AI in Agriculture: खेती में AI के इस्‍तेमाल पर 'लगाम' जरूरी, किसानों के हित में एक्‍सपर्ट्स ने उठाए सवाल

AI in Agriculture: खेती में AI के इस्‍तेमाल पर 'लगाम' जरूरी, किसानों के हित में एक्‍सपर्ट्स ने उठाए सवाल

कृषि में AI आधारित सलाह किसानों के लिए मददगार बन रही है, लेकिन इसकी जवाबदेही सबसे बड़ा सवाल बन गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना नियम और निगरानी के एग्रीटेक कंपनियों की सलाह फसल और किसानों की आय के लिए जोखिम पैदा कर सकती है.

AI Use in Agriculture Concerns by expertAI Use in Agriculture Concerns by expert
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 17, 2026,
  • Updated Feb 17, 2026, 2:03 PM IST

कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही किसानों को दी जा रही एआई आधारित सलाह (AI Based Crop Advisory) की जवाबदेही एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है. अगर एग्रीटेक कंपनियों की सलाह गलत साबित होती है तो उसका सीधा असर किसानों की फसल, आय और आजीविका पर पड़ता है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा, यह अब तक स्पष्ट नहीं है. नई दिल्ली में AI और डिजिटल एग्रीकल्चर पर आयोजित एक सत्र में आईआईटी जाेधपुर के पूर्व निदेशक शांतनु चौधरी ने कहा कि अगर कृषि से जुड़े फैसले और सलाह AI के जरिए तय हो रही है तो उसकी गुणवत्ता और सटीकता को लेकर जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है. 

बिना नियम-निगरानी के जोखिम में किसान

उन्‍होंने कहा कि खेती केवल तकनीक का विषय नहीं है, बल्कि यह करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़ा मसला है. ऐसे में बिना निगरानी और नियमों के AI सलाह देना किसानों को बड़े जोखिम में डाल सकता है. उन्होंने कहा कि भारत में एग्रीटेक स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है और ये कंपनियां AI के जरिए फसल, मिट्टी, कीट और मौसम से जुड़ी सलाह दे रही हैं. लेकिन, इस पूरे सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए कोई ठोस ढांचा मौजूद नहीं है. 

भारत की चुनौती एक निगरानी तंत्र बनाना: शांंतनु चौधरी

बिजलेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चौधरी ने आगे कहा कि अमेरिका जैसे देशों में सरकार की भूमिका AI आधारित नवाचार को बढ़ावा देने और उसे स्केल करने की है, जबकि भारत में सबसे बड़ी जरूरत जवाबदेही तय करने और निगरानी तंत्र विकसित करने की है. उन्‍होंने कहा कि AI आधारित कृषि सलाह को पूरी तरह मॉनिटर करने योग्य और ट्रेसेबल बनाया जाना चाहिए. यह भी जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर उस सलाह को चुनौती दी जा सके. 

उन्होंने कहा कि ऐसी सलाह का कोई व्यावसायिक या अनैतिक उद्देश्य नहीं होना चाहिए. कई बार कंपनियां अपने प्रोडक्ट या सेवाओं को बेचने के लिए सलाह को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे किसान नुकसान उठा सकते हैं. इसलिए ‘कॉन्टेस्टेबल एडवाइस’ यानी जांच और सवाल के दायरे में लाई जा सकने वाली सलाह बेहद अहम है.

AI मॉडल के रजिस्‍ट्रेशन पर सवाल

AI मॉडल के पंजीकरण को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए. उन्‍होंने कहा कि जैसे बीज और दवाओं के लिए पंजीकरण और परीक्षण की प्रक्रिया होती है, वैसे ही AI मॉडल के लिए भी स्पष्ट प्रोटोकॉल तय होने चाहिए. अगर कोई कंपनी यह दावा करती है कि उसका AI 99 फीसदी सटीक है तो यह जानना जरूरी है कि यह सटीकता किस डेटा पर आधारित है और क्या अलग-अलग इलाकों, मिट्टी की किस्मों और मौसम की स्थितियों में भी यह उतनी ही कारगर है.

मॉडल ड्रिफ्ट बड़ी चि‍ंता का विषय

भारत में खेती की एक बड़ी चुनौती जमीन का खंडित होना है. एक ही गांव में अलग-अलग खेतों की मिट्टी, नमी और खेती का इतिहास अलग हो सकता है. ऐसे में एक खेत के डेटा पर प्रशिक्षित AI मॉडल दूसरे खेत में लागू करने पर गलत नतीजे दे सकता है. इसे तकनीकी भाषा में मॉडल ड्रिफ्ट कहा जाता है. चौधरी ने चेताया कि अगर इस ड्रिफ्ट को नजरअंदाज किया गया तो AI आधारित सलाह किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है.

AI को अपनाने के लिए मानक जरूरी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल कृषि के मानकों की अहम भूमिका बताई गई है. इंटरनेशनल टेलि‍कम्‍यूनिकेशन यूनियन की प्रतिनिधि अतुस्को ओकुदा ने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर और AI से जुड़े 200 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मानक पहले ही मंजूर हो चुके हैं और कई और तैयार किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये मानक इसलिए जरूरी हैं, ताकि सभी देश तय ढांचे के आधार पर AI को अपनाएं और किसानों तक सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीक पहुंचे.

वहीं, फ्राउनहोफर एचएचआई के वैज्ञानिक डॉ. रघु ने कहा कि भारत में करीब 13 करोड़ छोटे किसान हैं और इन तक AI आधारित नवाचार पहुंचाना बड़ी चुनौती है. किसानों की प्राथमिकता साफ है, जिससे लागत कम हो, उत्पादन बढ़े और फसल का बेहतर दाम मिले. AI को इसी समाधान के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके लिए भरोसेमंद और जवाबदेह सलाह जरूरी है. इसी बीच, केंद्र सरकार की कृषि के लिए एआई आधारि‍त भारत-विस्‍तार योजना भी चर्चा में है. 

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