किसानों की शिकायत के बाद एक्‍शन मेें बिहार सरकार, खाद की बं‍डलिंग पर कंपनियों-दुकानदारों को दी कड़ी चेतावनी

किसानों की शिकायत के बाद एक्‍शन मेें बिहार सरकार, खाद की बं‍डलिंग पर कंपनियों-दुकानदारों को दी कड़ी चेतावनी

बिहार में उर्वरक के साथ जबरन बंडलिंग पर सरकार ने सख्ती दिखाई है. किसानों की शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने बड़ा आदेश जारी किया है. उर्वरक कंपनियों और विक्रेताओं पर कार्रवाई के सख्‍त निर्देश जारी किए गए हैं.

fertilizer Bundling Sale Action Warningfertilizer Bundling Sale Action Warning
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna ,
  • Jan 24, 2026,
  • Updated Jan 24, 2026, 1:42 PM IST

पटना में खाद वितरण व्यवस्था में गड़‍बड़ी पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिहार सरकार के कृषि विभाग ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है. राज्‍य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने साफ किया है कि सब्सिडी पर मिलने वाली खादों के साथ किसी भी प्रकार के अन्य उत्पाद की बंडलिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है. यह फैसला पूरे बिहार से किसानों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें कहा गया था कि खुदरा विक्रेता (दुकानदारों) उर्वरक देने के बदले अन्य उत्पाद जबरन खरीदने का दबाव बना रहे हैं.

जांच में सही निकली शिकायतें

कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को इस बंडलिंग के कारण निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत चुकानी पड़ रही थी, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा था. विभागीय स्तर पर कराई गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि उर्वरक कंपनियां खुदरा विक्रेताओं पर उर्वरकों के साथ अन्य उत्पाद जोड़कर बेचने का दबाव बना रही थीं. यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि किसानों के साथ अन्याय भी है. इसी को देखते हुए राज्य में लागू जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कृषि विभाग ने सब्सिडाइज्‍ड उर्वरकों के साथ किसी भी तरह की बंडलिंग पर पूर्ण रोक लगाने का आदेश जारी किया है.

इन उर्वरकों के साथ हो रही थी अवैध बंडलिंग

राम कृपाल यादव ने साफ शब्दों में कहा कि यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे अनुदानित उर्वरकों के साथ किसी भी अन्य उत्पाद की जबरन बिक्री पूरी तरह अवैध है. विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उर्वरक तय एमआरपी पर और बिना किसी अतिरिक्त बोझ के उपलब्ध हों. इस व्यवस्था में बाधा डालने वाली किसी भी कंपनी या विक्रेता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गड़बड़ी करने पर कंपनियों पर होगी कार्रवाई

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद कई उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियां खुदरा बिक्री केंद्रों तक उर्वरक समय पर और सही तरीके से नहीं पहुंचा रही हैं. भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी उर्वरक कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे उर्वरकों को फ्रेट ऑन रोड के आधार पर सीधे प्वाइंट ऑफ सेल तक पहुंचाएं, ताकि किसानों को एमआरपी पर उर्वरक मिल सके. परिवहन भाड़े की राशि या तो सीधे खुदरा विक्रेताओं के खाते में दी जानी चाहिए या थोक विक्रेताओं के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

सरकार कंपनियों से मांग सकती है जानकारी

मंत्री ने निर्देश दिया कि उर्वरक कंपनियां इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े प्रमाण, विशेष रूप से खुदरा विक्रेताओं के अकाउंट स्टेटमेंट, जुटाकर कर रखें. जरूरत पड़ने पर यह जानकारी विभागीय मुख्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगी. अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही, गड़बड़ी या किसानों से जुड़ी शिकायत सामने आती है तो संबंधित कंपनी, उसके अधिकारियों या थोक उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

कृषि मंत्री ने दोहराया कि बिहार सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उर्वरक वितरण प्रणाली को किसान-केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है. किसानों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के सख्त कदम उठाए जाएंगे.

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