धान की पारंपरिक खेती छोड़ ग्राफ्टेड टमाटर की खेती अपनाई, भारती बंसल ने 0.40 हेक्टेयर में कमाए ₹1.37 लाख का मुनाफा

धान की पारंपरिक खेती छोड़ ग्राफ्टेड टमाटर की खेती अपनाई, भारती बंसल ने 0.40 हेक्टेयर में कमाए ₹1.37 लाख का मुनाफा

महासमुंद की भारती बंसल ने धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ग्राफ्टेड टमाटर को अपनाकर यह साबित किया है कि खेती में बदलाव, तकनीक का इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान कम क्षेत्र में भी बेहतर आर्थिक परिणाम हासिल कर सकते हैं.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Aug 15, 2026,
  • Updated Aug 15, 2026, 7:54 PM IST

महासमुंद जिले के ग्राम गोंडपाली की महिला कृषक  भारती बंसल ने पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर आधुनिक उद्यानिकी तकनीक को अपनाते हुए अपनी कृषि आय बढ़ाने की मिसाल पेश की है. स्नातक शिक्षित भारती बंसल ने वर्ष 2025-26 से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती शुरू की और ड्रिप सिंचाई व मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से बेहतर उत्पादन हासिल किया. महज 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में उन्होंने करीब 106 क्विंटल टमाटर का उत्पादन किया और सभी खर्चों को घटाने के बाद लगभग 1 लाख 37 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया.

धान की खेती में कम आमदनी के बाद बदला खेती का तरीका

भारती बंसल के पास कुल 0.40 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है. पहले वे इस भूमि पर पारंपरिक तरीके से धान की खेती करती थीं.हालांकि, धान की खेती में अपेक्षाकृत कम उत्पादन और अधिक लागत के कारण उन्हें उम्मीद के अनुरूप आमदनी नहीं हो पा रही थी.

खेती में नई संभावनाओं और उद्यानिकी फसलों से होने वाली बेहतर आय को देखते हुए उन्होंने पारंपरिक फसल प्रणाली में बदलाव करने का निर्णय लिया. इसी क्रम में उन्होंने धान के स्थान पर ग्राफ्टेड टमाटर की खेती को अपनाया.आधुनिक तकनीक से टमाटर उत्पादन का प्रयोग उनके लिए लाभदायक साबित हुआ और इससे उनकी कृषि आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई.

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिला आर्थिक सहयोग

ग्राफ्टेड टमाटर की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यानिकी विभाग, महासमुंद द्वारा उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया गया. साथ ही राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) वर्ष 2025-26 के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैंगन-टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत उन्हें खेती के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया गया.

इस आर्थिक सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से भारती को नई तकनीक के साथ टमाटर की खेती शुरू करने में मदद मिली.उन्होंने फसल उत्पादन के दौरान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए खेती को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया.

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से फसल प्रबंधन हुआ आसान

भारती बंसल ने ग्राफ्टेड टमाटर की खेती में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया.ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों को आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराया गया, जिससे सिंचाई व्यवस्था अधिक प्रभावी हुई.वहीं मल्चिंग के इस्तेमाल से खेत में नमी बनाए रखने और फसल प्रबंधन में सुविधा मिली.

आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से खेती में पानी और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हुआ.इससे फसल की देखभाल भी आसान हुई और टमाटर की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिली.

106 क्विंटल टमाटर का उत्पादन

आधुनिक तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन का परिणाम उत्पादन में भी देखने को मिला. भारती बंसल ने अपनी 0.40 हेक्टेयर भूमि से लगभग 106 क्विंटल टमाटर का उत्पादन प्राप्त किया.

उत्पादन के दौरान टमाटर का औसत बिक्री मूल्य करीब 20 रुपये प्रति किलोग्राम रहा.इस हिसाब से उत्पाद की बिक्री से उन्हें अच्छी सकल आय प्राप्त हुई. फसल उत्पादन में करीब 75 हजार रुपये की लागत आई.सभी खर्चों को घटाने के बाद उन्हें लगभग 1 लाख 37 हजार रुपये का कुल लाभ प्राप्त हुआ.

आधुनिक उद्यानिकी खेती बनी आय बढ़ाने का जरिया

भारती बंसल की सफलता यह बताती है कि छोटे और सीमित क्षेत्र में भी यदि फसल का सही चयन किया जाए और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए तो कृषि से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है.पारंपरिक धान की खेती की तुलना में ग्राफ्टेड टमाटर की खेती ने उनके लिए आय का नया रास्ता खोला है.

उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती करने के बाद उन्हें उत्पादन और आमदनी दोनों के स्तर पर बेहतर परिणाम मिले हैं. वे टमाटर की खेती से प्राप्त आय से संतुष्ट हैं और इसे कृषि में नई संभावनाओं के रूप में देखती हैं.

दूसरी महिला किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

 भारती बंसल की कहानी यह भी दर्शाती है कि फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. विशेष रूप से महिला किसान यदि पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं तो वे अपनी कृषि आय को बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ सकती हैं.

 

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