
आलू हर घर की रसोई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. चाहे सब्जी बनानी हो, पराठा या पकौड़े, आलू हर जगह फिट बैठता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजकल बाजार में जो आलू बेचे जा रहे हैं, उनमें से कुछ केमिकल वाले आलू हैं, यानी एक तकीरे से नकली आलू हैं. जी हां, मौजूदा समय में मुनाफाखोरी के लिए कुछ व्यापारी आलुओं को केमिकल से पकाकर और रंग कर बेच रहे हैं, जो हमारी सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. अब बात आती है कि आखिर ऐसे आलुओं को कैसे पहचाना जाए? कैसे पता चले कि जो आलू आप खरीद कर ला रहे हैं, वो नेचुरल हैं या किसी केमिकल से पके हुए? घबराइए मत, आज हम आपको 5 घरेलू तरीके बताएंगे, जिसकी मदद से आप आसानी से पहचान लेंगे कि आलू असली है या नकली.
1. रंग देखकर करें पहचान: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने नकली आलू की पहचान करने के लिए एक सरल तरीका बताया है. अगर आप आलू को हाथ में लेकर उसे हल्का-सा मसलते हैं और वह रंग छोड़ने लगता है, तो यह नकली हो सकता है.
2. आलू को काटकर देखें: बाजार से आलू खरीद कर आने के बाद इस्तेमाल करने से पहले आलू को काटकर देखिए, अगर उसका रंग अंदर और बाहर एक जैसा है यानी हल्का पीला या क्रीमी है, तो समझिए वो असली और नैचुरल है, लेकिन अगर बाहरी छिलके का रंग अलग है और अंदर सफेद या थोड़ा भूरा है, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि ये केमिकल से पका हो सकता है.
3. स्मेल यानी सूंघ कर पहचानें: कई बार आलू की गंध से भी आप पहचान सकते हैं कि वो असली है या नहीं. इसके लिए एक आलू को हाथ में लेकर सूंघें, अगर उसमें से अजीब या तेज केमिकल जैसी बदबू आ रही है, तो वो आलू नेचुरल नहीं है. असली आलू में मिट्टी की हल्की खुशबू होती है, जो पहचानने में आसान होती है.
4. पानी में डालकर करें पहचान: एक गहरे बर्तन में पानी भरें और आलू को उसमें डाल दें. अगर आलू पानी में डूब जाए तो वो असली है, लेकिन अगर वो ऊपर तैरने लगे, तो ये इस बात का संकेत है कि उसमें केमिकल हो सकता है. असली आलू वजनदार होते हैं, जबकि केमिकल से पकाए गए आलू हल्के होते हैं.
5. छिलके से भी करें पहचान: असली आलू का छिलका पतला और आसानी से उतरने वाला होता है. वहीं, केमिकल वाले आलू का छिलका थोड़ा मोटा और सख्त होता है. आप इसे उंगलियों से हल्के से खुरचकर भी चेक कर सकते हैं, अगर छिलका जल्दी उतर जाए और मुलायम लगे तो आलू सही है.
FSSAI कहता है कि फल-सब्जी को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है. इस केमिकल को एसिटिलीन गैस या मसाला भी कहा जाता है. कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और फास्फोरस होते हैं, जो उल्टी, डायरिया, खूनी दस्ती, सीने में जलन, पेट में जलन, अधिक प्यास लगना या कमजोरी हो सकती है. इसलिए जांच करके ही सब्जियों और फलों को खाएं.
दरअसल, व्यापारी पुराने या खराब आलुओं को चमकदार बनाने के लिए अमोनिया, खतरनाक लाल रंग की डाई और कभी-कभी तेजाब (एसिड) जैसे रसायनों का उपयोग करते हैं. ये रसायन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं. भारत में खाद्य सुरक्षा नियामक, FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने ऐसे हानिकारक पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है और राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. बता दें कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ऐसे आलू जब्त किए गए हैं.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. केमिकल वाले आलू क्या होते हैं?
- केमिकल वाले आलू वे होते हैं जिनमें जल्दी पकाने, सफेद दिखाने या लंबे समय तक स्टोर करने के लिए ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है.
2. मिट्टी लगे आलू ज्यादा सुरक्षित क्यों माने जाते हैं?
- मिट्टी लगे आलू आमतौर पर ताजे और कम प्रोसेस किए हुए होते हैं, जिनमें केमिकल की संभावना कम रहती है.
3. असली और सुरक्षित आलू खरीदने का सही तरीका क्या है?
- स्थानीय मंडी से ताजे, कम चमक वाले, मिट्टी लगे आलू लें और इस्तेमाल से पहले अच्छे से धोकर कुछ देर पानी में भिगो दें.
4. केमिकल वाले आलू से कैसे बचें?
- जान पहचान वाली दुकान से ताजे आलू खरीदें. वहीं, इस्तेमाल से पहले अच्छे से धो लें और बहुत ज्यादा चमकदार आलू लेने से बचें.
5. आलू बहुत ज्यादा चमकदार दिखे तो क्या शक करना चाहिए?
- हां, जरूरत से ज्यादा चमकदार, एक जैसे आकार वाले और बिल्कुल चिकने आलू केमिकल वाले हो सकते हैं.
Disclaimer: प्रिय पाठक, इस खबर को पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.