
भारत आज दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. खेती के क्षेत्र में भी अब नई तकनीक का उपयोग हो रहा है. पहले किसान अपने अनुभव से खेती करते थे, लेकिन अब मोबाइल, कंप्यूटर, सैटेलाइट और मशीनों की मदद से सही समय पर सही फैसला लेना आसान हो गया है. इससे खेती आसान, सुरक्षित और ज्यादा लाभ देने वाली बन रही है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसी तकनीक है जिससे मशीनें इंसानों की तरह सोचने और समझने का काम करती हैं. जैसे हम पढ़कर सीखते हैं, वैसे ही मशीनें भी डाटा देखकर सीखती हैं. वे मौसम की जानकारी, मिट्टी की हालत और फसल की तस्वीरें देखकर बता सकती हैं कि किसान को क्या करना चाहिए.
सरकार ने डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन शुरू किया है. इसके तहत 7.63 करोड़ से ज्यादा किसानों को एक खास पहचान संख्या (Farmer ID) दी गई है. 23.5 करोड़ से ज्यादा खेतों की जानकारी भी डिजिटल रूप से इकट्ठी की गई है. इससे सरकार और किसान दोनों को सही जानकारी मिलती है और योजनाओं का फायदा सीधे किसान तक पहुँचता है.
फसलों को कीड़े और बीमारियाँ नुकसान पहुंचाते हैं. इसके लिए नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS) बनाया गया है. यह 66 तरह की फसलों और 432 से ज्यादा कीटों की पहचान कर सकता है. किसान फसल की फोटो अपलोड करते हैं और उन्हें तुरंत सलाह मिलती है. इससे फसल जल्दी बचाई जा सकती है.
किसान ई-मित्र एक एआई चैटबॉट है जो किसानों के सवालों के जवाब देता है. यह 11 भाषाओं में काम करता है और हर दिन 8,000 से ज्यादा सवालों के जवाब देता है. दिसंबर 2025 तक इसने 93 लाख से ज्यादा सवालों का जवाब दिया है. इससे किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से मिलती है.
2025 के खरीफ सीजन में एआई की मदद से मानसून कब आएगा, इसका अनुमान लगाया गया. यह जानकारी 13 राज्यों के 3.88 करोड़ किसानों को SMS से भेजी गई. कई किसानों ने इस जानकारी के आधार पर बुवाई का समय बदला. इससे उनकी फसल को फायदा हुआ.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में भी अब एआई का उपयोग हो रहा है. YES-TECH और CROPIC जैसी तकनीकें फसल का सही आकलन करने में मदद करती हैं. किसान व्हाट्सऐप चैटबॉट से भी जानकारी ले सकते हैं. इससे बीमा का पैसा जल्दी और सही तरीके से मिलता है.
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) नाम की नई एआई प्रणाली का प्रस्ताव रखा गया है. यह अलग-अलग कृषि पोर्टलों को जोड़कर किसानों को उनकी भाषा में सही सलाह देगी.
एआई की मदद से किसान जान सकते हैं कि कौन-सी फसल बोनी है, कब बोनी है और कितना पानी या खाद देनी है. मिट्टी की जांच, मौसम की जानकारी और बाजार के दाम जानना आसान हो गया है. इससे किसान ज्यादा पैदावार ले सकते हैं और नुकसान कम होता है.
भारत अब खेती को स्मार्ट और आधुनिक बना रहा है. एआई से खेती तेज, सटीक और सुरक्षित बन रही है. इससे छोटे और बड़े सभी किसानों को फायदा होगा. आने वाले समय में भारत की खेती और भी मजबूत और उन्नत बनेगी.
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