
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत काम करने वाला सेंट्रल आइलैंड एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CIARI), अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह ने नारियल की पत्तियों से मिडरिब (पत्ती का बिचला शिरा) निकालने के लिए एक नया और उपयोगी औजार तैयार किया है. ‘लीफ सेपरेटर’ नाम का यह हैंड टूल श्रमिकों की मेहनत कम करने के साथ-साथ काम की गति और क्वालिटी दोनों में सुधार करता है.
संस्थान के अनुसार, यह औजार नारियल की पत्तियों से मिडरिब को आसानी और तेजी से अलग करने के लिए तैयार किया गया है. कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में मिडरिब का उपयोग झाड़ू, हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है. ऐसे में यह तकनीक ग्रामीण उद्यमियों और किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है.
आईसीएआर के बनाए इस उपकरण की लंबाई लगभग 20 सेंटीमीटर है, जिसमें 7 सेंटीमीटर का ब्लेड और 13 सेंटीमीटर का हैंडल लगाया गया है. इसकी मदद से एक व्यक्ति प्रति घंटे 500 मिडरिब अलग कर सकता है, जबकि पारंपरिक तरीके से यह संख्या लगभग 380 मिडरिब प्रति घंटे ही रहती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपकरण न केवल काम की गति बढ़ाता है बल्कि इससे मिलने वाले मिडरिब अधिक साफ और एक तरह की क्वालिटी के होते हैं. इससे आगे के प्रोसेसिंग और प्रोडक्ट बनाने के काम में भी आसानी होती है.
संस्थान ने बताया कि लीफ सेपरेटर का उपयोग करने पर श्रमिकों को कम शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है. पारंपरिक पद्धति की तुलना में यह औजार समय की बचत करता है और काम को अधिक सुविधाजनक बनाता है. इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होने के साथ मजदूरों की काम करने की क्षमता भी बेहतर होती है.
औजार के परीक्षण के दौरान पाया गया कि लीफ सेपरेटर से प्रति घंटे 500 मिडरिब अलग किए जा सकते हैं, जबकि पारंपरिक तकनीक से केवल 380 मिडरिब ही निकाले जा सके. इसके अलावा इस टूल से मिलने वाला मिडरिब अधिक साफ और एक तरह की क्वालिटी वाले पाए गए. वहीं पारंपरिक तरीके से मिले मिडरिब की सफाई कुछ कम रही.
इस इनोवेशन को पेटेंट (Intellectual Property) के तहत सुरक्षा भी मिली है. संस्थान के अनुसार, इसका पेटेंट आवेदन 5 सितंबर 2023 को दायर किया गया था और 30 अक्टूबर 2023 को पेटेंट मंजूर हो गया. इस तकनीक का पेटेंट नंबर 394477-001 है.
इस औजार को आई. जय शंकर, बी. ऑगस्टिन जेरार्ड, ई.बी. चाकुरकर और टी. सुब्रमणि ने तैयार किया है.
आईसीएआर ने इस तकनीक का व्यावसायीकरण भी शुरू कर दिया है. संस्थान ने 17 फरवरी 2025 को इस तकनीक को एम/एस जैसांकर इंडस्ट्रीज, पोर्ट ब्लेयर को ट्रांसफर किया. इसके लिए 95 हजार रुपये का समझौता किया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि लीफ सेपरेटर तकनीक नारियल उत्पादक क्षेत्रों में आय बढ़ाने में सहायक होगी. इससे मिडरिब आधारित उत्पादों की क्वालिटी बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और श्रमिकों की मेहनत कम होगी. ग्रामीण हस्तशिल्प और लघु उद्योगों को भी इस उपकरण से नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.