Business News: किसानों की कमाई बढ़ाएगी टेक्नोलॉजी, इस कंपनी के CEO ने बताया पूरा प्लान

Business News: किसानों की कमाई बढ़ाएगी टेक्नोलॉजी, इस कंपनी के CEO ने बताया पूरा प्लान

KhetiBuddy के CEO विनय नायर ने बताया कि कैसे AI और आधुनिक तकनीक किसानों की मदद कर सकती है. KhetiBuddy खेतों की जानकारी, मौसम, मिट्टी और फसल की गुणवत्ता के आधार पर किसानों को बेहतर सलाह देने का काम करती है. इससे कृषि कारोबार को फसल की सही कीमत तय करने और किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम दिलाने में मदद मिल सकती है.

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प्राची वत्स
  • Noida,
  • Oct 12, 2026,
  • Updated Oct 12, 2026, 1:30 PM IST

खेती में अच्छी फसल उगाने के लिए किसान दिन-रात मेहनत करते हैं. लेकिन कई बार सही मौसम की जानकारी नहीं मिलने, खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर पाने और फसल की अच्छी गुणवत्ता के बावजूद सही दाम नहीं मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में खेती को आसान बनाने और किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम दिलाने में टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभा सकती है. इसी दिशा में एग्रीटेक स्टार्टअप KhetiBuddy काम कर रहा है.

यह स्टार्टअप खेती से जुड़ी कंपनियों के साथ मिलकर किसानों के खेत, फसल की गुणवत्ता और उत्पादन से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करता है. इसका उद्देश्य इस जानकारी की मदद से खेती को बेहतर बनाना और किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य दिलाने में मदद करना है. किसान तक के खास कार्यक्रम 'दिल से किसान' में KhetiBuddy के फाउंडर और CEO विनय नायर ने बताया कि उनका स्टार्टअप कैसे काम करता है, खेती में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और किसानों को इससे क्या फायदा मिल सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि खेती में AI का इस्तेमाल करते समय कृषि विशेषज्ञों और किसानों के अनुभव को साथ लेकर चलना क्यों जरूरी है. 

KhetiBuddy क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

KhetiBuddy नाम खेती-बाड़ी शब्द से बना है. इस नाम के पीछे सोच यह है कि स्टार्टअप किसानों के दोस्त की तरह काम करे और उन्हें खेती में टेक्नोलॉजी की मदद दे. विनय नायर के मुताबिक, KhetiBuddy का मुख्य उद्देश्य खेती से जुड़ी कंपनियों और उनसे जुड़े किसानों को तकनीक की मदद से बेहतर तरीके से काम करने में सहायता देना है.

विनय नायर और उनकी पत्नी डॉ. ऋचा ने मिलकर इस स्टार्टअप की शुरुआत की. विनय का अनुभव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में है, जबकि उनकी पत्नी का संबंध कृषि विज्ञान से है. डॉ. ऋचा ने बायोकेमिस्ट्री में डॉक्टरेट की है और उनका कृषि से भी जुड़ा अनुभव रहा है. दोनों ने महसूस किया कि खेती में एक बड़ी कमी है. किसानों के पास खेती का अच्छा अनुभव और जानकारी है, लेकिन उन्हें नई तकनीक का पूरा फायदा नहीं मिल पाता. दूसरी ओर, कई टेक्नोलॉजी कंपनियां ऐसे समाधान बना रही हैं, जिनके पीछे खेतों में काम करने का पर्याप्त अनुभव नहीं होता.
इसी कमी को दूर करने के लिए KhetiBuddy ने कृषि और टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया. इसका मकसद ऐसी तकनीक तैयार करना है, जो केवल कागजों या कंप्यूटर तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए भी उपयोगी हो.

किसानों तक कैसे पहुंचती है KhetiBuddy की टेक्नोलॉजी?

आमतौर पर यह सवाल उठता है कि KhetiBuddy का इस्तेमाल कोई भी किसान सीधे कर सकता है या यह केवल कृषि से जुड़ी कंपनियों के लिए है. इस पर विनय नायर ने बताया कि शुरुआत में उनकी टीम ने सीधे किसानों के साथ काम किया था. उन्होंने एक फसल और एक क्षेत्र के करीब एक हजार किसानों के साथ काम करके यह समझने की कोशिश की कि किसानों को तकनीक का इस्तेमाल करने में किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

इसके बाद स्टार्टअप ने अपनी रणनीति में बदलाव किया. विनय के मुताबिक, अगर ज्यादा से ज्यादा किसानों तक एक साथ तकनीक पहुंचानी है, तो कृषि से जुड़ी कंपनियों के साथ काम करना बेहतर तरीका है. उनके अनुसार, एक कृषि व्यवसाय से आमतौर पर 10 हजार से 15 हजार किसान जुड़े हो सकते हैं. ऐसे में इन कंपनियों के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों तक पहुंचा जा सकता है.

