
देश के लगभग हर हिस्से में किसान बैंगन की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं, बैंगन एक कॉमन सब्जी है, जिसे सभी लोग उगाना और खाना पसंद करते हैं. इस पौधे को बीज से उगाना तो बहुत आसान है, लेकिन देखभाल करना कुछ मुश्किल होता है, क्योंकि यह पौधा रोगों के प्रति अतिसंवेदनशील होता है, जिससे इसे लगाने से लेकर हार्वेस्टिंग तक कई कीट और रोगों का खतरा बना रहता है. यदि आप खेत, गार्डन या घर पर गमले में बैंगन का पौधा उगा रहे हैं, तो बैंगन की अच्छी पैदावार के लिए इसमें लगने वाले रोगों की रोकथाम और बचाव के उपाय अपनाने होंगे. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि बैंगन की फसल में कौन-कौन से मुख्य रोग और कीट लगते हैं, उनसे फसल को कैसे नुकसान होता है और किन आसान तरीकों से उनका बचाव और नियंत्रण किया जा सकता है.
बैंगन में पौधा गलन (जड़ गलन/डैम्पिंग ऑफ) रोग की पहचान मुख्य रूप से पत्तियों के मुरझाने, तने के पास भूरे/काले होकर गलने और पौधे के जमीन पर गिरने से होती है. बैंगन की पौधे के लिए ये एक गंभीर बीमारी है, यह फफूंद (जैसे Pythium, Rhizoctonia) के कारण होता है, जिसमें जड़ें भूरी और चिपचिपी हो जाती हैं और अंततः पूरा पौधा सूखकर मर जाता है.
बैंगन में पौधा गलन रोग से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीजों का सही तरीके से उपचार करना जरूरी है और रोग प्रतिरोधी किस्मों जैसे, पूसा पर्पल, क्लस्टर और कटराइन सैल 212-1 का चयन करें. फसल प्रबंधन के तहत भिंडी, टमाटर और आलू के बाद बैंगन की खेती नहीं करनी चाहिए, बल्कि फसल चक्र अपनाना चाहिए, ताकि रोग का फैलाव रोका जा सके. खेत में जलभराव न होने दें, क्योंकि अधिक नमी से फंगस तेजी से फैलती है और पौधे गलने लगते हैं. जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ खेत में छिड़काव करना लाभकारी होता है.
छोटी पत्ती रोग (Little Leaf) का प्रकोप बैगन की पत्तियों पर दिखाई देता है. इसमें पत्तियां काफी छोटी हो जाती हैं और पौधों की शाखाओं का विकास सही तरह से नहीं हो पाता है, जिससे पौधे झाड़ीनुमा हो जाते हैं और फूल-फल नहीं बन पाते हैं.
बैंगन में छोटी पत्ती रोग एक फाइटोप्लाज्मा जनित रोग है, जो पर्ण फुदका कीट द्वारा फैलता है. इसके बचाव के लिए, संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें. इसके अलावा नीम के तेल (5 ml/liter) का छिड़काव करें. साथ ही थियामेथॉक्सम 25% WG (8-10 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी) या इमिडाक्लोप्रिड 70% WG (6-7 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी) जैसे कीटनाशकों का प्रयोग करें, और फसल चक्र अपनाएं.
फल और तना छेदक कीट की वजह से बैगन के पेड़ का तना मुरझाकर लटक जाता है. साथ ही बाद में सूख भी जाता है. फल आने पर इल्लियां फलों में छेद बनाकर घुस जाती हैं और अंदर ही अंदर फल को खाकर उन्हें खराब कर देती हैं. उनके मल की वजह से ही फल में सड़न आ जाती है.
फल और तना छेदक कीट से बचाव लिए रोग से ग्रसित फलों को किसान तोड़कर नष्ट कर दें. ऐसे ही इल्लियों को भी इकट्ठा कर नष्ट कर दें. किसान कीटों का हमला होते ही ट्राइजोफॉस 40 ईसी 750 मिलीलीटर या क्वीनालफास 25 ईसी 1.5 लीटर की मात्रा लगभग 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़क दें.