 5 फीसदी की छूट के साथ 570 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा. इसे खरीद कर आप आसानी से तिल की खेती कर सकते हैं.
तिल की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली चिकनी मिट्टी बेस्ट होती है. वहीं, तिल की खेती में पानी की कम जरूरत पड़ती ही है. साथ ही इससे पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध हो जाता है. तिल की खेती के लिए खेत की तैयारी करते समय किसान इस बात का ध्यान रखें कि खेत में खरपतवार ना हो. खरपतवार पूरी तरह से निकालने के बाद खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें. इसके बाद तीन जुताई कल्टीवेटर या देसी हल से करके खेत की मिट्टी को भुरभुरा बना लें. वहीं, 80 से 100 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद को आखिरी जुताई में मिला दें. इससे बुवाई और मिट्टी अच्छी रहेगी.