KhetiBuddy सरकार, किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO और FPC, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि से जुड़ी निजी कंपनियों के साथ भी काम करती है. किसान इन संस्थाओं के माध्यम से इस तकनीक का फायदा उठा सकते हैं. कंपनी का मानना है कि समूह में किसानों के साथ काम करने से उनकी जरूरतों को समझना और एक साथ कई किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाना आसान होता है.

किसानों को फसल का सही दाम दिलाने में कैसे मदद करती है KhetiBuddy?

किसानों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है उनकी मेहनत के हिसाब से फसल का सही दाम नहीं मिलना. कई बार किसान अच्छी गुणवत्ता वाली फसल उगाते हैं, लेकिन उन्हें उसकी गुणवत्ता के आधार पर अतिरिक्त कीमत नहीं मिल पाती. इसकी एक वजह यह भी है कि खरीदारों के पास फसल की गुणवत्ता से जुड़ी सही जानकारी नहीं होती. विनय नायर ने बताया कि KhetiBuddy किसानों की फसल से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से दर्ज करने में मदद करती है. इसमें फसल की मात्रा के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता की जानकारी भी शामिल होती है. इससे कृषि व्यवसाय से जुड़ी कंपनियों को पता चल सकता है कि किस किसान ने कितनी फसल पैदा की और उसकी गुणवत्ता कैसी है.

उन्होंने अंगूर का उदाहरण देते हुए समझाया कि अंगूर की मिठास को मापने के लिए ब्रिक्स लेवल का इस्तेमाल किया जाता है. अंगूर से बनने वाली वाइन की गुणवत्ता में यह स्तर अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में अगर कंपनी को पता हो कि किसी किसान के अंगूर की गुणवत्ता कैसी है, तो वह उसके आधार पर किसान को प्रोत्साहन राशि या बेहतर कीमत देने का फैसला कर सकती है. इसी तरह गन्ने में सुक्रोज यानी चीनी की मात्रा और हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा भी उसकी गुणवत्ता को समझने में मदद करती है. KhetiBuddy का प्रयास है कि इस तरह की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो, ताकि कृषि कंपनियां किसानों की फसल की गुणवत्ता के आधार पर बेहतर कीमत देने पर विचार कर सकें.

विनय के मुताबिक, जब किसान की फसल से जुड़ा सही डेटा उपलब्ध होता है, तो कंपनियों को यह समझने में भी मदद मिलती है कि आगे कितनी फसल की जरूरत होगी और किस गुणवत्ता के उत्पाद की मांग है. इससे किसान को भी यह जानने में मदद मिल सकती है कि बाजार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग या निर्यात के लिए किस तरह की फसल उगाने पर ध्यान देना चाहिए.

क्या खेती में AI ही किसानों की हर समस्या का समाधान है?

आज खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसान अपनी हर समस्या का समाधान AI से पा सकते हैं या उन्हें कृषि विशेषज्ञों की मदद भी लेनी होगी.

इस सवाल पर विनय नायर ने साफ कहा कि AI अकेले सब कुछ नहीं कर सकता. उनके मुताबिक, AI को सही तरीके से काम करने के लिए खेतों से जुड़ी वास्तविक जानकारी की जरूरत होती है. इसमें मौसम, सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरें, मिट्टी की जांच और खेत में होने वाली गतिविधियों से जुड़ा डेटा शामिल हो सकता है.

KhetiBuddy के काम करने का तरीका यह है कि पहले खेत और फसल से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की जाती है. इसके बाद AI की मदद से उस जानकारी को समझने और समस्या का शुरुआती समाधान खोजने का प्रयास किया जाता है. जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों की मदद ली जाती है, ताकि किसान को सही सलाह मिल सके.

विनय ने बताया कि जब किसी खेत में कोई समस्या आती है और उसका समाधान किया जाता है, तो उससे जुड़ी जानकारी भविष्य में भी काम आ सकती है. AI इस जानकारी से सीखकर ऐसी ही स्थिति दोबारा आने पर पहले से चेतावनी देने में मदद कर सकता है. इससे किसान को समय रहते जरूरी कदम उठाने का मौका मिल सकता है.

हालांकि, हर नई समस्या का समाधान केवल पुरानी जानकारी से नहीं निकाला जा सकता. कई बार विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है. इसलिए KhetiBuddy AI और इंसानी अनुभव को साथ लेकर चलने पर जोर देती है.

मौसम की जानकारी को खेती के काम में कैसे लाया जा सकता है?

