
छत्तीसगढ़ में इस साल खरीफ सीजन की खेती जोरों पर है.राज्य में 9 सितंबर तक की स्थिति के अनुसार, प्रदेश में तय लक्ष्य का 98 प्रतिशत बोनी का काम पूरा हो चुका है. राज्य में इस सीजन के लिए 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले अब तक 47.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी फसलों की बोनी हो चुकी है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अधिकारियों को किसानों को आसानी से खाद-बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही खाद-बीज बंटवारे में लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. कृषि मंत्री रामविचार नेताम की निगरानी में पूरे प्रदेश में खाद-बीज भंडारण और वितरण पर नजर रखी जा रही है.
इस सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक बांटने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले 17.15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया गया है — यानी लक्ष्य से भी ज्यादा.अब तक किसानों को 12.71 लाख मीट्रिक टन खाद बांटी जा चुकी है, जो कुल लक्ष्य का 74 प्रतिशत है.
बीज की बात करें तो 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज बांटने का लक्ष्य था, जिसके मुकाबले 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण किया गया और अब तक 4.71 लाख क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाया जा चुका है, जो मांग का 93 प्रतिशत है.
8 सितंबर तक प्रदेश में औसतन 927.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि राज्य की सालाना औसत बारिश 1246.3 मिमी है. यह पिछले 10 सालों की औसत बारिश से करीब 12.6 मिमी ज्यादा है. पिछले साल इसी समय तक 960.9 मिमी बारिश हुई थी.
किसानों को मिला करोड़ों का कर्ज
राज्य सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों को कम ब्याज पर कर्ज भी उपलब्ध करा रही है. 7 सितंबर तक किसानों को 7996.96 करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण दिया जा चुका है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 6636.56 करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया था. इस साल सरकार ने कुल 8800 करोड़ रुपये कर्ज बांटने का लक्ष्य रखा है.
छत्तीसगढ़ में खरीफ बोनी का काम अब लगभग पूरा हो चुका है. ऐसे में आने वाले दिनों में किसानों के लिए खाद की उपलब्धता के साथ-साथ फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन, सिंचाई, मौसम और फसल की बढ़वार महत्वपूर्ण होगी.
सरकार की ओर से खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कृषि ऋण उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच अब किसानों की नजर फसल उत्पादन और मौसम की स्थिति पर है.अगर आगे मौसम अनुकूल रहा तो खरीफ सीजन में अच्छी पैदावार की उम्मीद की जा सकती है.