LPG की जगह इथेनॉल स्टोव को बढ़ावा देने की मांग, उद्योग ने सरकार को लिखा पत्र

LPG की जगह इथेनॉल स्टोव को बढ़ावा देने की मांग, उद्योग ने सरकार को लिखा पत्र

इथेनॉल और एलपीजी के बीच तुलना को लेकर AIDA के पत्र में इथेनॉल को एक स्वच्छ, सस्ता और घरेलू विकल्प बताया गया है. इसमें इथेनॉल आधारित कुकिंग को बढ़ावा देने, नीति बनाने, सुरक्षा मानक तय करने और चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की गई है. यह पहल देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और बायोफ्यूल सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.

क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 13, 2026,
  • Updated Apr 13, 2026, 2:23 PM IST

देश में एलपीजी (LPG) पर बढ़ती निर्भरता और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बीच इथेनॉल को रसोई गैस के विकल्प के रूप में बढ़ावा देने की मांग उठी है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर अतिरिक्त इथेनॉल के उपयोग के लिए नए रास्ते तलाशने का सुझाव दिया है.

पत्र में कहा गया है कि हाल के वैश्विक हालात के कारण एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे खासकर कमर्शियल यूजर्स को परेशानी हो रही है. ऐसे में भारत को अपने कुकिंग फ्यूल के विकल्प बढ़ाने की जरूरत है.

इथेनॉल उत्पादन में तेजी

एसोसिएशन के अनुसार, देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ी है और आने वाले समय में इसका अतिरिक्त उत्पादन (सरप्लस) भी हो सकता है. ऐसे में इथेनॉल आधारित कुकिंग सॉल्यूशन इस अतिरिक्त उत्पादन को खपाने का एक अच्छा विकल्प बन सकता है.

पत्र में यह भी बताया गया है कि इथेनॉल से खाना बनाने के कई फायदे हैं. इससे एलपीजी के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी. इसके अलावा, इथेनॉल जलने पर कम प्रदूषण फैलाता है, जिससे घर के अंदर की हवा भी साफ रहती है.

इथेनॉल आधारित चूल्हे लागत के लिहाज से भी सस्ते हो सकते हैं और इन्हें गांवों और छोटे शहरों में आसानी से अपनाया जा सकता है. साथ ही, इससे किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलों की मांग बढ़ेगी.

इथेनॉल कुकिंग को बढ़ावा

एसोसिएशन ने सरकार से इस दिशा में नीति बनाने और इथेनॉल कुकिंग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने की अपील की है, ताकि देश में स्वच्छ और सस्ता कुकिंग फ्यूल उपलब्ध कराया जा सके.

तकनीकी दृष्टि से, इथेनॉल का कैलोरी मान एलपीजी से कम है, लेकिन स्टोव डिजाइन में सुधार, बेहतर बर्नर और कुशल फ्यूल डिलीवरी सिस्टम के जरिए इस अंतर को काफी हद तक कम किया जा सकता है, जिससे यह प्रैक्टिकल रूप से खाना पकाने के लिए उपयोगी बन सकता है.

यह पहल देश की प्राथमिकताओं के मुताबिक है, जैसे कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना और घरेलू बायोफ्यूल सेक्टर को मजबूत करना. साथ ही, यह नई तकनीकों और उपयोग के तरीकों को बढ़ावा देती है और इथेनॉल उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करती है.

मंत्रालय से की गई प्रमुख मांगें

  • इथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के रूप में अपनाने के लिए नीति और नियामक ढांचा तैयार किया जाए
  • इथेनॉल चूल्हों के लिए सुरक्षा, क्वालिटी और प्रदर्शन के मानक विकसित किए जाएं
  • इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, खासकर कमर्शियल, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में

AIDA (ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन) ने कहा है कि वह इस पहल में सरकार की मदद करने के लिए तैयार है और उद्योग से जुड़े अनुभव, तकनीकी जानकारी और लागू करने के रास्ते साझा करेगा.

संगठन फिलहाल एक प्रमुख संस्थान के साथ मिलकर इथेनॉल आधारित कुकिंग सॉल्यूशन पर एक विस्तृत रिपोर्ट (व्हाइट पेपर) और प्रोटोटाइप तैयार करने पर काम कर रहा है. इस पहल का उद्देश्य तकनीकी जांच, बेहतर डिजाइन और बड़े स्तर पर लागू करने के रास्ते तैयार करना है, ताकि भारत में इसे आसानी से अपनाया जा सके.

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