खेती में मौसम की अहम भूमिका होती है. बारिश कब होगी, कितनी होगी और तापमान में क्या बदलाव आएगा, इसका असर फसल पर पड़ता है. आज मौसम की जानकारी पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से किसानों तक पहुंच रही है, लेकिन केवल मौसम का पूर्वानुमान जान लेना ही काफी नहीं है. किसान के लिए यह समझना भी जरूरी है कि उस जानकारी के आधार पर खेत में क्या करना चाहिए.

विनय नायर ने बताया कि KhetiBuddy मौसम, सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों और मिट्टी से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल करके किसानों तक उपयोगी सलाह पहुंचाने पर काम करती है. इसका उद्देश्य किसानों को केवल यह बताना नहीं है कि बारिश होने वाली है, बल्कि यह समझने में मदद करना भी है कि आने वाले मौसम के हिसाब से खेती में क्या कदम उठाए जा सकते हैं.

उदाहरण के लिए, अगर अगले कुछ दिनों में भारी बारिश होने की संभावना है, तो किसान को अपनी फसल और खेत की स्थिति के अनुसार तैयारी करने की जरूरत हो सकती है. इसी तरह, बारिश कम होने की स्थिति में पानी के इस्तेमाल और सिंचाई की योजना पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है.

इस तरह मौसम से जुड़े आंकड़ों को खेती के काम की जानकारी में बदलना अहम है. विनय के मुताबिक, KhetiBuddy इसी दिशा में काम कर रही है, ताकि किसानों को सही समय पर ऐसी जानकारी मिल सके, जिसका वे अपने खेतों में इस्तेमाल कर सकें.

KhetiBuddy किसानों को कैसे दिलाना चाहती है बेहतर मुनाफा?

किसान केवल अच्छी फसल उगाना ही नहीं चाहता, बल्कि वह यह भी चाहता है कि उसकी मेहनत के बदले उसे अच्छा पैसा मिले. विनय नायर के मुताबिक, KhetiBuddy का ध्यान दो अहम बातों पर है. पहली, किसान बेहतर तरीके से खेती कर सके और दूसरी, उसकी फसल को अच्छा दाम मिल सके. इसके लिए कंपनी फसल की मात्रा और गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी पर काम करती है. साथ ही, फसल उगाने के दौरान किन चीजों का इस्तेमाल किया गया और कब किया गया, इसकी जानकारी को भी दर्ज करने पर जोर दिया जाता है. इस प्रक्रिया को ट्रेसबिलिटी कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि फसल कहां और किस तरीके से उगाई गई है.

यह जानकारी कृषि व्यवसाय से जुड़ी कंपनियों के लिए उपयोगी हो सकती है, क्योंकि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से फसल खरीदने और उसकी गुणवत्ता समझने में मदद मिलती है. अगर किसान की फसल की गुणवत्ता का सही रिकॉर्ड उपलब्ध हो, तो कंपनी उसके आधार पर कीमत और प्रोत्साहन देने का फैसला कर सकती है. इसके अलावा, फसल की जानकारी से आगे की योजना बनाने में भी मदद मिल सकती है. इससे किसानों और कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की संभावना बढ़ती है.

क्या किसान सीधे KhetiBuddy से जुड़ सकते हैं?

इस सवाल पर विनय नायर ने बताया कि KhetiBuddy का काम कई संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचता है. इनमें सरकारी विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, किसान उत्पादक संगठन और निजी कृषि कंपनियां शामिल हैं. इन संस्थाओं के अपने अलग-अलग उद्देश्य होते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी और प्रशिक्षण देने का काम करते हैं. वहीं, सरकारी संस्थाएं खेती के अलग-अलग तरीकों को बढ़ावा दे सकती हैं. निजी कृषि कंपनियां अपनी जरूरतों के अनुसार किसानों के साथ काम करती हैं.

KhetiBuddy इन संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों तक तकनीक पहुंचाने का प्रयास करती है. इसलिए किसान KhetiBuddy की सेवाओं का लाभ लेने के लिए अपने क्षेत्र में इससे जुड़ी संस्था या कृषि व्यवसाय के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. विनय के अनुसार, कंपनी ने शुरुआत में सीधे किसानों के साथ काम किया था, लेकिन बाद में उसे समझ आया कि ज्यादा किसानों तक पहुंचने के लिए संस्थाओं के साथ मिलकर काम करना अधिक प्रभावी हो सकता है.

भारत के अलावा किन देशों में काम कर रही है KhetiBuddy?

