सौर सुजला योजना से बदली वनांचल की तस्वीर, 4722 किसानों के खेतों में पहुंची हरित क्रांति

सौर सुजला योजना से बदली वनांचल की तस्वीर, 4722 किसानों के खेतों में पहुंची हरित क्रांति

छत्तीसगढ़ की ‘सौर सुजला योजना’ ने नारायणपुर के वनांचल किसानों की खेती की तस्वीर बदल दी है.9 वर्षों में 4,722 से अधिक किसानों के खेतों में सोलर सिंचाई पंप लगाए गए हैं. अब किसान धान के साथ साग-सब्जियों और नकदी फसलों की खेती कर साल में एक से अधिक फसल ले रहे हैं.

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सौर सुजला योजना से बदली वनांचल की तस्वीर, 4722 किसानों के खेतों में पहुंची हरित क्रांति

छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में जहां बिजली और सिंचाई की सुविधा लंबे समय तक किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही, वहां अब सौर ऊर्जा खेती की तस्वीर बदल रही है.नारायणपुर जिले में क्रेडा (CREDA) द्वारा संचालित ‘सौर सुजला योजना’ वन अधिकार पट्टाधारी किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है.योजना के तहत किसानों को रियायती दरों पर सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे विद्युत कटौती और बिजली बिल की चिंता से राहत मिली है.

बिजली की समस्या से मिली राहत, खेतों तक पहुंचा पानी

नारायणपुर की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ इलाकों में विद्युत कनेक्शन पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है. ऐसे क्षेत्रों में सौर सुजला योजना किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है. योजना के तहत 2 एचपी, 3 एचपी और 5 एचपी क्षमता के सोलर सिंचाई पंप लगाए गए हैं. सौर ऊर्जा से संचालित इन पंपों के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पारंपरिक बिजली व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है. सौर ऊर्जा उपलब्ध होने के दौरान किसान अपने खेतों में पानी पहुंचा पा रहे हैं और बिजली कटौती तथा नियमित बिजली बिल की परेशानी से भी राहत मिल रही है.

मानसून पर निर्भर खेती से सालभर की खेती की ओर बढ़े किसान

सोलर पंपों की सुविधा मिलने से पहले वनांचल के कई किसान मुख्य रूप से मानसून आधारित पारंपरिक धान की खेती करते थे. बारिश के सीमित मौसम के कारण खेती का दायरा भी सीमित रहता था.अब सिंचाई की सुविधा मिलने से किसानों के लिए फसल विविधीकरण के नए रास्ते खुले हैं. किसान धान के अलावा साग-सब्जियों और विभिन्न नकदी फसलों की खेती करने लगे हैं. खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से एक साल में एक से अधिक फसल लेने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं. इससे न केवल खेती का रकबा अधिक उपयोगी हुआ है, बल्कि किसानों की आय के स्रोत भी बढ़े हैं.

9 वर्षों में 4,722 से अधिक खेतों तक पहुंची सौर सिंचाई

क्रेडा के प्रयासों से नारायणपुर जिले में पिछले 9 वर्षों के दौरान 4,722 से अधिक किसानों के खेतों में सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए जा चुके हैं. इन पंपों ने जिले के ऐसे इलाकों में सिंचाई की सुविधा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां पारंपरिक बिजली व्यवस्था के जरिए सिंचाई करना मुश्किल था. सौर पंपों के विस्तार से जिले के सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई है और किसानों को खेती के लिए उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला है. इसका असर स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है.

सब्जी और नकदी फसलों से बढ़ रही कमाई

सिंचाई की सुविधा ने किसानों को पारंपरिक धान की खेती तक सीमित रहने के बजाय बाजार की मांग के अनुरूप फसल चुनने का अवसर दिया है.कई किसान अब साग-सब्जियों के साथ अलग-अलग नकदी फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं. बारहमासी सिंचाई सुविधा के कारण फसल उत्पादन का चक्र बढ़ा है.इससे किसानों को मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलें लेने और अपनी कृषि आय को मजबूत करने का अवसर मिल रहा है.

सौर ऊर्जा बनी आत्मनिर्भर खेती का आधार

‘सौर सुजला योजना’ नारायणपुर के वनांचल में सिर्फ सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों को ऊर्जा और कृषि दोनों स्तरों पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन रही है. सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई से किसानों को खेती के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत मिला है और दूरस्थ क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों को गति मिली है.

खेतों में बढ़ती हरियाली, फसल विविधीकरण और सालभर खेती की संभावनाएं यह संकेत दे रही हैं कि सौर ऊर्जा वनांचल के किसानों के लिए कृषि विकास का मजबूत आधार बन सकती है.नारायणपुर में 4,722 से अधिक किसानों तक पहुंची यह पहल आने वाले समय में ग्रामीण आजीविका और कृषि आय को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

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