पानी की कमी से निपटने की तैयारी, लातूर के 173 गांवों के लिए प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम

पानी की कमी से निपटने की तैयारी, लातूर के 173 गांवों के लिए प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम

महाराष्ट्र के लातूर जिले में पानी की कमी दूर करने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. जिले के 173 गांवों और बस्तियों में पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 256 निजी कुओं और बोरवेल को नियंत्रण में लिया गया है. औसा, निलंगा और अहमदपुर सहित 10 तहसीलों में यह व्यवस्था की गई है.

पानी की किल्लत से निपटने के लिए लातूर प्रशासन अलर्टपानी की किल्लत से निपटने के लिए लातूर प्रशासन अलर्ट
क‍िसान तक
  • Latur,
  • Oct 22, 2026,
  • Updated Oct 22, 2026, 10:53 AM IST

महाराष्ट्र के लातूर जिले में ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की कमी को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. प्रशासन ने 173 गांवों और छोटी बस्तियों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए 256 निजी कुओं और बोरवेल को अपने नियंत्रण में लिया है. इन जल स्रोतों की मदद से लोगों तक पीने का पानी पहुंचाया जा रहा है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को पानी की परेशानी से बचाना और उन्हें जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराना है.

173 गांवों और बस्तियों में पानी पहुंचाने की तैयारी

लातूर जिले के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को पीने के पानी की जरूरत पूरी करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में जिला प्रशासन ने पहले से तैयारी करते हुए निजी कुओं और बोरवेल का सहारा लिया है. प्रशासन ने कुल 256 जल स्रोतों को अपने नियंत्रण में लिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल लोगों को पानी देने के लिए किया जा सके. इस व्यवस्था के तहत जिले के 173 गांवों और छोटी बस्तियों को शामिल किया गया है. इन इलाकों में रहने वाले लोगों को पीने के पानी की सुविधा देना प्रशासन की प्राथमिकता है. निजी जल स्रोतों का इस्तेमाल करके उन जगहों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जहां लोगों को पानी मिलने में दिक्कत हो सकती है.

लातूर की 10 तहसीलों में लिया गया फैसला

जिला प्रशासन ने यह कदम लातूर की 10 तहसीलों में उठाया है. अलग-अलग इलाकों में पानी की जरूरत को देखते हुए निजी कुओं और बोरवेल को अपने नियंत्रण में लिया गया है. इससे प्रशासन को उन गांवों में पानी पहुंचाने में मदद मिल रही है, जहां पीने के पानी की समस्या सामने आ सकती है. प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, औसा तहसील में सबसे ज्यादा 51 कुओं और बोरवेल को अपने नियंत्रण में लिया गया है. इसके अलावा निलंगा तहसील में 45 और अहमदपुर तहसील में 41 जल स्रोतों को शामिल किया गया है. इन तीनों तहसीलों में बड़ी संख्या में निजी जल स्रोतों का इस्तेमाल पानी की जरूरत पूरी करने के लिए किया जा रहा है.

औसा, निलंगा और अहमदपुर में खास इंतजाम

पानी की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए औसा, निलंगा और अहमदपुर में विशेष ध्यान दिया गया है. औसा में 51 जल स्रोतों को अपने नियंत्रण में लेकर लोगों तक पानी पहुंचाने की तैयारी की गई है. वहीं, निलंगा में 45 और अहमदपुर में 41 कुओं और बोरवेल का सहारा लिया गया है. इन जल स्रोतों की मदद से संबंधित गांवों और बस्तियों में पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की कमी का सामना न करना पड़े. हालांकि, इन जल स्रोतों से हर गांव को कितना पानी मिल रहा है, इसकी अलग-अलग जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है.

पानी की कमी से निपटने के लिए प्रशासन की पहल

ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की कमी होने पर सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को होती है. घरों में खाना बनाने, पीने और दूसरे जरूरी कामों के लिए पानी की जरूरत होती है. ऐसे में पानी की आपूर्ति में रुकावट आने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है. इसी परेशानी को कम करने के लिए लातूर जिला प्रशासन ने निजी कुओं और बोरवेल का इस्तेमाल करने का फैसला किया है. जरूरत के समय इन जल स्रोतों से पानी लेकर प्रभावित गांवों तक पहुंचाया जा सकता है. इससे उन बस्तियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां पानी की उपलब्धता कम है.

ग्रामीण लोगों को राहत देने की कोशिश

लातूर जिला प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए की गई है. 173 गांवों और बस्तियों के लिए 256 निजी कुओं और बोरवेल को अपने नियंत्रण में लेना इसी दिशा में उठाया गया कदम है. प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी को रोकना और जरूरतमंद लोगों तक पीने का पानी पहुंचाना है. अब इन जल स्रोतों की मदद से प्रभावित इलाकों में पानी की जरूरत पूरी करने पर ध्यान दिया जा रहा है. इस पहल से लातूर के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पीने के पानी की समस्या से राहत देने में मदद मिलने की उम्मीद है.

ये भी पढ़ें: 

सरकारी बीज की कालाबाजारी पकड़ने पहुंचे BJP विधायक, गोदाम प्रभारी को जड़े थप्पड़
महाराष्ट्र में सूखे से बेहाल किसान, रोहित पवार ने सरकार से मांगा 85 हजार करोड़ का राहत पैकेज

MORE NEWS

Read more!