
प्याज की खेती किसानों के लिए कम समय में तैयार होने वाली और अच्छी आमदनी देने वाली फसलों में शामिल है. इसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है, जिससे किसान सही किस्म और बेहतर खेती तकनीक अपनाकर अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं. इसी को देखते हुए बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय और कृषि विभाग ने किसानों को प्याज की दो उन्नत किस्मों भीमा शक्ति और NHRDF-4 की खेती करने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक यह किस्म बेहतर उत्पादन के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं इस किस्म की खासियत.
प्याज की भीमा शक्ति एक उन्नत किस्म है, जिसे प्याज और लहसुन अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DOGR) ने विकसित किया है. इस किस्म के प्याज गहरे लाल, चमकदार और गोल आकार के होते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी अच्छी भंडारण क्षमता है. इसकी पैदावार की बात करें तो रबी सीजन में प्रति हेक्टेयर करीब 41 से 42 टन तक उपज मिल सकती है. यह किस्म रोपाई के करीब 125 से 135 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके अलावा, ये किस्म थ्रिप्स कीट और पत्तियों से जुड़ी कुछ बीमारियों के प्रति सहनशीलता होती है. भीमा शक्ति किस्म को रबी और देर खरीफ, दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है.
प्याज की एनएचआरडीएफ रेड-4 (NHRDF Red-4) एक उन्नत किस्म है, जो अच्छी पैदावार, बेहतर क्वालिटी और भंडारण क्षमता के लिए जानी जाती है. इस किस्म की खेती से किसानों को प्रति हेक्टेयर औसतन 350 से 400 क्विंटल तक प्याज की उपज मिल सकती है. इसके प्याज गहरे लाल रंग के, गोल और आकार में अच्छे होते हैं. रोपाई के लगभग 110 से 120 दिनों में इसकी फसल तैयार हो जाती है. इस किस्म के प्याज की बाहरी परत मजबूत होती है, जिससे इन्हें सही परिस्थितियों में लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलती है. इसकी खेती मुख्य रूप से रबी सीजन में की जाती है. अच्छी उपज और भंडारण की क्षमता के कारण एनएचआरडीएफ रेड-4 किसानों के लिए प्याज की खेती का एक उपयोगी विकल्प हो सकती है.
प्याज की खेती से बेहतर कमाई के लिए केवल अधिक उत्पादन ही नहीं, बल्कि फसल को सुरक्षित रखना और बाजार के भाव पर नजर रखना भी जरूरी है. भीमा शक्ति और NHRDF-4 जैसी उन्नत किस्मों को अपनाकर किसान उत्पादन और भंडारण की संभावनाओं का लाभ उठा सकते हैं. कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को उन्नत किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि प्याज का उत्पादन बढ़े और किसानों की आमदनी में सुधार हो सके.
अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से किसान इन किस्मों की बुवाई कर सकते हैं. इस प्रक्रिया में प्याज की बुवाई करते समय क्यारी को ऐसी जगह पर बनाएं जहां पूरे दिन धूप रहे और देखभाल करना आसान हो. साथ ही क्यारी की लंबाई तीन मीटर, चौड़ाई एक मीटर और ऊंचाई 15 से 20 सेमी होनी चाहिए. इस विधि से खेती करने में बुवाई से पहले क्यारियों में 20 से 25 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद और 100 ग्राम प्रति क्यारी मिश्रित खाद का उपयोग करें. इसके बाद बीज की बुवाई करें.