
फसलों में केमिकल इस्तेमाल किए बिना कीटों को नियंत्रित करने के लिए एग्रीटेक सॉल्यूशन कंपनी वावर (Wavar) हर गांव में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम) मिशन चलाएगी. इसके लिए वेवर ने कृषि सारथी (Krushi Sarthi) के साथ पार्टनरशिप की है. दोनों कंपनियां किसानों को कीटों की रोकथाम के लिए केमिकल प्रोडक्ट इस्तेमाल नहीं करने और टेक सॉल्यूशन से कीट प्रबंधन का तरीका सिखाएंगे और प्रमुख कृषि क्षेत्रों में आईपीएम प्रथाओं को अपनाने में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे.
टिकाऊ और इनोवेटिव सॉल्यूशन के जरिए भारतीय कृषि को बदलने की दिशा में काम कर रही अग्रणी एग्रीटेक कंपनी वावर ने कृषि सारथी के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है. बयान में कहा गया कि प्रमुख कृषि क्षेत्रों में एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) तरीकों को अपनाने में तेजी लाई जा सकेगी. यह सहयोग वावर के हर गांव आईपीएम मिशन में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. कंपनी ने कहा कि बड़े पैमाने पर कृषि समुदायों को टिकाऊ कीट प्रबंधन समाधान उपलब्ध कराना है.
इस साझेदारी के जरिए वावर और कृषि सारथी उन्नत आईपीएम टेक्नोलॉजी के साथ किसानों को सशक्त बनाने, रासायनिक निर्भरता को कम करने और फसल स्वास्थ्य में सुधार के साथ ही प्रॉफिट बढ़ाने के लिए अपनी जॉइंट एक्सपर्टीज का इस्तेमाल करेंगे. वावर के एग्रीटेक सॉल्यूशन प्रोडक्ट को एग्री प्रोडक्ट ऑनलाइन मार्केटप्लेस कृषि सारथी पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, जहां से किसान इन पेस्ट कंट्रोल सॉल्यूशन उपकरणों को हासिल कर सकेंगे.
वावर के कोफाउंडर संजय शिरोडकर ने कहा कि कृषि सारथी के साथ यह साझेदारी स्थायी कीट प्रबंधन तरीकों को अधिक आसान और प्रभावशाली बनाना के हमारे मिशन में एक अहम कदम है. वावर के इनोवेटिव आईपीएम सॉल्यूशन को कृषि सारथी की मजबूत क्षेत्रीय उपस्थिति और किसानों के साथ उसके जुड़ाव के साथ हमारा टारगेट बड़े पैमाने पर सार्थक बदलाव लाना है. साथ मिलकर हम किसानों में 'हर गांव आईपीएम' को एक वास्तविकता बनाने में आश्वस्त हैं.
एग्री प्रोडक्ट ऑनलाइन मार्केटप्लेस कृषि सारथी अपनी साझेदार कंपनी वावर के इंट्रीग्रेटेड पेस्टम मैनेजमेंट सॉल्यूशन को जमीनी स्तर पर लागू करने में अहम भूमिका निभाएगी. इसके तहत किसानों के साथ जानकारी साझा करने, क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण और टिकाऊ समाधानों को अपनाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही कई कृषि केंद्रों में किसानों को निगरानी करने की जानकारी और ट्रेनिंग दी जाएगी. इससे कीट प्रबंधन के साथ ही किसान और मजबूत होंगे और बेहतर फसल हासिल करने के साथ ही खर्च भी घटाने में मदद मिलेगी.