KhetiBuddy का काम केवल भारत तक सीमित नहीं है. विनय नायर ने बताया कि कंपनी पुणे में स्थित है और कनाडा में भी इसकी मौजूदगी है. इसके अलावा, कंपनी अफ्रीका की कई कंपनियों के साथ भी काम कर रही है. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार के साथ काम करने के अलावा दूसरे राज्यों की सरकारों के साथ भी बातचीत चल रही है. विनय के मुताबिक, भारत और अफ्रीका के कृषि क्षेत्र में कुछ समानताएं हैं. दोनों जगह छोटे किसान बड़ी संख्या में हैं. ऐसे में भारत में खेती से जुड़ी तकनीक पर काम करने से मिले अनुभव का इस्तेमाल दूसरे देशों में भी किया जा सकता है. हालांकि, हर देश में खेती का तरीका एक जैसा नहीं होता. विनय ने भारत और कनाडा के उदाहरण से समझाया कि दोनों देशों में खेतों का आकार और खेती करने के तरीके अलग हैं.

भारत में कई किसानों के पास कम जमीन होती है, जबकि कनाडा और अमेरिका में बड़े खेतों पर खेती की जाती है. वहां मजदूरों की उपलब्धता कम होने के कारण मशीनों का इस्तेमाल ज्यादा होता है. कई जगह ट्रैक्टर और दूसरी मशीनों से मिलने वाला डेटा सीधे मोबाइल ऐप पर पहुंच जाता है.

इस वजह से अलग-अलग देशों में KhetiBuddy को अपने प्लेटफॉर्म में जरूरत के अनुसार बदलाव करने पड़ते हैं. साथ ही, दूसरे देशों में इस्तेमाल होने वाले खेती के तरीकों से उपयोगी जानकारी लेकर भारतीय किसानों तक पहुंचाने की भी संभावना रहती है.

क्या AI किसानों की जगह ले सकता है?

खेती में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह चिंता भी सामने आती है कि क्या भविष्य में किसान और कृषि विशेषज्ञों की भूमिका कम हो जाएगी. इस सवाल पर विनय नायर ने कहा कि वह टेक्नोलॉजी को इंसानों की जगह लेने के बजाय उनकी मदद करने का माध्यम मानते हैं. उनके मुताबिक, AI और इंसानी अनुभव दोनों की अपनी अहमियत है. किसान कई सालों के अनुभव से मौसम, मिट्टी और फसल की जरूरतों को समझता है. यह अनुभव खेती के लिए बेहद जरूरी है. वहीं, टेक्नोलॉजी इस जानकारी को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और उसे व्यवस्थित करने में मदद कर सकती है.

विनय ने कहा कि किसी भी तकनीक पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए. AI से मिली जानकारी को समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है. खासकर खेती जैसे क्षेत्र में गलत सलाह से फसल को नुकसान हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि आज गांवों में किसान मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसलिए चुनौती केवल तकनीक तक पहुंच बनाने की नहीं, बल्कि किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने की है. AI इस प्रक्रिया को तेज कर सकता है और एक किसान के अनुभव से मिली सीख को दूसरे किसानों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है.

KhetiBuddy का भविष्य को लेकर क्या है प्लान?

KhetiBuddy के भविष्य की योजना पर बात करते हुए विनय नायर ने कहा कि कंपनी का मुख्य ध्यान खेतों से जुड़े डेटा को बेहतर तरीके से इकट्ठा करने और उसे कृषि से जुड़ी कंपनियों की काम करने की प्रक्रिया से जोड़ने पर है. उनके मुताबिक, जब तक खेत और फसल से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध नहीं होगी, तब तक खेती से लेकर फैक्ट्री तक की पूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाना मुश्किल होगा. इसलिए कंपनी खेतों से मिलने वाली जानकारी को सप्लाई चेन, खरीद प्रक्रिया और कंपनियों के मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने पर काम कर रही है.

इससे कंपनियों को किसानों की मेहनत और फसल की गुणवत्ता को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है. वहीं, किसानों को बेहतर खेती करने और अपनी फसल के लिए सही कीमत पाने के अवसर मिल सकते हैं. विनय ने बताया कि कंपनी अब तक करीब ढाई लाख एकड़ क्षेत्र में किसानों के साथ काम कर चुकी है. आगे भी कंपनी भारत और दूसरे देशों में अपने काम को बढ़ाना चाहती है. उसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा किसानों तक तकनीक पहुंचाना और खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान में मदद करना है.

खेती में तकनीक का असली फायदा किसानों तक पहुंचना जरूरी

KhetiBuddy के CEO विनय नायर के साथ बातचीत से यह बात सामने आती है कि खेती में केवल नई तकनीक लाना ही काफी नहीं है. उसका सही इस्तेमाल और उससे मिलने वाली जानकारी को किसानों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है. AI, मौसम की जानकारी, सैटेलाइट तस्वीरों और फसल से जुड़े डेटा की मदद से खेती की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है. लेकिन इसके साथ किसानों के अनुभव और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को भी महत्व देना होगा.

आखिरकार, खेती में टेक्नोलॉजी का उद्देश्य किसानों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी मेहनत को आसान बनाना, फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद करना और उन्हें उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के रास्ते तलाशना होना चाहिए.

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