
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) द्वारा आयोजित 'क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप' की बैठक के आधार पर किसानों के लिए अहम सुझाव दिए गए हैं. मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 09 से 15 जनवरी के बीच शुरुआती तीन दिनों में तापमान में वृद्धि होगी, लेकिन उसके बाद गिरावट आने की संभावना है. अगले दो सप्ताहों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा. हालांकि, कोहरे का घनत्व कम होगा, फिर भी उत्तरी तराई क्षेत्रों में घना कोहरा और अन्य भागों में मध्यम कोहरा छा सकता है. गिरता तापमान और कोहरा आलू जैसी फसलों में झुलसा रोग का खतरा बढ़ा सकता है, जबकि कम तापमान नए बागों और पशुओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
गेहूं की खेती के लिए वर्तमान में केवल अति-विलंब से बोई जाने वाली किस्मों (जैसे PBW-833, HD-3271, HI-1621, हलना आदि) का ही चयन करें और बुवाई हर हाल में 15 जनवरी तक पूर्ण कर लें. देरी से बुवाई की स्थिति में बीज की मात्रा सामान्य से 25% अधिक रखें. समय से बोई गई फसल में 20-25 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें. अगर जिंक की कमी के लक्षण दिखें, तो 5 किग्रा जिंक सल्फेट और 16 किग्रा यूरिया का 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. खरपतवार नियंत्रण में संकरी पत्ती के लिए पिनोक्साडेन और चौड़ी पत्ती के लिए मेटसल्फ्यूरॉन या 2-4D का प्रयोग बुवाई के 30-35 दिन बाद करें.
राई और सरसों में माहू (पेंटेड बग) के नियंत्रण के लिए ऑक्सीडेमेटॉन मिथाइल या डाईमेथोएट का छिड़काव करें. सफेद गेरूई रोग के लिए मेटालेक्जल और मेंकोजेब के मिश्रण का प्रयोग करें. दलहनी फसलों में, विशेषकर मटर में फूल आते समय सिंचाई अवश्य करें और बुकनी रोग (Powdery Mildew) से बचाव के लिए घुलनशील गंधक का प्रयोग करें. चने की फसल में फूल आने से पहले एक सिंचाई करें, लेकिन फूल आते समय सिंचाई बिल्कुल न करें. चने में कटुआ कीट दिखने पर खेत में 'बर्ड पर्चर' पक्षियों के बैठने का स्थान लगाएं और रासायनिक उपचार के लिए क्लोरपाईरीफास का छिड़काव करें.
आलू की फसल को पछेती झुलसा से बचाने के लिए मैन्कोजैब या कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें. यदि रोग लग चुका है, तो साईमोक्सेनिल+मेंकोजेब का 15-15 दिन के अंतराल पर प्रयोग करें. टमाटर और मिर्च को झुलसा से बचाने के लिए 0.2% मेंकोजेब का छिड़काव करें. बागवानी में, छोटे पौधों को ठंड से बचाने के लिए फूस या घास से ढकें (थैचिंग) और मिट्टी में नमी बनाए रखें. आम के बागों में अगेती बौर को झुलसा से बचाने के लिए मेंकोजेब+कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें और गुझिया कीट के नियंत्रण के लिए ट्री-बैंडिंग तकनीक अपनाएं.
पशुओं को शीतलहर से बचाने के लिए हवादार लेकिन सुरक्षित आवास में रखें और उन्हें संतुलित आहार के साथ नमक और गुड़ का घोल दें. 22 जनवरी 2026 से शुरू होने वाले राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत FMD का टीका अवश्य लगवाएं. मछली पालकों को सलाह है कि तापमान 15 डिग्री से नीचे जाने पर भोजन और खाद का प्रयोग बंद कर दें और संक्रमण से बचाव के लिए पोटेशियम परमैंगनेट या नमक का छिड़काव करें. अतिरिक्त आय के लिए किसान कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत पंजीकरण कराकर अपने खेतों में पौधारोपण को बढ़ावा दे सकते हैं.