
एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय हो रहा है जिसकी वजह से देश के कुछ हिस्सों में बारिश होने और बादल छाए रहने की आशंका है. दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है. ऐसे में वो किसान जिन्होंने आम की खेती की है, काफी परेशान हैं. अब कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें अपनी आम की फसल को बचाने के लिए खास एडवाइजरी जारी की है. दक्षिण गुजरात में केसर की खेती एक प्रमुख फसल है और बेमौसमी बारिश किसानों को नुकसान पहुंचा सकती है.
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दक्षिण गुजरात के कुछ जिलों में 21 जनवरी से 25 जनवरी तक बादल छाए रहने और हल्की बेमौसम बारिश की संभावना है. पूर्वानुमान को देखते हुए वलसाड के बागवानी उप निदेशक की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में आम किसानों को खास सलाह दी गई हैं. इससे आम की फसल में फूल आने के समय किसानों को नुकसान हो सकता है. आम के फूल आने का समय बहुत संवेदनशील होता है और इस दौरान अत्यधिक नमी और बारिश से फल लगने में कमी आ सकती है. साथ ही फफूंद रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है.
बेमौसम बारिश के कारण फूल और छोटी कलियां लंबे समय तक गीली रहती हैं. इससे वो झड़ जाती हैं, परागण की प्रक्रिया पर असर पड़ता है और फफूंदी और एन्थ्रेक्नोज जैसी बीमारियों के तेजी से फैलने की संभावना बढ़ जाती है. इसकी वजह से आम का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसी स्थिति में किसानों को बारिश शुरू होने से पहले या बारिश रुकने के 24 घंटे के अंदर फफूंदनाशक का छिड़काव करने की सलाह विशेषज्ञों ने दी है. इसके लिए, कार्बेन्डाजिम, हेक्साकोनाजोल या वेटेबल सल्फर में से किसी एक दवा का छिड़काव बीमारियों को नियंत्रित कर सकता है.
बारिश से पहले फूलों को मुरझाने या गिरने से बचाने के लिए बोरॉन (0.5 फीसदी) और जिंक (0.5 फीसदी) जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का छिड़काव करने से फूल मजबूत होते हैं. खेत में जलभराव रोकने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है. वहीं, बागवानी विभाग ने किसानों से दोपहर की तेज गर्मी में छिड़काव से बचने, बारिश के पूर्वानुमान के अनुसार योजना बनाने और दवा का सही मात्रा में प्रयोग करने की अपील की है. समय पर सही उपाय करने से बेमौसम बारिश से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
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