सूखे ने दिखाई तबाही, अब AI से की नई शुरुआत, भारतीय उद्यमी लगाएगा हाइड्रोपॉनिक खेती में 214 करोड़

सूखे ने दिखाई तबाही, अब AI से की नई शुरुआत, भारतीय उद्यमी लगाएगा हाइड्रोपॉनिक खेती में 214 करोड़

कभी सूखे में पूरी फसल गंवाने वाले एक भारतीय उद्यमी ने हार मानने के बजाय खेती का तरीका बदलने का फैसला किया. अब वही अनुभव AI आधारित हाइड्रोपॉनिक खेती में 214 करोड़ रुपये के बड़े निवेश की वजह बनकर उभरा है. पढ़ें पूरी खबर...

AI Based Hydroponic FarmingAI Based Hydroponic Farming
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 17, 2026,
  • Updated Feb 17, 2026, 12:53 PM IST

करीब दस साल पहले कर्नाटक में अदरक की खेती करने वाले उद्यमी विवेक राज ने भीषण सूखे में अपनी पूरी फसल गंवा दी थी. किसानों को वर्षों का पैसा पहले ही दे चुके राज के लिए यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं था, बल्कि भरोसे और मेहनत के टूटने जैसा था. सरकारी राहत भी किसानों तक ही सीमित रही, लेकिन खेती में निवेश करने वाले विवेक के लिए कोई सहारा नहीं था. उसी दौर में उन्होंने तय किया कि खेती को पूरी तरह मौसम के भरोसे छोड़ना अब सही नहीं है. यहीं से उन्‍होंने इनडोर और हाइड्रोपॉनिक खेती पर रिसर्च की शुरुआत हुई. अब उनका यह अनुभव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हाइड्रोपॉनिक खेती में 214 करोड़ रुपये के निवेश का आधार बन गया है.

AI बेस्‍ड खेती के 4 सिस्‍टम तैयार किए

कई वर्षों तक तकनीक पर काम करने के बाद राज की कंपनी पनामा हाइड्रो-एक्‍स (Panama Hydro-X) ने AI आधारित चार ऐसी प्रणालियां विकसित की हैं, जो खेती के पारंपरिक जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं. इनमें फसल में बीमारी के शुरुआती संकेत पहचानने वाला सिस्टम, पत्तियों के रंग में होने वाले सूक्ष्म बदलाव पकड़ने वाली AI तकनीक और पौधों की जरूरत के अनुसार रोशनी देने वाला स्मार्ट LED सिस्टम शामिल है.

अदरक की पैदावार 3 गुना तक बढ़ी

ट्रायल के दौरान इन तकनीकों के नतीजे चौंकाने वाले रहे. अदरक की पैदावार पारंपरिक खुले खेतों की तुलना में तीन गुना तक दर्ज की गई. जहां पहले एक एकड़ से सीमित उत्पादन होता था, वहीं AI आधारित हाइड्रोपॉनिक सिस्टम से साल में तीन फसल चक्र संभव हुए. इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ा, बल्कि मौसम की मार से फसल के नष्ट होने का खतरा भी काफी घट गया.

16 एकड़ में हाइड्रोपॉनिक फार्म तैयार होगा

अब विवेक की कंपनी इस तकनीक को बड़े स्तर पर उतारने की तैयारी है. कंपनी ने कर्नाटक के मूडबिद्री इलाके में 16 एकड़ जमीन खरीदी है, जहां 2026 के अंत तक अत्याधुनिक हाइड्रोपॉनिक ढांचा तैयार किया जाएगा. इस जमीन पर केसर, अदरक और कई औषधीय पौधों की खेती होगी. केसर और अदरक का निर्यात कॉस्मेटिक और फार्मा कंपनियों को किया जाएगा, जबकि औषधीय फसलों की सप्लाई घरेलू बाजार में होगी. पहली व्यावसायिक फसल 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है.

इंजीनियरों की टीम करेगी देखरेख

विवेक राज ने कहा कि उनकी यह पहल सिर्फ मुनाफे की नहीं, बल्कि खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. वह फिलहाल इस तकनीक को लाइसेंस पर देने के बजाय खुद के प्रोजेक्ट में इसकी सफलता साबित करना चाहते हैं. इसके साथ ही मंगलुरु में इंजीनियरों की टीम तैयार की जा रही है, जो AI सिस्टम की निगरानी और संचालन करेगी. (पीटीआई)

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